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जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य की बहाली और कानूनी चुनौतियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में जम्मू एवं कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश (UT) के दर्जे को अल्पकालिक कदम बताते हुए, भविष्य में वहां पूर्ण राज्य की बहाली का भरोसा जताया है.

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जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य की बहाली और कानूनी चुनौतियां

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में जम्मू एवं कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश (UT) के दर्जे को अल्पकालिक कदम बताते हुए, भविष्य में वहां पूर्ण राज्य की बहाली का भरोसा जताया है. संविधान में अनुच्छेद 370 का प्रावधान भी अल्पकालिक था, जिसे ख़त्म करने में 70 वर्ष लग गए, तो अब UT से पूर्ण राज्य का दर्ज़ा कब और कैसे मिलेगा...? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शांति बहाली के बाद पूर्ण राज्य के दर्जे की वापसी हो सकती है, परंतु मणिशंकर अय्यर और वाइको जैसे नेता कश्मीर घाटी में फिलस्तीन जैसी अराजक स्थिति और अलगाव का अंदेशा जताने से बाज़ नहीं आ रहे. नए केंद्रशासित प्रदेशों का जन्म 31 अक्टूबर (सरदार पटेल की जयंती) को होगा, लेकिन उससे पहले नए कानून पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.

नए केंद्रशासित प्रदेश में पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) के हिस्से की विधानसभा सीटें : विभाजन के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) कहा जाता है. जम्मू एवं कश्मीर का लगभग 35 फीसदी हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है, जहां से पाकिस्तान दिवस पर इमरान खान अपने भारत विरोध का बिगुल फूक रहे हैं. दूसरी ओर, भारत की संसद द्वारा पारित जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन कानून में जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा क्षेत्र के लिए 90 सीटों के अलावा PoK क्षेत्र के लिए 24 सीटों का विशेष प्रावधान किया गया है. PoK के नाम पर ही कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी जैसे नेता संसद में UN का अजब सुर अलाप रहे थे. मणिशंकर अय्यर और अधीर रंजन को संसद में सन 1964 के रिकॉर्ड का अध्ययन करना चाहिए, जब अनुच्छेद 370 की समाप्ति के लिए संसद में पेश प्राइवेट बिल को कांग्रेस के सात सांसदों का समर्थन मिला था. उसके बाद कांग्रेस की पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार के समय भारत की संसद ने प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान से PoK वापस लेने की मांग भी की थी. अब गृहमंत्री अमित शाह ने PoK को वापस लेने की मांग को संसद में दोहराया है. तो क्या पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय के बाद ही जम्मू एवं कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा...?


लद्दाख के साथ अक्साई चिन का पेंच : चीन और पाकिस्तान ने मिलकर भारत के उत्तरी भाग के सामरिक महत्व के इलाकों में अवैध कब्जा कर रखा है और भारत के पास जम्मू एवं कश्मीर का सिर्फ 45 फीसदी हिस्सा ही बचा है. जम्मू एवं कश्मीर के 20 फीसदी इलाके वाले अक्साई चिन और ट्रांस–कराकोरम ट्रैक्ट पर चीन ने 70 वर्ष से कब्जा जमा रखा है. विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने चीन यात्रा के दौरान सफाई देते हुए कहा है कि भारत ने चीन के क्षेत्र और सीमा में कोई दखलअंदाज़ी नहीं की है, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा है कि केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में अक्साई चिन एवं ट्रांस का हिस्सा भी समाहित होगा. सन '47 में मिली आज़ादी के बाद से ही लद्दाख में अलग दर्जे की मांग उठने लगी थी. 70 साल बाद अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से अब वहां उल्लास का माहौल है.

अलगाववाद का खात्मा, विकास की नई धारा और पूर्ण राज्य की बहाली : जम्मू एवं कश्मीर में विशिष्ट संवैधानिक दर्जे के खात्मे के बावजूद पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज़ पर विशेष अनुदान की वित्तीय व्यवस्था बनी रहेगी. इसके तहत केंद्र सरकार द्वारा दी गई राशि में 90 फीसदी अनुदान और 10 फीसदी रकम बिना ब्याज के कर्ज के तौर पर मिलेगी. 14वें वित्त आयोग के सिफारिश के अनुसार, दोंनों नए केंद्रशासित प्रदेशों को स्पेशल फंड भी मिलेगा. हिमाचल प्रदेश की तर्ज़ पर जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेशों में बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर भी सशर्त प्रतिबंध जारी रह सकता है. स्वतंत्रता दिवस, यानी 15 अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के लिए विशेष ग्रांट और विकास पैकेज का भी ऐलान कर सकते हैं. तो क्या विकास की मुख्यधारा में आने के बाद जम्मू एवं कश्मीर के पूर्ण राज्य में लद्दाख को फिर शामिल किया जाएगा...?

जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में नई कानूनी व्यवस्था : अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने के बाद संविधान के सभी प्रावधान अब जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के नए UT में लागू होंगे. पुरानी व्यवस्था में कुल विधायकों के 15 फीसदी लोगों को मंत्री बनाया जा सकता था, परंतु अब केंद्रशासित प्रदेश में सिर्फ 10 फीसदी विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिलेगा. नई व्यवस्था के तहत अब जम्मू एवं कश्मीर की विधान परिषद भी ख़त्म हो जाएगी. दोनों केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक ही हाईकोर्ट की व्यवस्था होगी. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनी नई संवैधानिक व्यवस्था में दोनों नए प्रदेशों में 113 केंद्रीय कानून भी लागू हो जाएंगे. अब इन राज्यों में RTI, IPC, CrPC, PC Act, आधार, मुस्लिम महिलाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए अखिल भारतीय कानून लागू होंगे. सुरक्षाबलों को AFSPA कानून के तहत विशेष छूट और पुराने जनसुरक्षा कानून बरकरार रहने के साथ केंद्रीय राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) भी अब जम्मू एवं कश्मीर में लागू हो जाएगा.

नए केंद्रशासित राज्यों में केंद्र की बड़ी भूमिका : जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन कानून की धारा 13 के अनुसार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239ए और 7वीं अनुसूची की व्यवस्था अब इस UT में लागू होगी. दोनों नए केंद्रशासित प्रदेशों में कानून व्यवस्था और पुलिस का नियंत्रण उपराज्यपाल के माध्यम से सीधे केंद्र सरकार के अधीन होगा. केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली की तर्ज पर लद्दाख में भूमि के मामलों का नियंत्रण केंद्र सरकार के अधीन होगा. जबकि जम्मू एवं कश्मीर में भूमि का नियंत्रण, वहां की नई निर्वाचित सरकार के अधीन हो सकता है. दोनों नए केंद्रशासित प्रदेशों की IAS और IPS जैसी अखिल भारतीय सेवाओं और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के अधिकारियों पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होगा. केंद्रशासित प्रदेशों में संपत्ति और संसाधनों के बंटवारे, प्रशासन के पुनर्गठन और विधानसभा की सीटों के परिसीमन में साल भर तो लगेगा ही. लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा का प्रावधान नहीं नहीं है. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक समाचारपत्र को दिए इंटरव्यू में कहा है कि जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा चुनाव में एक साल का समय लग सकता है.

कानूनी चुनौतियों से पार पाने के बाद, अलगावाद पर लगाम लगे और पुनर्गठित राज्य में निर्वाचित सरकार का केंद्र सरकार से टकराव ख़त्म हो, तभी UT से पूर्ण राज्य के बहाली की उम्मीद करनी चाहिए.

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विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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