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Valentine's Day: मौसम का जादू...बादलों से आलिंगन में बंधी धरती

वेलेंटाइन डे पर भोर आंखें खोल ही रही थी कि रिमझिम फुहारों ने दिल्ली पर प्यार बरसाना शुरू कर दिया, वंसत ऋतु में प्यार के मौसम की दस्तक.

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Valentine's Day: मौसम का जादू...बादलों से आलिंगन में बंधी धरती

एक शानदार गीत है.. 'तारों में सजके, अपने सूरज से, देखो धरती चली मिलने...' लेकिन इस प्रेम दिवस (वेलेंटाइन डे) पर नजारा कुछ बदला हुआ है. मौसम 'रिमझिम-रिमझिम..भीगी-भीगी रुत में तुम-हम, हम-तुम....' का हो गया है. धरती बादल से मिली, प्यार की फुहार हुई. यह मौसम का जादू है जो मितवा को दिल पर काबू पाने की इजाजत नहीं देता. वैसे ऋतु तो वसंत है लेकिन वेलेंटाइन डे पर तो लगता है कि वसंत और सावन आलिंगन कर रहे हैं. प्रकृति जैसे कह रही है कि मौसम का तकाजा है कि टूटकर प्यार किया जाए. 

हालांकि मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की थी कि 14 फरवरी को गरज के साथा छींटे पड़ेंगे. आजकल मौसम विभाग की भविष्यवाणियां सही साबित होने लगी हैं. काश मौसम विभाग यह भी बता सकता कि किसका प्यार सफल होगा और किसका असफल! यह तो तोते लेकर सड़क के किनारे बैठे रहने वाले 'ज्योतिषी' बताते हैं, और जिनकी भविष्यवाणी अक्सर झूठी ही साबित होती है. 

वेलेंटाइन डे पर भोर आंखें खोल ही रही थी कि रिमझिम फुहारों ने दिल्ली पर प्यार बरसाना शुरू कर दिया. 'दिल्ली पर प्यार' इसलिए क्योंकि प्रदूषण के जहर को झेल रही देश की राजधानी को इन फुहारों से प्रेम से भरी राहत मिली. बारिश की छोटी-छोटी बूंदें न भिगो रही थीं, न सूखा रहने दे रही थीं, वे सुबह की सैर करने वालों को बस मस्त कर रही थीं. बादलों के धरती से मिलन की इस सुबह के बीच सूर्य ने झांकने की कोशिश की लेकिन चंद मिनिट बाद ही बादलों ने उसे परे धकेल दिया. सूरज आज बिछोह का गीत गा सकता है.     


कुदरत हमेशा संदेश देती है. कहने को तो वेलेंटाइन डे पश्चिमी देशों की परंपरा से आया है लेकिन भारत में इन्हीं दिनों की वसंत ऋतु प्रेम का संदेश देने वाली ही तो होती है. वसंत ऋतु आते ही इंसान तो ठीक पशु-पक्षी भी उल्लास से भर जाते हैं. यह उत्सव की ऋतु है. मौसमों का संधि काल है जिसमें सर्दियों का मौसम खत्म होता है और गर्मी दस्तक दे देती है. इन दिनों में पेड़-पौधों में नए पत्ते आ जाते हैं. फूल खिल उठते हैं. वसंत पंचमी भारतीय परंपरा का प्रेम दिवस ही है जब वृंदावन में राधा और कृष्ण के प्रेम की कहानियों को याद किया जाता है. प्यार के इजहार के लिए यह दिन सबसे मुफीद माना जाना है. वसंत पंचमी तो बीत गई लेकिन प्यार में डूबने की ऋतु खत्म नहीं हुई.   

बगरो बसंत है...
वसंत का जिक्र निकला तो लोक कवि पद्माकर की रचना को साझा किए बिना भला कैसे रहा जा सकता है-  

कूलन में केलि में कछारन में कुंजन में/ क्यारिन में कलिन में कलीन किलकंत है/. कहे पद्माकर परागन में पौनहू में/ पानन में पीक में पलासन पगंत है/ द्वार में दिसान में दुनी में देस-देसन में/  देखौ दीप-दीपन में दीपत दिगंत है/ बीथिन में ब्रज में नवेलिन में बेलिन में / बनन में बागन में बगरयो बसंत है... 

इस बार प्रेम दिवस पर वसंत नए रंगों के साथ मौजूद है, जब ठंड का मौसम कुछ ज्यादा लंबा हो गया है. यह उल्लास का मौसम है, आनंद और. मिलन का मौसम है. इस मौसम का भरपूर आनंद लिया जाना चाहिए.

 

सूर्यकांत पाठक Khabar.ndtv.com के डिप्टी एडिटर हैं.

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