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पाल, पटेल तक से प्रेरित पीयूष गोयल का रेलवे 20 महीने में भी पूरी नहीं करा सका परीक्षा

31 अक्तूबर को वह ट्वीट के ज़रिये सरदार पटेल से प्रेरित हो जाते हैं. लिखते हैं, "उनकी इच्छाशक्ति फौलाद जैसी दृढ़ थी, देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता अद्वितीय थी, उनका संकल्प अटल था... देशहित के लिए जो भी कार्य मिला, उन्होंने पूरी निष्ठा से पूर्ण कर दिखाया..."

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पाल, पटेल तक से प्रेरित पीयूष गोयल का रेलवे 20 महीने में भी पूरी नहीं करा सका परीक्षा

रेलमंत्री पीयूष गोयल.

आज रेलमंत्री पीयूष गोयल का ट्वीट देखकर बेहद खुशी हुई. उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बिपिन चंद्र पाल की जयंती पर याद किया है. लिखा है कि बिपिन चंद्र पाल पीढ़ियों को अपने राष्ट्रवाद और क्रांतिकारी विचारों से प्रेरित करते रहेंगे. कोई वाकई क्रांतिकारी विचारों से प्रेरित हो गया और सरकार को चुनौती देने लगा, तो सबसे पहले पीयूष गोयल ही उसे देशद्रोही कह देंगे या उनके समर्थक यह काम कर देंगे.

एक हफ्ता तक वह किसी महापुरुष से प्रेरित नहीं हुए. उनके ट्वीट पर किसी की जयंती या पुण्यतिथि का स्मरण नहीं है. 31 अक्तूबर को वह ट्वीट के ज़रिये सरदार पटेल से प्रेरित हो जाते हैं. लिखते हैं, "उनकी इच्छाशक्ति फौलाद जैसी दृढ़ थी, देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता अद्वितीय थी, उनका संकल्प अटल था... देशहित के लिए जो भी कार्य मिला, उन्होंने पूरी निष्ठा से पूर्ण कर दिखाया..."

बेहतर होता, आप इसी के साथ अपनी इच्छाशक्ति और मिले हुए कार्य को पूर्ण कर दिखाने का उदाहरण देते. भाईदूज, गोवर्धन पूजा, धनतेरस, छठ पर बधाई देना याद रहता है, लेकिन मंत्रालय का जो काम मिला है, उसका हिसाब देना याद नहीं रहता है. आख़िर इतने महापुरुषों से जिस शख्स को इतनी प्रेरणा मिल रही हो, तो फिर उनका मंत्रालय 15,000 से अधिक उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग लेटर क्यों नहीं दे रहा है...? क्यों पटेल से लेकर पाल तक से प्रेरणा पाने वाले रेलमंत्री 20 महीने में परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं करवा सके...?


फरवरी, 2018 में रेलवे ने लोको पायलट और टेक्नीशियन की भर्ती निकाली थी. 20 महीने बीत गए, लेकिन अब भी इस परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. परीक्षा का रिज़ल्ट आ गया है. रिज़ल्ट के बाद दस्तावेज़ों की जांच हो चुकी है. मेडिकल भी हो चुका है. कोलकाता बोर्ड में ही 4,000 से अधिक टेक्नीशियन की ज्वाइनिंग नहीं हुई है. 1,409 लोको पायलट की ज्वाइनिंग नहीं हुई है. परीक्षा पास कर वे घर बैठे हैं. बेरोज़गार हैं. उम्मीदवारों के अनुसार सितंबर तक ज्वाइनिंग हो जानी चाहिए थी. अब नवंबर चालू हो चुका है.

इलाहाबाद बोर्ड से भी उम्मीदवारों ने मुझे लिखा है कि 10,000 पदों पर उम्मीदवार नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे हैं. हज़ारों की संख्या में छात्र इंतज़ार कर रहे हैं. दस्तावेज़ परीक्षण से लेकर मेडिकल जांच तक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. ज्वाइनिंग कब होगी, पता नहीं. क्या उन्हें घर बिठाकर सरकार अपने पैसे बचा रही है...? मगर यह तो देखिए कि दिन गुज़रने के साथ बेरोज़गारों पर क्या मुसीबत होती होगी...?

गोरखपुर बोर्ड के एक उम्मीदवार ने बताया है कि वहां लोको पायलट के 1,681 पद थे. 1,377 पदों पर भर्ती पूरी हो गई, लेकिन उसके बाद का पता नहीं चल पा रहा है. टेक्नीशियन का हाल तो और बुरा है. उनकी ज्वाइनिंग का पैनल तक नहीं बना है.

रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, मुंबई में 5,700 पद थे, मगर 600 की बहाली पूरी हुई है. ज्वाइनिंग हुई है. 4,100 उम्मीदवार अभी भी इंतज़ार कर रहे हैं.

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बेहतर है, रेलमंत्री अपना मूल काम करें. मेरे पास ही 20,000 से अधिक उम्मीदवारों का हिसाब है, जो पास हो जाने के बाद भी नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे हैं. यह संख्या और भी अधिक हो सकती है. मंत्री जी से आग्रह है कि सभी को एक हफ्ते के भीतर ज्वाइनिंग लेटर दे दें. उन्हें वेतन देना शुरू करें. इतना कर दें, तो काफी है. इसके बाद वे भूल भी जाएं कि आज किसकी जयंती है, तो किसी को बुरा नहीं लगेगा. सरदार को भी बुरा नहीं लगेगा, और न बिपिन चंद्र पाल को.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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