मीडिया के समाप्त कर दिए जाने के बाद उसी से उम्मीद के पत्र

ये पत्र सूखे पत्रों की तरह इस इनबॉक्स से उस इनबॉक्स तक उड़ रहे हैं. हवा पत्तों को इस किनारे लगा देती है तो उस किनारे. इन नौजवानों को समझना होगा कि उनके भीतर आर्थिक मुद्दों की चेतना समाप्त कर दी गई है. तभी तो वे नेताओं के काम आ रहे हैं.

मीडिया के समाप्त कर दिए जाने के बाद उसी से उम्मीद के पत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर.

ये पत्र ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं. बेशक फ़ेसबुक की संपत्ति हो जाएंगे क्योंकि ये किसी और जगह संकलित नहीं है. ये पत्र सूखे पत्रों की तरह इस इनबॉक्स से उस इनबॉक्स तक उड़ रहे हैं. हवा पत्तों को इस किनारे लगा देती है तो उस किनारे. इन नौजवानों को समझना होगा कि उनके भीतर आर्थिक मुद्दों की चेतना समाप्त कर दी गई है. तभी तो वे नेताओं के काम आ रहे हैं. आगे भी काम आएंगेॉ. दो तीन साल से तो मैं ही इन पत्रों को देख रहा हूं और लिख रहा हूं. होना नहीं है कुछ.
 
चाहे वो पत्र राजस्थान का हो या बिहार का या मध्य प्रदेश या रेलवे की परीक्षा का. गुट बनाकर वायरल कराते रहिए दिन काटते रहिए. जनता ही जनता नहीं रही. यह वक्त नेता बनने का है. 

मध्य प्रदेश का पत्र: 

प्रिय, रवीश कुमार जी 
पिछले कुछ सालों में आपने नौकरी सीरिज पर बहुत कुछ लिखा भी है और चैनल के माध्यम से दिखाया भी है 
इस बार आपका ध्यान मध्यप्रदेश की शिक्षक भर्ती खींचना चाहता हूँ यहाँ आखिरी शिक्षक भर्ती 2012 में व्यापक स्तर पर धांधली  के साथ संपन्न हुई थी उसके बाद कोई भी भर्ती नही आई जबकि हजारों की संख्या में प्रति वर्ष शिक्षक रिटायर होते चले गए 
 व्यापंम जैसे घोटाले से बचने के लिए  प्रदेश स्तर पर परीक्षा कराने वाला ऑनलाइन तंत्र विकसित हुआ लेकिन फिर भी पिछले 8 सालों से एक भी शिक्षक भर्ती नहीं हो पाई 
क्योंकि "जहाँ धांधली की गुंजाइश खत्म, वहाँ भर्ती परीक्षा की संभावनाएं भी खत्म"
 2018 में सत्ता पलट से एक उम्मीद जगी 
कमलनाथ सरकार ने वर्ग1 और वर्ग 2 के शिक्षकों के लिए कुछ पद विज्ञापित कराए फरवरी-मार्च 2019 में उन विज्ञापित पदों के लिए नकल विहीन परीक्षा भी आयोजित की गई, कुछ महीनों बाद परीक्षा का परिणाम आया, एक लाख से ऊपर लोग सफल भी हुए लेकिन आज परीक्षा के लगभग डेढ़ साल बाद भी सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति न दी जा सकी 
गौरतलब है इस परीक्षा की वैधता (विज्ञापन के अनुसार) भी 2 वर्ष ही है जो अगले 6 महीनें में  समाप्त होने जा रही है
क्या होगा इस भर्ती का?
 अयोध्या वाले राम ही जाने !
निवासी, मध्यप्रदेश

बिहार का पत्र: 

हम सभी लैब टेक्निशियन कर्मी तकरीबन 10-16 बर्ष से रिक्त पदों पर नियुक्ति कर के स्वास्थ्य विभाग दृरा पदस्थापित है और आज सरकार यह कहती है कि आप लोग का डिप्लोमा कोर्स बिहार से बाहर राज्य से मान्यता प्राप्त है तो क्या‌ बिहार के निवासी बिहार से बाहर राज्य से शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकते हैं क्या यही हमलोग ने गुनाह किया है और आज  14 बर्ष बाद विभाग को याद आया. जबकि एक ही पद के लिए दो बार परीक्षा और साक्षात्कार नही होती है  जबकि स्वास्थय विभाग ने सभी लैब टेक्निशियन कर्मीयों को 14बर्ष पहले ही संपुष्टि दे दी है कि आप लोग का डिप्लोमा और डिग्री सरकार से मान्यता प्राप्त है फिर भी बिहार कर्मचारी चयन आयोग पटना दृरा अपनी मनमानी एवं घोर ‌भरष्पटाचार करते हुए मोटी रकम लेकर फ्रेशर्स अभियार्थी का‌ चयन किया जो न्याय संगत नही है ‌ कुल ‌ रिक्त पद 1772 है‌ कार्यरत ‌करमी  मात्र 783 है ‌फिर भी कर्मचारी चयन आयोग पटना को 1000 सिट फ्रेशर्स अभियार्थी को जैसे चाहे वैसे चयन करते हमलोग टेक्निशियन कर्मी को कोई आपत्ती नही है.
बिहार का पत्र:
✍🏻 बिहार में STET की परीक्षा 8 साल बाद 2019 में लिया गया.
✍🏻 परीक्षा जूता मोजा खोलवाकर, जैमर लगाकर लिया गया. परीक्षा कदाचारमुक्त एवं विल्कुल साथ सुथरा लिया गया.
✍🏻 केवल 4 केंद्रों पर प्रश्नपत्र देर से पहुंचने के कारण उस केंद्र पर हंगामा हुआ और उन सभी 4 केंद्रों की परीक्षा रद्द कर पुनः पटना में आयोजित की गई.
✍🏻 5 माह बाद #अपरिहार्य कारण बताकर परीक्षा रद्द कर दी गयी.
✍🏻 बोर्ड अध्यक्ष आनन्द किशोर जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने कहा कि परीक्षा में किसी प्रकार का कोई कदाचार नही हुआ है जिसका वीडियो भी आपको मैं भेज दूंगा.
✍🏻 अब इस कोरोना महामारी में परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया गया और 9 सितंबर से परीक्षा आयोजित की जाएगी.
✍🏻 हालांकि पटना उच्च न्यायालय में 5 केस परिणाम घोशित करवाने के लिए दर्ज करवाया गया.
✍🏻 माननीय उच्च न्ययालय ने परीक्षा नहीं कराने और उत्तर पत्रक का OMR SHEET नष्ट नहीं करने की बात कही थी.
✍🏻 इसलिए उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए आप सभी नेताओं और मीडिया बंधुओ से आग्रह है कि आप है कि हम सभी 2.5 लाख अभ्यर्थीगन के साथ न्याय हो इसके लिए आवाज उठाएं.
आपका विश्वासभाजन
समस्त STET अभ्यर्थीगन, बिहार.

रेलवे परीक्षा पत्र:

सर मैंने 2018 मैं रेलवे की टेक्नीशियन की परीक्षा दिया था जिसमें मेरा सिलेक्शन हावड़ा डिवीजन के अंतर्गत डीजल मैकेनिकल पोस्ट के लिए चयनित हुआ हूं. सर मुझे जॉइनिंग लेटर मिले हुए 4 महीने से भी अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक हम लोगों को ट्रेनिंग के संदर्भ में कोई भी जानकारी हावड़ा डिवीजन से नहीं मिल रही है. हम जब भी हावड़ा डिवीजन जा रहे हैं तब वहां के अधिकारी हम लोगों को यह कहकर भगा दे रहे हैं कि जब ट्रेनिंग शेड्यूल आएगा तब आप लोगों को बुला लिया जाएगा और यह कहते-कहते 4 महीना बीत चुका है जबकि दूसरे कैटेगरी के लड़के को जैसे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और भी अन्य को हम लोगों के सामने ट्रेनिंग में भेज दिया जा रहा है लेकिन हम डीजल मैकेनिकल वाले को कोई भी डेट कोई भी शेड्यूल नहीं दिया जा रहा है हम लोग बहुत ही मेंटल डिप्रेशन से गुजर रहे हैं सर आपसे अनुरोध है कि इस विषय पर आप थोड़ा संज्ञान ले इसे अपने प्राइम टाइम में दिखाएं. हम लोग हावड़ा डिवीजन के डीजल मैकेनिकल के कैंडिडेट है सर. कैटेगरी नंबर 31,34 & 150 ( Diesel Shed) . बहुत-बहुत धन्यवाद सर.
केंद्रीय परीक्षा का पत्र: बिहार से आया है 

सेवा में,
माननीय रविश सर.
विषयः- सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में “डिग्री-लाओ-नौकरी-पाओ” 
   प्रणाली की जगह  प्रतियोगिता परीक्षा आयोजन कराने के संबंध में .
महोदय,
      पूरी भारत में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा से होती है जिसे आप सत्यापित अपने तरीके से भी कर सकते हैं पर हमारे बिहार राज्य में 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, पटना' ने इस उच्च योग्यता और कुशलता वाले पदों पर नियुक्ति करने हेतु “डिग्री-लाओ-नौकरी-पाओ” को नियुक्ति का आधार बनाया है, जो किसी भी दृष्टिकोण से सही प्रतीत नहीं हो रहा है . महोदय हम निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर बिहार में भी सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति, प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर करने की विनम्र मांग करते हैं .
महोदय “डिग्री-लाओ-नौकरी-पाओ” प्रणाली भर्ती की सबसे पुरानी पद्धतिओं में से एक है, जिसमे व्याप्त खामियों को देखते हुए प्रत्येक राज्य इसके जगह प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित करवाकर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर रहें है . फिर हमारे बिहार में भी क्यों न पुरानी पद्धति को त्याग कर प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा योग्य और बेहतर और समनुकूल पेशेवर का चयन किया जाये इससे बिहार के छात्रों को भी ज्यादा अवसर मिलेगा क्योंकि हम बिहारी विद्यार्थी डिग्री जुटाने के जगह कठिन मेहनत और लगन के लिए जाने जाते रहे है और किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा में ज्यादा से ज्यादा सफलता हासिल करते आ रहे हैं इसका गवाह यूपीएससी जैसे परीक्षा भी हैं
      महोदय, विभिन्न विश्विद्यालयो के मूल्यांकन प्रणाली और उनके प्राप्तंको में बहुत अंतर है जैसे बिहार के लगभग सभी विश्वविद्यालय भारत में सबसे कम मार्किंग के लिए जाने जाते हैं.
इससे भी बड़ा अंतर सेमेस्टर और ऐनुअल एक्जाम सिस्टम के प्राप्तांकों में है . ग्रेडिंग और नन ग्रेडिंग के बीच प्राप्तांकों में तो और ज्यादा अंतर है- उदाहरणस्वरूप बिहार के सभी विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में जहां 65% पर गोल्ड मेडलिस्ट हो जाता है वहीं बनारस हिन्दी विश्वविद्याल (BHU) में एक सामान्य छात्र भी 80% तक अंक पाता है . ऐसे में प्रतियोगिता परीक्षा के जगह “डिग्री-लाओ-नौकरी पाओ” के आधार पर नियुक्ति घोर अन्यायपूर्ण और अवसर की समानता के खिलाफ है, जिससे मेधावी और कुशल छात्र-छात्राओं के पात्रता भी नहीं बच पा रहा है .
बिहार में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में इसी “डिग्री-लाओ-नौकरी-पाओ” नियम को आधार बनाया जाता रहा है, जिसके कारण बिहारी छात्रों को कम अवसर मिल पाता है . चूंकि बिहार बोर्ड और बिहार के यूनिवर्सिटीज भारत के सबसे कम मार्किंग वाले बोर्ड और यूनिवर्सिंटी है अतः प्रतियोगित परीक्षा के जगह एकेडमिक अंकों पर भर्ती बिहारी छात्रों के प्रति घोर अन्याय है
इसके अलावा लिखित प्रतियोगिता परीक्षा विभिन्न पृष्टभूमि के छात्रों को समान अवसर देता हैं, प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा चुने जाने पर भाई भतीजावाद का अवसर कम रहता है .
महोदय भारत हीं नही अमेरिका और यूरोप में भी कॉपी पेस्ट किये पीएचडी थिशिस की बात सामने आई हैं वैसे में इन सन्दिग्ध मानकों के बजाए लिखित परीक्षा द्वारा नियुक्ति सबके लिये न्यापूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है .
लिखित परीक्षा द्वारा आज के बच्चो के जरूरतों के अनुसार शिक्षण अभिरुचि,मनोविज्ञान और विषय आधारित सवालों को सम्मलित करते हुए एक ज्यादा बेहतर समयानुकूल और लचीले शिक्षक का चयन सम्भव है जो एकेडमिक अंक विधि में नहीं सम्भव हैं
इसी कारण मध्यप्रदेश, ओडिसा, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश आदि अन्य अनेक राज्य सहायक प्रोफेसर का चयन खुली प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा करते हैं
अतः हम अपने बिहार राज्य में भी खुली प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति की उम्मीद करते हैं ताकि शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन होने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में होनेवाली क्रांति में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकेंगे  .
       अतः हम महोदय से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि आप इस संदिग्ध, दोषपूर्ण और पुरानी पद्धति “डिग्री-लाओ-नौकरी-पाओ” प्रणाली के जगह खुली प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा नियुक्ति कराने की कृपा कर के  न केवल बिहार राज्य का मान बढ़ाने में भागेदारी सुनिश्चित करेंगे अपितु राष्ट्रीय स्तर पर भी मान-सम्मान बढ़ाने में महती भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे .
निवेदक ~
बिहार के सहायक प्रोफेसर के योग्य समस्त छात्र-छात्राएं .

बिहार से आया पत्र : 

*प्लस टू अतिथि शिक्षकों से भी हटाया जाए अतिथि शब्द,मिले एक समान सम्मान.
शिक्षकों को विभिन्न प्रकार से सम्मान देने की बात सनातन समय से ही होता आया हैं, शिक्षकों को पूजनीय माना जाता हैं, उन्हें सम्मानित किया जाता हैं.इसी परंपरा का निर्वाह आज भी 15 अगस्त 26 जनवरी एवं 5 सितंबर के दिन विभिन्न प्रकार से प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया जाता है. इस बार भी बहुत सारे शिक्षकों को 15 अगस्त के दिन माननीय मुख्यमंत्री बिहार सरकार श्री नीतीश कुमार महोदय,छात्र छात्राओं को पढ़ाने और राजकीय संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने में अपना अहम योगदान देने वाले शिक्षकों को हर साल की तरह इस बार भी सम्मानित करेंगे, प्रशस्ति पत्र देंगे, एवं समाज में बदलाव हेतु एक नया अध्याय लिखेंगे.
विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से एवं टीवी चैनलों के माध्यम से यह ज्ञात हो रहा है की इस बार श्री नीतीश कुमार महोदय एक नया अध्याय लिखेंगे 15 वर्षों के अपने शासनकाल में नियुक्त किए गए नियोजित शिक्षकों से उनका नियोजित शब्द हटाकर उन्हें विभिन्न प्रकार के सुविधाओं सहित सम्मान देंगे. साथ ही सेवा शर्त,ट्रांसफर पोस्टिंग, वेतन वृद्धि, अनुकंपा एवं विभिन्न प्रकार के सुविधाएं जो पूर्व में शिक्षकों को दिया जाता था, वह नियोजित शिक्षकों को मिलेगा. जिससे लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षक लाभान्वित होंगे.यह सम्मान का दिन है ,आज सभी नियोजित शिक्षक बहुत खुश हैं के उनके नाम से अब नियोजित शब्द हट जाएगा, खबर तो यह भी है कि अब बिहार में  उपनाम वाले शिक्षक नहीं रहेंगे.

नियोजित शिक्षकों से नियोजित शब्द हटाकर जिस तरह से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार उन्हें विशेष सम्मान दे रहे हैं यह अकल्पनीय है,सच कहे तो यह एक ऐतिहासिक बदलाव का दिन है.पौने चार लाख शिक्षकों को यह सम्मान मिलना गर्व की बात है.वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय , उत्क्रमित मध्य विद्यालय , उच्च माध्यमिक विद्यालय  में सहायक शिक्षक एवं नियोजित शिक्षक कार्यरत है. उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में अतिथि एवं नियोजित शिक्षक कार्यरत हैं.अब जब नियोजित शिक्षक से नियोजित शब्द हटा लिया जाएगा तो यह सोचनीय प्रश्न है कि मात्र 4203 अतिथि शिक्षकों को यह सम्मान ना मिले.इन्हें भी यह सम्मान मिलना चाहिए, इनसे भी अतिथि शब्द हटे, इन्हें भी विभिन्न प्रकार के लाभ मिले. नाम मात्र की यह संख्या को भी अगर यह लाभ मिले तो इतनी बड़ी संख्या(पौने चार लाख)में कोई अंतर नहीं आने वाली है. पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों में अगर 4203 अतिथि शिक्षकों को जोड़ लिया जाए तो कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ने वाला यह एक नाम मात्र की संख्या है जो अपने सम्मान के लिए विभिन्न प्रकार से नियमितीकरण की बात करते रहें हैं.

अतिथि शिक्षक राजन भारद्वाज बताते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा विभाग के आदेश द्वारा  कैबिनेट से पास होकर हम सभी अतिथि शिक्षकों की बहाली उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की गुणात्मक, रचनात्मक सहित शैक्षणिक वातावरण में बदलाव हेतु की गई थी. जिसकी संख्या मात्र 4203 हैं, जो 38 जिला के विभिन्न उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं एवं जुलाई 2018 से लगातार,बिना किसी सेवा टूट के लगातार सेवा देते आ रहे हैं. शिक्षा विभाग सहित शिक्षा मंत्री भी यह मानते हैं कि अतिथि शिक्षक उच्च योग्यता धारी एवं उच्च अनुभवी शिक्षक हैं .

अतिथि शिक्षकों के बदौलत ही इंटर परीक्षा परिणाम 2019 एवं 2020 में करीब 40% की बढ़ोतरी हुई. अतिथि शिक्षक की नियुक्ति में एक आम पॉइंट ऐड कर दिया गया था कि, अतिथि शिक्षकों का मानदेय प्रति कार्य दिवस ₹1000 देय होगा. जिसे विपत्र 25 पर भरकर देना होगा. इसमें एक और पॉइंट था, जिसके कारण अतिथि शिक्षक 2018 जुलाई से ही शोषण के शिकार होते रहे हैं,इसमें कहा गया था के विद्यालय प्रधानाचार्य अपने आवश्यकतानुसार अतिथि शिक्षकों से कार्य ले सकते हैं यही वह मुख्य कारण है की अतिथि शिक्षकों की स्थिति अपने विद्यालयों में दयनीय थी. हमेशा उन्हें बार-बार अतिथि अतिथि अतिथि कहकर मजाक उड़ाया जाता था. उन्हें सप्ताह में 2 दिन या काम नहीं हैं, कहकर घर वापस कर दिया जाता था. खैर धीरे धीरे शिक्षा विभाग को हम लोगों ने अवगत कराया तो उन्होंने इस पर एक्शन लिए और हमारे सम्मान के लिए कई बार पत्र जारी किए कि उन्हें कार्य लिया जाए.

राजन भारद्वाज आगे बताते हैं की 2018 से लेकर 2020 तक का सफ़र कांटो भरा था. हम लोगों ने कई ऐसे परेशानियां झेले हैं. खैर अब दिन बदल रहा है शिक्षा विभाग हमें भी अब शिक्षकों के समान उत्तम व्यवहार करते हैं एवं विद्यालय में भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं. हम लोगों की नियुक्ति तो केवल शैक्षणिक करने के लिए हुई थी लेकिन शिक्षा विभाग ने बहुत सारे ऐशे गैर शैक्षणिक कार्य लिए, जैसे कि चुनाव में P2,P1ऑफिसर का कार्य,कोरोना के समय में कोरेंटिन सेंटर पर कार्य आदि आदि.

अतिथि शिक्षकों ने मात्र डेढ़ साल कंप्लीट होने के बाद इंटर एवं मैट्रिक कॉपी का मूल्यांकन करने का भी गौरव हासिल किया. अतिथि शिक्षकों की इसी कर्मठता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने लॉकडाउन में विद्यालय के बंद रहने के बावजूद,उन्हें कैलेंडर अनुसार कार्यरत मानते हुए मानदेय देने की भी बात की. जिसके लिए शिक्षा विभाग के प्रति अतिथि शिक्षक सदा ऋणी रहेंगे.

अतिथि शिक्षकों ने भी अपने 25 महीने के कार्यकाल में लगभग 15 माह से अपने नियमितीकरण की बात विभिन्न माध्यमों से सरकार के पास पहुंचाते रहे हैं कई बार शिक्षा मंत्री कैबिनेट मंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अपने नियमितीकरण की गुहार लगाई है. हर बार उन्हें आश्वासन मिलता रहा है.अपर मुख्य सचिव श्री आरके महाजन एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल जी को भी आवेदन देकर अपने नियमितीकरण की बात सरकार तक पहुंचाने की बात कही है.महत्वकांक्षी कार्यक्रम नल जल हरियाली के दौरान खुद अतिथि शिक्षक एवं शिक्षिका ने अपने हाथों से मुख्यमंत्री महोदय को स्मृति चिन्ह ,फूल देकर अपने नियमितीकरण की बात कहे हैं,हर बार मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया और कहा कि "सब दिन ऐशे थोड़े ही रहिएगा, नियमित होइये न जाइयेगा.''

करोना महामारी में भी अतिथि शिक्षक-शिक्षिका ने अपने-अपने विधायक, मंत्री, सांसद सहित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अनुशंसा प्राप्त कर अपने नियमितीकरण की गुहार लगाई हैं. फिर उस अनुशंसा को विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी ,शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा विभाग को सौंपा है. हर जगह +2 अतिथि शिक्षकों को आश्वासन मिला हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपने में नियमितीकरण की मांग को  सरकार तक पहुचाने का कार्य किए हैं. ट्विटर पर हजारों ट्वीट #अतिथिशिक्षकनियमितीकरणबिहार एवं #प्लस_टू_अतिथि_शिक्षक_नियमितीकरण_बिहार का किया जा चुका है. ट्विटर के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को मोतिहारी एवं मधेपुरा में नल जल हरियाली योजना कार्यक्रम के दौरान अतिथि शिक्षकों को दिए गए वादों को याद भी कराया गया है,हजारों ऐसे अतिथि शिक्षकों के ट्वीट हैं जिसमें वो लिखते हैं कि महोदय आपने कहा था कि "सब दिन अतिथि शिक्षक थोड़े ही रहिएगा,नियमित होइये न जाइएगा". आप अपना वादा पूरा करें ,हमें नियमित करें.साथ ही आज के दिन अर्थात 15 अगस्त के दिन  धोषणा करने की मांग की है.

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अब बात आती है कि जब  नियोजित शिक्षकों से नियोजित शब्द हटाकर सम्मानित किया जा रहा है तो अतिथि शिक्षकों को दिया हुआ वादा भी मुख्यमंत्री महोदय को पूरा करना चाहिए एवं उन्हें नियमितीकरण कर विभिन्न प्रकार की सुविधाएं देनी चाहिए. यह शिक्षकों सहित सम्पूर्ण बिहार के इतिहास में दर्ज हो जाएगा. राजन भारद्वाज आगे कहते हैं कि हमें माननीय मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास हैं,बिहार की शिक्षा विभाग में क़रीब पौने चार लाख शिक्षक, आगे डेढ़ लाख बहाली कर बिहार के शिक्षा में बदलाव कर रहे है, उसी प्रकार  +2 अतिथि शिक्षकों से अतिथि शब्द हटाकर ,बिभिन्न प्रकार की सुविधा देकर सम्मान भी देंगे.

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