दिल्ली के दंगों में जाति, मजहब से ऊपर भी कई इंसान दिखे

ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने सनक के इस भयंकर दौर में भी बंटने और बांटने की राजनीति से इनकार कर दिया

दिल्ली के दंगों में जाति, मजहब से ऊपर भी कई इंसान दिखे

दिल्ली दंगों के बीच जब दंगाइयों को मज़हब और राजनीति के हिसाब से बांटकर देखा जा रहा है तभी ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने सनक के इस भयंकर दौर में भी बंटने और बांटने की राजनीति से इनकार कर दिया. दिल्ली दंगे को कवर करने गए कई पत्रकारों ने लिखा है कि हिन्दू और मुसलमान के बीच ऐसा भयंकर दंगा कभी नहीं देखा. उन्हें लगा है कि भरोसे की हर दीवार ढहा दी गई है. लेकिन उन्हीं खंडहरों से ऐसी कहानियां भी निकलकर आ रही हैं जो यकीन पैदा करती हैं कि दिल्ली अपनी इस ग़लती पर अफ़सोस करेगी और भरोसे की नई दीवार भी बनेगी.

हमारे पास एक सीसीटीवी फुटेज कहीं से घूमते हुए आया. इस वीडियो में एक मुस्लिम नौजवान भागा जा रहा है, उसके पीछे डंडे लेकर दंगाइयों की टोली दौड़ी जा रही है. वह गिर जाता है और डंडे पड़ने लगते हैं. तभी इस वीडियो से पता चलता है कि गली के रहने वाले लोग बाहर निकलते हैं और दंगाइयों को भगाते हैं. मुस्लिम नौजवान को बचा लेते हैं. काफी ध्यान से देखने पर लगता है कि इसमें कुछ सिख समुदाय के लोग हैं. एक घर में वह मुस्लिम लड़का जाता हुआ दिखता है. लगता है कि बच गया है. बचा लिया जाता है.  

जो बचा है वो भी दंगे के सदमे से बच नहीं सकेगा लेकिन अगर कोई इस तरह से बचाया गया हो तो बचाने वाले की यादें उसे भरोसा देती रहेंगी कि भारत में बहुत कुछ बचा हुआ है और बचा रहेगा. हम शुक्रिया अदा करना चाहते हैं दरियागंज के मोहम्मद अदनान का जिन्होंने हमें एक जिंदर सिंह सिद्धू और ज़ियाउद्दीन का फोन नंबर दिया. वरना हम इस कहानी तक नहीं पहुंच पाते. अदनान ने ही कहा कि सिद्धू अंकल ने ज़ियाउद्दीन की जान बचाई है. अदनान ज़ियाउद्दीन के छोटे भाई सिराजुद्दीन के दोस्त हैं.

25 फरवरी का यह वीडियो भजनपुरा के आसपास का है. समय 5 बजकर 40 मिनट है. गली में भागते हुए ज़ियाउद्दीन गिर जाता है और दंगाई मारने लग जाते हैं. तभी जिंदर सिंह सिद्ध जी बाहर आते हैं और दंगाइयों के बीच से ज़ियाउद्दीन को निकाल लाते हैं. उनके साथ छह और लोग भी बचाते हुए दिखते हैं. इनमें से कुछ के नाम हैं सुनील, विकास और जैन साहब. इन लोगों ने कइयों को बचाया है. लेकिन अपना नाम बहुत मुश्किल से बताने को तैयार हुए. पहले पता लगा कि बीजेपी के कार्यकर्ता हैं तो इससे इनकार किया और कहा कि मोदी जी दिल में रहते हैं. हमने कहा कि बीजेपी के भी होते तो भी प्राइम टाइम की बड़ी खबर होती... तो हंसने लगे. इनमें से सुनील और सोनू ने ज़ियाउद्दीन को बाइक के बीच में बिठाया और तिमारपुर तक छोड़ दिया. उससे पहले जिंदर सिंह सिद्धू जी ज़ियाउद्दीन को अपने घर ले गए. तीन घंटे तक बिठाया, पानी पिलाया, हौसला देकर सामान्य किया. अपनी पगड़ी उतारकर ज़ियाउद्दीन के सर पर बांधने का प्रयास किया लेकिन उसकी मूंछें नहीं थी तो सरदार ही नहीं लगता. फिर उस पगड़ी से चेहरे को बांध दिया. ज़ियाउद्दीन को हेलमेट पहना दिया गया. जो सिख अपनी पगड़ी के लिए जान दे देता है, वही सिख अपनी पगड़ी उतारकर किसी की जान बचा लेता है. धीमे से ही सही, इस कहानी को सुनते हुए सिद्धू साहब, जैन साहब, सोनू, विकास और सुनील को शुक्रिया ज़रूर कहिएगा.

दिन भर मनाता रहा कि आप लोगों का नाम देना ज़रूरी है. आखिरकार तैयार हो गए. तो सभी का शुक्रिया. ज़ियाउद्दीन की बाइक दंगाइयों ने जला दी. ज़ियाउद्दीन का कहना है कि सब कुछ इतना भयावह था कि वह टूट गया है. ज़ियाउद्दीन के रिश्तेदार जिंदर सिंह सिद्धू, सुनील, विकास और जैन साहब के लिए दुआएं पढ़ रहे हैं.

ज़ियाउद्दीन भी घबराहट से भरे थे. सदमे से उबर नहीं पाए हैं. किसी तरह फोन से ही बात कर सके. हम समझ सकते हैं. प्रेम कांत बघेल को भी याद रखिए. जब दंगाई पड़ोसी मुसलमान के घर आग लगा कर चले गए तो उन्हें बचाने प्रेम कांत बघेल कूद पड़े खुद जल गए. उनका इलाज चल रहा है.

एक सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि रात अंधेरे बंदूक लेकर यह नौजवान लौट रहा है. इसके साथ जितने भी नौजवान हैं सबने मोटे कपड़े पहने हैं. हेलमेट पहने है, हाथों में डंडे हैं. ये किसे मारकर आ रहे हैं, किसे मारने जा रहे हैं, कोई नहीं जानता. लौट तो ऐसे रहे हैं जैसे हिंसा कर स्टेडियम के पैवेलियन लौट रहे हैं. क्या यह मंज़र भयावह नहीं है. ऐसे में किसी की जान बचाना भी जान पर खेलना है. भजनपुरा से ही एक और रिपोर्ट है. इस कहानी के नायक सलमान सिद्दीकी हैं. 24 फरवरी से ही एक वीडियो वायरल हो रहा था. कोमल शर्मा नाम के नौजवान ने ही वीडियो बनाया था. जिसमें वो खुद दुकानों में आग लगा रहा था. जय श्री राम का नारा लगा रहा था. लोग हैरान थे कि इतनी कम उम्र का लड़का और इसकी बातों में इतनी हिंसा कहां से आ गई. दुकान जला रहा है. यह अबोध ईश्वर का मतलब इस रूम में जानेगा कोई सोच भी नहीं सकता लेकिन अब ये हमारे समाज की सच्चाई है. जब कोमल भीड़ बनकर हिंसा कर रहा था तो इस वीडियो में उसका तेवर कुछ अलग था. शेर टाइप लग रहा था.

वीडियो वायरल होने के कारण कोमल शर्मा की पहचान इतनी हो गई कि लोगों ने चांदबाग के मोहल्ले में पकड़ लिया. लोग उसे पकड़कर हिंसा की उस आग में फेंक देना चाहते थे जिसकी चिंगारी लेकर वो खुद एक वीडियो में घूमता दिख रहा था. तभी सलमान सिद्दीक़ी ने जान पर खेलकर कोमल शर्मा को बचाकर निकाल लिया. भीड़ को हाथ लगाने नहीं दिया. सलमान कोमल को अपने घर ले आया. 100 नंबर पर फोन किया और पुलिस को बुलाकर सौंप दिया.

परिमल हमारे सहयोगी की रिपोर्ट है कि चांदबाद के गली नंबर 2 के ब्लाक सी में हिन्दू परिवार गिने चुने हैं. ज़्यादातर मुसलमान ही रहते हैं. फिर भी मंदिर सुरक्षित रहा. यहां तीन मंदिर हैं. मंदिर को नुकसान नहीं होने दिया. मुसलमानों ने मंदिर को बचाया. पुजारी ने कहा कि उसके परिवार को भी नुकसान नहीं होने दिया. बाहर से आई भीड़ उकसाने का प्रयास करती रही मगर गली के मुसलमान बचाते रहे.

उधर अशोक नगर की एक मस्जिद बचाने के लिए हिन्दू लोग खड़े हो गए. यहां पर दस घर मुसलानों के हैं जहां एक छोटी सी मस्जिद है. 25 फरवरी को दोपहर तीन बजे हिंसक भीड़ आई और मुसलमान घरों और मस्जिद में आग लगाने की कोशिश की. लेकिन पास के हिन्दुओं ने मुसलमानों को अपने घर में पनाह दी और मस्जिद को जलाने नहीं दिया. हमारे सहयोगी जहां भी गए एक बात सुनने को मिली कि दंगाई बाहर से आए थे. यह बात हिन्दुओं ने भी कही और मुसलमानों ने भी.

चांदबाग के एफ ब्लाक की गली नंबर एक का हाल देखिए. दरवाज़े पर ताले ही लटके हैं. कोई इन तालों को देखकर बता सकता है कि कौन सा ताला हिन्दू है कौन सा ताला मुस्लिम है. पचास के आस पास घर हैं. इसी गली के बाहर चांदबाग का प्रदर्शन चल रहा था. यमुना विहार और भजनपुरा के बीच की यह गली दोनों तरफ की पत्थरबाज़ी में फंस गई थी. सबसे नजदीक का यही मोहल्ला था. ज़ाहिर है लोग पलयान कर गए.

दंगे ने लोगों के रोज़गार छिन लिए हैं. दुकानें बर्बाद हो गई हैं. अपनों की जान गई है उनके नाम को लेकर सोशल मीडिया पर बंटवारा हो चुका है. लेकिन आप आइए जीटीबी अस्पताल के मोर्चुरी तक, यहां कोई हिन्दू भी अपनों को खोजता आता है, कोई मुस्लिम भी. बुधवार को नीतेश कुमार को ढूंढते हुए उनके पिता राम सुमीरत पासवान इस मोर्चुरी में पहुंचे थे. 15 साल का नीतेश घर से लापता था. राम सुमिरत रिक्शा चलाते हैं. 27 फरवरी की सुबह पता चला कि नीतेश दंगाइयों के हाथ मारा गया है. जीटीबी अस्पताल में मरने वालों की संख्या में 34 हो गई है. एलएनजेपी में 4 मौत हुई हैं. और अरविंद अस्पताल में एक मारुफ की. इस तरह मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़ कर 39 हो चुकी है. रवीश रंजन बता रहे थे कि पोस्टमार्ट में काफी देरी हो रही है. कई परिवार अपनों के पार्थिव शरीर का इंतज़ार कर रहे हैं. जब रवीश रंजन ने पूछा कि पोस्टमार्टम में देरी क्यों हो रही है तो अस्पताल के अधीक्षक ने कहा कि पुलिस से पूछिए. 27 फरवरी की शाम तक सिर्फ 9 लोगों का ही पोस्टमार्टम हो सका है. अंतिम संस्कार के लिए इतनी तकलीफ से गुज़रना पड़ रहा है. इसलिए इस हिंसा को समझने के लिए मोर्चुरी ही आना होगा. खास कर उन लोगों को लाइए जो सोशल मीडिया और गोदी मीडिया में मरने वालों और भड़काने वालों का मज़हब के हिसाब से बचाव कर रहे हैं.

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के ज़िम्मेदारों को कभी सज़ा हो पाएगी, जब तक होगी दो दशक गुज़र जाएंगे और तब तक कहीं और दंगे का राजनीतिक माहौल तैयार किया जा चुका होगा. मीडिया में दो चार नामों की चर्चा हो रही है लेकिन इतनी बड़ी हिंसा को अंजाम देने के पीछे जो दंगाइयों की फौज तैयार की गई थी, उन चेहरों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है.

पुलिस के सामने पिस्टल चलाने वाला शाहरुख अभी तक नहीं पकड़ा गया है. इसकी जांच हो रही है. दूसरी तरफ इस सीसीटीवी में जो टोली बंदूक और लाठी डंडे के साथ गुज़रती दिख रही है इसकी अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है. एक लड़का तो सरेआम किसी गली में गोली चलाते दिख रहा है, अभी तक बाहर है. जब तक ऐसे लोग बाहर रहेंगे, पकड़े नहीं जाएंगे, दंगाइयों का मनोबल नहीं टूटेगा. सोचिए पत्थर और चाकू से मारने वाले लोग समाज के बीच खुला घूमते रहेंगे. देश की कानून व्यवस्था पर हंसते हुए किसी की हत्या की तैयारी में लग जाएंगे.

कपिल मिश्रा पर अभी तक एफआईआर नहीं हो सका है. इसके लिए पुलिस को समय चाहिए. अब एक और नाम आया है. आम आदमी पार्टी का पार्षद ताहिर हुसैन.हिंसा के दौरान मारे गए आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा के परिवार का आरोप है कि उनकी हत्या के पीछे ताहिर हुसैन का हाथ है. अंकित शर्मा इसी इलाके के रहने वाले थे जिनका शव बुधवार सुबह पास के नाले में मिला. अंकित के शरीर पर चोट के कई घाव थे. अंकित की मां ने बड़ा ही ह्रदय विदारक वर्णन किया है.

इसी के साथ एक वीडियो  मीडिया के हाथ लगा. एक बहुमंज़िला इमारत की छत पर कई लोग हैं. और नीचे भी बड़ी संख्या में लोग हैं. यह वीडियो अपने आप में दिल्ली दंगे की भयावह तस्वीर पेश करता है. यह ताहिर हुसैन का घर बताया जा रहा है. वीडियो में छत पर मौजूद लोग पेट्रोल बम फेंकते हुए देखे जा सकते हैं. इमारत के नीचे भी लोगों का जमावड़ा है. इमारत और उसके आसपास की इमारत की दीवारों का रंग काला हो गया है. यह वीडियो खजूरी खास इलाके का है. ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी के पार्षद हैं. इस वीडियो से ताहिर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. यह वीडियो 25 फरवरी का बताया जा रहा है.  

ताहिर हुसैन का दावा है कि उनके घर का यह वीडियो है लेकिन तब का है जब वे घर में नहीं थे. वे 24 फरवरी को ही घर छोड़ चुके थे. दंगाइयों ने उनके घर पर कब्ज़ा कर लिया था. ताहिर हुसैन ने हमारे सहयोगी सौरभ शुक्ला से बात की है. ताहिर ने उन्हें बताया कि 24 फरवरी को उन्होंने 100 नंबर पर फोन किया. जब दंगाई उनके घर में घुस आए. देर रात पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर आलोक कुमार और डीसीपी सिंगला ने उनके घर की तलाशी भी ली. इसलिए ज़रूरी है कि डीसीपी आलोक कुमार को बताना चाहिए कि उन्होंने क्या देखा क्योंकि मीडिया में इस वक्त ताहिर खान की स्टोरी काफी बड़ी हो चुकी है. 27 फरवरी की प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस ने इस पर ठीक से कुछ भी जवाब नहीं दिया. सवाल है जब ज्वाइंट कमिश्नर और डीसीपी ताहिर के घर गए थे तो प्रेस को क्यों नहीं बताते हैं कि क्या हुआ ताकि उनकी भूमिका की प्राथमिक समझ साफ हो सके. वैसे ताहिर हुसैन और अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और आगजनी का केस दर्ज हो गया है. एक और वीडियो आया है जिसमें छत पर उतनी भीड़ नहीं है लेकिन  ताहिर हुसैन के हाथ में डंडा है और कुछ लोगों के चेहरे पर नक़ाब हैं. इस वीडियो को खुद ताहिर हुसैन ही दिखा रहे हैं. इसमें ताहिर के हाथ में डंडा है. कुछ युवक हैं जिनके चेहरे ढंके हैं. इस घर के नीचे से धुंआ उठ रहा है. ताहिर का कहना है कि इस वीडियो में वही दिख रहे हैं. यह वीडियो 24 फरवरी का है.

ताहिर के घर की छत का जो वीडियो है उसकी अलग से जांच होनी चाहिए. अंकित शर्मा की मां ने अपने बेटे की हत्या का आरोप ताहिर हुसैन पर लगाया है. उसका सवाल अलग है. 27 फरवरी को जब हमारे सहयोगी अक्षय ताहिर हुसैन की छत पर गए तो ईंट के टुकड़े बिखरे पड़े थे. बोरी में ईंट के टुकड़े रखे थे. क्रेट में बोतलें रखी हुई थीं. इन बोतलों की भी जांच होनी चाहिए. पेट्रोल बम हैं या एसिड भरा है. क्योंकि पहले वीडियो में छत से आग के गोले फेंकते हुए साफ देखे जा सकते हैं.

हमारे सहयोगी सौरभ शुक्ला ने आम आदमी पारटी के पार्षद ताहिर हुसैन से बात की है. ताहिर हुसैन ने कहा कि वो पीड़ित हैं ना कि दंगाई. इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ़ कह दिया कि हिंसा के लिए जो भी ज़िम्मेदार हो उसे सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए चाहे वो किसी भी पार्टी का हो... अगर वो आम आदमी पार्टी का है तो उसे दोगुनी सज़ा दी जाए.
 
उत्तर पूर्व दिल्ली के दंगों को लेकर एक बात साफ समझ लेनी चाहिए. इस दंगे में दोनों समुदाय के लोग शामिल हुए. कैसे फैला यह सवाल है लेकिन इसे फैलाने में कोई किसी से कम नहीं था. दिल्ली दंगों में 48 एफआईआर दर्ज हुई हैं, 20 और दर्ज होने जा रही हैं. 1000 सीसीटीवी फुटेज ज़ब्त किए गए हैं. एसआईटी का गठन किया गया है. आज लॉ एंड आर्डर के स्पेशल कमिश्नर ने दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया. अभी तक 106 गिरफ्तारी होने का दावा किया जा रहा है.

 
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