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CBI में तख्तापलट - इन सवालों का जवाब कब मिलेगा...?

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के दोनों पक्षों द्वारा दर्ज गंभीर शिकायतों पर अख़बारी चर्चा के बाद इस भ्रष्ट तंत्र पर सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई कब होगी...?  

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CBI में तख्तापलट - इन सवालों का जवाब कब मिलेगा...?

सीबीआई में तख्तापलट की घटना पर उठते कुछ सवाल...

आधी रात को संगीनों के साये में CBI मुखिया का तख्तापलट और राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच कर रहे अधिकारी को जनहित के नाम पर काले पानी की सज़ा. राग दरबारी का दांव काम कर गया और मामला अब अदालत में विचाराधीन है. राफेल पर आरोप-प्रत्यारोप और सरकारी स्पष्टीकरण से कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब अब शायद ही मिले...

हाईकोर्ट द्वारा पारित यथास्थिति के आदेश की सरकार द्वारा अवहेलना 
भ्रष्टाचार के आरोपों पर दर्ज FIR को रद्द करने के लिए अस्थाना द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिए थे. अगले दिन नए डायरेक्टर ने आधी रात को चार्ज लेने के बाद अस्थाना मामले की जांच कर रहे अधिकारी के साथ 12 लोगों का ट्रांसफर कर दिया. FIR के बाद आरोपी की सर्च और गिरफ्तारी की बजाय जांच अधिकारी के ट्रांसफर से क्या हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ है...?

क्या CVC को भी जबरन छुट्टी पर भेजा जा सकता है
CBI डायरेक्टर के दो साल के कार्यकाल को वैधानिक सुरक्षा होने की वजह से उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजना गैरकानूनी है. संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य लोग यदि सरकार के लिए तकलीफदेह हो जाएं, तो क्या राष्ट्रपति के माध्यम से उन्हें भी जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाएगा...? CVC को छुट्टी पर भेजने के लिए वर्ष 2003 के कानून की धारा 6 में प्रावधान है, तो क्या भविष्य में सरकारें उनके साथ भी ऐसा बर्ताव कर सकती हैं...?


दागी अफसर को CBI डायरेक्टर का चार्ज क्यों 
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) द्वारा जारी तीन नोटिसों के बावजूद आलोक वर्मा द्वारा जांच में सहयोग नहीं करने पर सरकारी कदम को तर्कसंगत बताया जा रहा है. अस्थाना द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर वर्मा को यदि जबरन छुट्टी पर भेजा गया है, तो अन्य दागी अफसर नागेश्वर राव को डायरेक्टर का अंतरिम चार्ज क्यों दिया गया...? राव के खिलाफ DMK नेता एमके स्टालिन ने भ्रष्टाचार के अनेक आरोप लगाए हैं.

दागी अफसर अस्थाना के खिलाफ CVC ने कार्रवाई क्यों नहीं की 
CBI अफसरों पर CVC के अधिकारक्षेत्र पर सुप्रीम कोर्ट में अब लम्बी न्यायिक बहस होगी. गुजरात कैडर के IPS अधिकारी राकेश अस्थाना को पहले भी CBI डायरेक्टर बनाने की कोशिश नाकाम हो गई थी. अनेक आरोपों को देखते हुए अस्थाना को CBI में स्पेशल डायरेक्टर बनाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने अक्टूबर, 2017 में CVC के पास सीक्रेट नोट भेजा था. CVC ने अस्थाना के खिलाफ सस्पेंशन और निर्णायक कार्रवाई करने की बजाय उन्हें वर्मा के साथ एक तराजू में क्यों तौल दिया...?

PMO, RAW और ED के दागी अफसरों पर कार्रवाई कब होगी 
CBI ने PMO, RAW और ED के अनेक अफसरों पर भ्रष्टाचार और वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं. जैन हवाला डायरी और वोहरा समिति की रिपोर्ट में अफसर, नेता और उद्योगपतियों के भ्रष्ट तंत्र का खुलासा हुआ था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अक्षम्य अपराध माना है. सफेदपोश अपराधों के लिए आस्ट्रेलिया में पिछले सप्ताह कठोर दंड की व्यवस्था की गई है. वर्मा और अस्थाना के दोनों पक्षों द्वारा दर्ज गंभीर शिकायतों पर अख़बारी चर्चा के बाद इस भ्रष्ट तंत्र पर सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई कब होगी...?
 
CBI में वसूली के नेटवर्क का कैसे होगा पर्दाफाश 

सोशल मीडिया में चल रहे जोक के अनुसार कीड़े मारने की दवा में ही कीड़े पड़ गए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में CBI द्वारा दिए गए जवाब में अस्थाना के खिलाफ वसूली का नेटवर्क चलाने का गंभीर आरोप लगाया गया है. पारदर्शी तरीके से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने बड़ी सरलता से अस्थाना और वर्मा दोनों को एक ही तराजू में तौल दिया. इस सर्जिकल स्ट्राइक से पिंजड़े में बंद तोते के पंख अब कट गए हैं, तो फिर सरकार द्वारा गठित नई SIT से वसूली के नेटवर्क का पर्दाफाश कैसे होगा...?

सुप्रीम कोर्ट भी इस संकट के लिए जिम्मेदार है
विनीत नारायण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1998 में दिए गए फैसले के बाद CBI डायरेक्टर के दो साल के सुनिश्चित कार्यकाल के लिए कानून बनाया गया. वर्तमान विवाद की जड़ में मीट व्यापारी मोइन कुरैशी है, जिसके खिलाफ CBI, इनकम टैक्स और ED द्वारा अनेक FIR दर्ज की गई हैं. पूर्व CBI चीफ रंजीत सिन्हा द्वारा आरोपी कुरैशी के साथ 70 बार मुलाकात करने का रजिस्टर सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया था. इसके बावजूद पुराने डायरेक्टर रंजीत सिन्हा और एपी सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कोई कार्रवाई नहीं की. सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ जस्टिस ने देशहित में जनता को संबोधित करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था, तो क्या वह अब CBI की साख बचा पाएंगे.

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विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.
 



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