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फॉलो करने का अर्थ सहमति नहीं, तो 'आप' के रीट्वीट से जेटली की मानहानि कैसे...?

भाजपा द्वारा इसका यह जवाब दिया जा रहा है कि फॉलो करने का मतलब विचारों से सहमति नहीं है. फिर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चढ्ढा द्वारा किये गए रीट्वीट को जेटली की मानहानि कैसे माना जा सकता है?

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फॉलो करने का अर्थ सहमति नहीं, तो 'आप' के रीट्वीट से जेटली की मानहानि कैसे...?

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार स्व. गौरी लंकेश की हत्या पर आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले वाले 4 लोगों को प्रधानमंत्री मोदी अपने निजी अकाउंट से क्यों फॉलो कर रहे हैं? भाजपा द्वारा इसका यह जवाब दिया जा रहा है कि फॉलो करने का मतलब विचारों से सहमति नहीं है. फिर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चढ्ढा द्वारा किये गए रीट्वीट को जेटली की मानहानि कैसे माना जा सकता है? आईटी एक्ट में 66ए के क़ानून को रद्द करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अब ट्विटरबाज़ी पर भी सुनवाई से कई सवाल खड़े हो गए हैं?  

पढ़ें- प्रधानमंत्री का किसी को ट्विटर पर फॉलो करना 'चरित्र प्रमाण' पत्र देना नहीं : बीजेपी

केवाईसी नियम से परे फेक यूजर्स की गुमनाम दुनिया- नया एकाउंट खोलने के पहले केवाईसी यानी नो योर कस्टमर का नियम ट्वीटर ने बनाया है, पर उसका शायद ही पालन होता हो. अमेरिका में ट्विटर द्वारा फाइल किये गए रिटर्न के अनुसार के उनके 8.5 फीसदी यूजर्स फेक हैं. पर इंडस्ट्री के अनुमान के तहत ट्विटर के 30 फीसदी तक यूजर्स फर्जी हो सकते हैं. फेक एकाउंट्स का इस्तेमाल ट्रोलिंग, लाईक्स और अन्य गैर-कानूनी कामों के लिए होता है, पर गुमनाम लोगों के खिलाफ पुलिस कैसे कारवाई करे?    
   
ट्विटर के हज़ार यूजर्स में 1 यूजर भी वेरिफाइड नहीं- यूजर्स के एकाउंट को ट्विटर द्वारा नीले रंग के टिकमार्क से वेरिफाइड करने का रिवाज़ है. विश्व में लगभग 33 करोड़ तथा भारत में 2.25 करोड़ लोग ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं. ग्राहकों की अनेक रिक्वेस्ट के बावजूद ट्विटर द्वारा आना-कानी करने से 2016 तक सिर्फ 2.3 लाख एकाउंट को ही वेरिफाइड का दर्ज़ा मिल पाया. परन्तु यूपी में भाजपा सरकार बनने पर योगी आदित्यनाथ की सहमति के बगैर उनके नाम के एकांउट को ट्विटर ने स्वयमेव वेरिफाई कर दिया. लालू की रैली के पहले बसपा के वेरिफाइड एकांउट से विपक्षी एकता का बैनर ट्वीट हुआ पर विवाद के बाद मायावती ने वेरिफाइड एकांउट से पल्ला झाड़ लिया और ट्विटर ने मौन.   

डिलीट होने पर ट्वीट का साक्ष्य भी गायब- स्व. गौरी लंकेश मामले में आपत्तिजनक ट्वीट को डिलीट कर दिया गया है. आपत्तिजनक ट्वीट डिलीट होने के बावजूद रीट्वीट के माध्यम से साइबर वर्ड में अमरत्व हासिल कर लेता है पर कानूनी जगत में साक्ष्य के तौर पर इसका सीमित महत्व है. आईपीसी तथा आईटी एक्ट के तहत साक्ष्य मिटाने के मामले को बनाने के लिए ट्विटर के अमेरिका ऑफिस तक भारत की पुलिस कैसे पंहुचे, इसका जवाब शायद ही सरकार के पास हो?  
 
हैकिंग के झूठ का फॉरेंसिक जांच से कैसे हो पर्दाफाश- ट्वीट करने के बाद ज्यादा हल्ला मचने पर एकांउट हैक होने का स्टैण्डर्ड बहाना मढ़ दिया जाता है. आपत्तिजनक ट्वीट के बाद हैकिंग के मिथ्या आचरण से आईपीसी के तहत आपराधिक मामला बनता है, पर इसके लिए मोबाइल की फॉरेंसिक जांच की हमारे थानों में सुविधाएं ही नहीं हैं. 
 
सरकारी कामों के लिए ट्वीटर का गैरकानूनी इस्तेमाल- केन्द्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए 2014 में राष्ट्रीय नीति बनी है, पर उसका शायद ही पालन होता हो. मंत्रियों द्वारा पुराने अकाउंट ज़ारी रखने की बजाय नये एकाउंट बनाने तथा ट्वीट का बैकअप या रिकॉर्ड से डिजिटल इंडिया में क़ानून के उल्लघंन पर कौन कारवाई करे?  

जब ट्विटरबाज़ बिंदास तो फिर फॉलोवर की जवाबदेही क्यों- स्व. गौरी लंकेश की हत्या के बाद आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले शख्स को प्रधानमंत्री यदि अपने आधिकारिक एकांउट @PMOindia से फॉलो करते, तो फिर कानूनी जवाबदेही बन सकती थी. निजी एकांउट @narendramodi  से किसी भी ट्विटरबाज़ को फॉलो करने पर नैतिक सवाल ही खड़े होते हैं, जिनका क़ानून की किताबों में शायद ही जिक्र हो.  

ट्वीटर में आतंकी और गुमनाम फॉलोवर की जवाबदेही किसकी- विश्व के नेताओं का दर्जा ट्वीटर में फ़ॉलोवर्स की सेना से निर्धारित होने लगा है. इन फ़ॉलोवर्स में बड़ी तादाद में आतंकी और आपराधिक तत्व होते हैं. कानून के अनुसार किरायेदार के लिए मकान मालिक की जवाबदेही होती है पर आपराधिक फ़ॉलोवर्स के लिए ट्वीटरबाज को कैसे जवाबदेह बनाया जाय? 

ट्रौलिंग ब्रिगेड के पास ट्विटर हैंडल्स के गैरकानूनी हथियार क्यों- सरकारी विभागों ने जनता के पैसे से बड़ी कंपनियों को पीआर एजेंट के तौर पर रखा है. ट्विटर द्वारा जारी नियमों के अनुसार ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं हो सकता, इसके बावजूद मंत्री और अधिकारियों के ट्वीट अन्य व्यक्तियों द्वारा किया जाते हैं.  

ट्विटर की अदालत में भारत के क़ानून कैसे लागू हों- बाबा राम रहीम के अकाउंट को भारत में नहीं ऑपरेट किया जा सकता, इसका फैसला ट्विटर ने लिया. सिंगर अभिजीत ने अकाउंट सस्पेंड होने के बाद दूसरा अकाउंट बना लिया, पर ट्विटर खामोश रहा. स्व. गौरी लंकेश की हत्या के बाद आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले वालों के खिलाफ ट्विटर ने कारवाई की चेतावनी दी है, पर भारत का क़ानून ऐसे मामलों में क्यों बेअसर है?    

रीट्वीट पर अवमानना की जवाबदेही- कानून के अनुसार आपत्तिजनक कन्टेंट को वितरित करने में भागीदारी पर जवाबदेही का प्रावधान है. स्व. गौरी लंकेश के विरुद्ध सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के मानहानि के मामले चल रहे थे, जिसमें उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. जेटली- केजरीवाल मामले से स्पष्ट है कि आपत्तिजनक ट्वीट पर मानहानि का दीवानी मामला भी चल सकता है. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आपत्तिजनक ट्विटरबाज़ को फॉलो करना यदि सही है तो फिर राघव चड्ढा के रीट्वीट को गलत मानकर उन पर मानहानि का मामला कैसे बनेगा? 

ट्विटरबाज़ी के बगैर कैसे होगी राजनीति- मोदी और केजरीवाल की सरकार को बनाने में सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण रोल रहा है. अमेरिकी कंपनी के नियम, भारत के क़ानून और अदालती आदेशों को ट्विटरबाज़ी पर शब्दशः लागू करने पर यदि साइबर वर्ल्ड खामोश हो गया तो देश में राजनीति कैसे होगी? 


विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहींहै.


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