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जब मायावती को गुस्सा आता है, तब गरिमा की गहराई पता चलती है...

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जब मायावती को गुस्सा आता है, तब गरिमा की गहराई पता चलती है...
"मैं सिर्फ राज्यसभा में नॉमिनेट होकर नहीं आई हूं, कई बार लोकसभा सदस्य भी रही हूं... यहां कोई भी बता दे कि कभी मैंने अपनी भाषा में अपशब्द बोले हों... विचारों की लड़ाई होती रहती है, विचारधारा को लेकर मैं हमेशा तीखा प्रहार करती हूं, लेकिन किसी के कैरेक्टर को लेकर कभी व्यक्तिगत हमला नहीं किया... कभी किसी नेता के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया... उपसभापति जी, बीजेपी उपाध्यक्ष ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, उन्होंने मुझे नहीं बोला है, अपनी बेटी के बारे में बोला है, अपनी बहन के बारे में बोला है... आज मुझे बोला है, कल सदन के और किसी सदस्य को बोलेंगे... सिर्फ खेद प्रकट करने से काम नहीं चलेगा, मुझे नेता सदन से कहना है, आप प्रधानमंत्री जी के साथ बैठक कीजिए और ऐसे आदमी को पार्टी से निकाल देना चाहिए, नहीं तो लोग सड़कों पर उतर आएंगे और मैं उसमें कुछ नहीं कर सकती..."

यह जो पंक्तियां आप पढ़ रहे हैं, वे बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो मायावती के उस भाषण के हिस्सा हैं, जो उन्होंने बुधवार को संसद में दिया... मामला दरअसल यह था कि उत्तर प्रदेश बीजेपी के नेता दयाशंकर सिंह ने मायावती के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था... दयाशंकर सिंह ने मायावती पर आरोप लगाया था कि पैसे की खातिर मायावती किसी को भी टिकट दे सकती हैं। मायावती पर हमला बोलते हुए दयाशंकर ने कहा था कि मायावती उन्हें टिकट देती है, जो ज्यादा पैसा देता है। पैसे के कारण मायावती टिकट काट भी सकती हैं और दे भी सकती हैं...

दयाशंकर सिंह के इस बयान के बाद मायावती का गुस्सा आसमान पर था... ऐसा बहुत कम बार संसद में देखने को मिला, जब मायावती संसद में चिल्लाई हों... मायावती के गुस्से के सामने सब चुप बैठे थे, मायावती को सुन रहे थे... मायावती अपने भाषण के दौरान कई बार खुद को 'बहन जी' कहकर संबोधित कर रही थीं... यह भी बताया कि संसद में ज्यादातर सांसद उन्हें 'बहन जी' के नाम से ही पुकारते हैं, दुनिया उन्हें 'बहन जी' के नाम से जानती है...

संसद में कल जो सबसे अच्छी बात देखने को मिली, वह यह थी कि बीजेपी के साथ-साथ दूसरी पार्टियों के नेता भी मायावती के साथ खड़े नज़र आ रहे थे। सदन के नेता अरुण जेटली की जितनी भी तारीफ की जाए, कम है... जेटली ने अपने भाषण में मायावती का साथ दिया और पार्टी की तरफ से और निजी तौर पर भी मायावती से माफी मांगी। जेटली ने कहा, दयाशंकर सिंह पर कार्रवाई की जाएगी और कुछ ही घंटों के भीतर दयाशंकर सिंह को पहले पार्टी के सभी पदों से हटा दिया गया, और फिर उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इन कदमों से बीजेपी का कद ऊंचा हुआ...

मायावती के भाषण की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि शांत स्वभाव के लिए जानी जाने वाली मायावती कल संसद में अशांत दिख रही थीं... अशांत मायावती के आक्रोश के सामने सब शांत थे... तीखी बात बोलने के लिए मायावती को कागज़ के टुकड़े का सहारा नहीं लेना पड़ रहा था... इससे पहले, मायावती के भाषण को लेकर इस तरह के सवाल भी उठते रहे हैं कि वह लिखे हुए भाषण पढ़ती हैं... संसद में और चुनाव सभाओं में भी कई बार ऐसा नज़ारा देखने को मिला है, जब मायावती लिखा हुआ भाषण पढ़ती दिखी थीं... पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी मायावती की इस बात को लेकर आलोचना हुई थी... कहा जा रहा था कि मायावती चुनावी रंग में खुद को नहीं ढाल पा रही हैं... मायावती रैलियों में कम बोल रही थीं और ज्यादा से ज्यादा लिखे हुए भाषण पढ़ रही थीं...

लेकिन पिछले कुछ दिनों में मायावती की छवि एक 'एंग्री वूमैन' के रूप में बनी है, क्योंकि यह पहली बार नहीं, जब मायावती ने ऐसा कुछ किया... कुछ दिन पहले भी जब स्वामीप्रसाद मौर्य ने बहुजन समाज पार्टी से इस्तीफा दिया था, तब उन्होंने मायावती पर आरोप लगाया था कि वह टिकट बेचती हैं... चुनावी टिकटों के लिए पैसा लेती हैं... मौर्य ने यह भी कह डाला था कि मायावती दलित की नहीं, दौलत की बेटी हैं...

फिर इसके बाद मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी थी... करीब आधे घंटे तक मायावती ने बिना कागज़ देखे अपनी बात को शानदार तरीके से रखा था... स्वामीप्रसाद मौर्य के हर सवाल का जवाब दिल से देते हुए उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया था... ऐसा लग रहा था कि मायावती सच बोल रही हैं और अपने दिल की बात कह रही हैं... इसी भाषण ने मायावती की छवि को बदल डाला था, और अब बुधवार को लोगों को यह विश्वास हो गया है कि वह कागज़ देखे बिना भी शानदार भाषण दे सकती हैं, और मायावती को आगे भी यह कोशिश करते रहनी चाहिए...

सुशील कुमार महापात्र NDTV इंडिया के चीफ गेस्ट को-ऑर्डिनेटर हैं...

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