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अकबर लिख रहे हैं नई आइन-ए-अकबरी, रिपोर्ट कर रहे हैं रवीश कुमार

'मैं सपने में हांफ रहा था. हांफता हुआ साइकिल हांक रहा था. ख़ौफ़ जो न कराए. बादशाह का हुक्म है. कानून की समझ नहीं है. मैं आइन-ए-अकबरी कैसे लिख सकता हूं'

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अकबर लिख रहे हैं नई आइन-ए-अकबरी, रिपोर्ट कर रहे हैं रवीश कुमार

एमजे अकबर (फाइल फोटो)

मैंने कल रात सपना देखा. अख़बार में ख़बर छपी थी. बादशाह अकबर इस सवाल से तंग आ गए थे कि उन्होंने किस दर्जे की तालीम हासिल की है, 'समग्र सम्राट शास्त्र' में दीक्षित अकबर के जवाब से जनता मुतमईन नहीं हुई. अकबर ने अबुल फ़ज़ल से कहा कि हमारे ख़ास पत्रकारों को बुलाया जाए. घोड़े पर बिठा कर पंडारा रोड से होते हुए उन्हें इंडिया गेट पर लाया जाए और फिर वहां से राजपथ पर चलते हुए वे रायसीना पर आएं. अबुल फ़ज़ल ने जब टोका कि हुज़ूर-ए- हिन्दुस्तान आपकी गद्दी यमुना किनारे हैं. लाल क़िले में है. तिस पर बादशाह अकबर तुनक गए. कहा कि हम अब क़िले की नहीं क़िताब की तामिर करेंगे. हम अकबर हैं. बुलाओ रवीश कुमार को. अबुल फ़ज़ल ने फिर चेताया और कहा हुज़ूर-ए-हिन्दुस्तान वो तो आपका ख़ास नहीं है. सेहत के कारण उसने पकौड़ा खाना भी छोड़ दिया है. क्या आपने उनका नाम होश-ओ-हवास में लिया है? उस रात दिल्ली में ज़ोर की गरजन हुई. हां,बुलाओ उसे.कहो कि वह आईन-ए-अकबरी लिखे. नई आईन-ए-अकबरी. 

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मैं सपने में हांफ रहा था. हांफता हुआ साइकिल हांक रहा था. ख़ौफ़ जो न कराए. बादशाह का हुक्म है. कानून की समझ नहीं है. मैं आईन-ए-अकबरी कैसे लिख सकता हूं. तभी अशोक रोड के बाहर सोलह महिलाएं मिलीं. उन सबके हाथ में ख़त थे. सबने एक साथ मेरी साइकिल रोक दी. कहा कि रायसीना जा रहे हो तो हमारा  ख़त अकबर को दे देना. मैंने कहा इस ज़माने में हर अकबर ख़ुद को अकबर समझता है. आप किस अकबर की तरफ इशारा कर रही हैं. तभी एक लड़की आगे आई. अपना नाम प्रिया रमानी बताया. दूसरी ने कहा कि मैं प्रेरणा बिंद्रा हूं, तीसरी ने कहा कि मैं ग़ज़ाला वहाब. इससे पहले कि चौथी अपना नाम बताती मैंने कहा मोहतरमा, मैं आईन-ए-अकबरी लिखने जा रहा हूं. डाकिया नहीं हूं. इतने में सुपर्णा शर्मा ने कहा कि हम जानते हैं तुम डाकिया नहीं हो. इसलिए हमने 32 ट्विट किए हैं. तुम बादशाह अकबर से कहना कि उनके दरबार में एक अकबर है. जिसने ख़ातूनों के साथ ऐसी ऐसी ख़ताएं की हैं जिनकी सज़ा माफ़ नहीं हो सकती है. कांदम्बिरी कहती हैं कि अकबर के दरबार में दूसरा अकबर नहीं है. आप ग़लत समझ रही हैं. रूथ डेविड ने कहा कि तुम्हें दरबार की समझ नहीं है, अकबर ही बादशाह है और अकबर ही अकबर है. 

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अकबर ही बादशाह है और अकबर ही अकबर है, यह संवाद मेरे ज़हन से टकराने लगा. यह कैसे हो सकता है. सोलहवीं लड़की तुसीता पटेल ने कहा कि यही तो तुम नहीं समझे. अकबर ही तो अकबर है. स्वाति गौतम ने कहा कि ये देखो. हिन्दी के अख़बारों से ख़बर ग़ायब है लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड, हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय देखो. अकबर से अकबर को हटाने की मांग की गई है.  अकबर कैसे अकबर को बर्खास्त करेंगे? ये फ़लसफ़ा मैं नहीं समझ पा रहा हूं. मैं आईन-ए-अकबरी नहीं लिखूंगा. मुझे क़त्ल नहीं होना है. नई आईन-ए-अकबरी में इंसाफ़ का नया क़ायदा है. अकबर का इंसाफ़ अब तराज़ुओं में नहीं तौला जाएगा. अकबर का इंसाफ़ उसके इंसाफ़ नहीं करने की अदा से समझा जाएगा. इंसाफ़ का न होना ही इंसाफ़ का होना है. तुम सोलह लड़कियां यह बात कब समझोगी. नया इंडिया के लिए नई आईन-ए-अकबरी लिखी जा रही है.

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दोस्तों, सपना बेहद ख़ौफ़नाक था. मैं और मेरी साइकिल दोनों हांफ रहे थे. मेरे ज़हन में एक ही बात थी। जब अकबर ही बादशाह है तो अकबर अकबर से इंसाफ़ कैसे करेगा.   मैंने आईफोन टेन निकाला. यू ट्यूब में मुग़ल-ए-आज़म सर्च किया और सारे संवाद को फिर से सुनने लगा. मेरी घबराहट और बढ़ने लगी. अशोक रोड पर अकबर की बातें हो रही हैं. मैं यू ट्यूब पर मुग़ल-ए-आज़म देखने लगता हूं. किसी ने फिल्म का संवाद ही बदल दिया है. के आसिफ़ का मेसेज आता है. रवीश, मुग़ल-ए-आज़म मत देखो. गांधी और नेहरू की तरह मुग़ल-ए- आज़म के संवाद भी बदल दिए गए हैं. उसके बाद जो मैंने सुना, देखा मैं चाहता हूं कि आपको बता दूं. यह वो सपना है जो भयानक था. पेश है, मुग़ल-ए-आज़म. 


सीन- बादशाह अकबर अशोक रोड आ गए हैं. सोलह लड़कियां एक तरफ खड़ी हैं. दूसरी तरफ 97 वकीलों की फौज है. मेरे फोन का वाल्यूम तेज़ हो गया है.

अकबर- "अंधेरे और बढ़ा दिए जाएंगे." 

यह आवाज़ जैसे पूरी नई दिल्ली के इलाके में गूंज गई. गोदी चैनलों ने इसे तुरंत प्रसारित किया. अंधेरे और बढ़ा दिए जाएंगे. ब्रेकिंग न्यूज़ सुपर में फ्लैश करने लगा. संपादकों ने सर झुकाए. सबने एक स्वर से कहा. बादशाह आबाद रहें. हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद रहे. 

सोलह लड़कियों ने चीख कर कहा- आरज़ुएं और बढ़ जाएंगी. 

बादशाह अकबर के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई. उनके एक चेले ने ज़ोर की आवाज़ लगाई, 'हम बढ़ती हुई आरज़ुओं को कुचल देंगे'. 

सोलह लड़कियों ने कहा- और जिल्लेइलाही का इंसाफ़...

अकबर- हम एक लफ़्ज़ नहीं सुनना चाहते हैं. अकबर का इंसाफ़ उसका हुक्म है. तुम सबको मी टू भूल जाना होगा. 


सोलह लड़कियां- भूलना होगा?

अकबर- यक़ीनन, और सिर्फ जनता को भी यक़ीन दिलाना होगा कि अकबर ने तुम लोगों के साथ ऐसा कुछ नहीं किया. 

सोलह लड़कियां- जो ज़बान अकबर से ख़ौफ़ न खा सकीं, वो अकबर के लिए इनकार कैसे करेंगी?

अकबर- तुम कनीज़ हो. तुम लोगों ने 2019 के चुनाव में हिन्दुस्तान की मल्लिका बनने की आरज़ू की है. मी टू का ख़ूबसूरत बहाना ढूंढ लिया है. 

सोलह लड़कियां- यह सच नहीं है. खुदा गवाह है. ये सच नहीं है. 

अकबर- तुम सबको साबित करना होगा कि यही सच है. पटियाला कोर्ट यहीं बगल हमें हैं. ये 97 वकीलों की फौज तुम्हें कुचल देगी. 

सोलह लड़कियां- परवरदिग़ार! हमें हिम्मत अता कर. हम अपनी बात से नहीं मुकर सकती हैं. बादशाह अकबर आप अपना वादा नहीं भूल सकते हैं. 

अकबर- कौन सा वादा, मुझे कुछ याद नहीं. मैंने तुमसे कोई वादा नहीं किया था.

सोलह लड़कियां- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का वादा किया था आपने. क्या कुछ भी याद नहीं जिल्लेइलाही!

अकबर- मैं इस अकबर को नहीं हटा सकता. मैं ख़ुद को कैसे सज़ा दे सकता हूं. मैं अकबर को सज़ा कैसे दे सकता हूं. 

सोलह लड़कियां- जिल्लेइलाही, आप और आपका इंसाफ़, हिन्दुस्तान की तारीख़ में याद किया जाएगा. 

अकबर- मैं इंसाफ़ करने नहीं, चुनाव जीतने आया हूं. हम मजबूर हैं. अपने उसूलों के गुलाम हैं. एक गुलाम की बेबसी पर गौर करेगी तो शायद तुम हमें माफ कर सकोगी.  

सोलह लड़कियां- क्या यही आपकी आईन-ए-अकबरी है?

अकबर- तुम चाहो तो हम तुम्हें गुमनाम ज़िंदगी दे सकते हैं. हिन्दी अख़बारों के ग़ुलाम मालिकों को बुलाकर अकबर की सारी ख़बरें मिटवा सकते हैं. हिन्दुस्तान की याद से हम यह बात मिटा देंगे कि सोलह लड़कियों ने अपने जिस्म पर पड़े अकबर के घाव दिखाए थे.

सोलह लड़कियां- हम पर जो गुज़री है, उससे भी आपका दिल नहीं पिघला. जिल्लेइलाही हमें अफ़सोस है. अकबर आपके दरबार में है. 

अकबर- हमारे 97 वकीलों की फौज का सामना करो. इजलास में जाकर गवाही दो. अकबर के बग़ैर अकबर नहीं हो सकता. मुझे अकबर चाहिए. 

सोलह लड़कियां- हमें भी अकबर चाहिए. 

तभी मेरा यू ट्यूब हैंग कर जाता है. अकबर की नज़र मुझ पर पड़ जाती है. अकबर की खनखनाती आवाज़ मुझे पुकारती है. हमने तुम्हें आईन-ए-अकबरी लिखने को कहा और तुम मुग़ल-ए-आज़म देख रहे हो. हम तुम्हारे आईफोन-10 से 4 जी कनेक्शन कटवाने की हुक्म देते हैं. मैं बग़ैर फ़ोन के लावारिस घोड़े की तरह रायसीना पर चला जा रहा हूं. बहुत सी कारों का काफ़िला गुज़र रहा है. जिन पर आरोप लगे थे जनता उन्हें बादशाह चुनती है. जिन्होंने आरोप लगाए थे, जनता उन्हें दीवार में चुनवा देने का हुक्म देती है. मैं पत्रकारिता छोड़ देता हूं. संगतराश बन गया हूं. वही संगतराश जिसने अनारकली की शक्ल का बुत बनाया था. कहानियां ज़िंदा रखने के लिए पत्रकारों को संगतराश बनना होगा. सुबह नींद टूट जाती है. किसी दोस्त का फोन है. 2019 के बाद क्या करोगे, सोचा है? फोन करने वालों को किसी ने बता दिया था कि मैंने क्या सपना देखा था. सोचा आपको भी बता दूं. 

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