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आधार जरूरी नहीं, पर उसके बगैर कैसे होगा गुजारा?

आधार के नाम पर अब होगी देश भर में एनआरसी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले में झोल

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आधार जरूरी नहीं, पर उसके बगैर कैसे होगा गुजारा?

केशवानंद भारती मामले में 13 जजों द्वारा 1973 में 700 पेज में दिया गया फैसला आज भी नजीर माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट में 6 साल की मुकदमेबाजी के दौर में 26 जजों ने आधार मामले को सुना और अब 1448 पेज के अंतिम फैसले से उलझनें और बढ़ गई हैं.

भारतीय नागरिकों के लिए, क्या आधार जरूरी है
अगस्त 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत सरकार रेडियो, टीवी और प्रिंट मीडिया में बड़े पैमाने पर प्रचार करे कि किसी नागरिक के लिए आधार बनवाना जरूरी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2013 से 2017 के बीच पारित अनेक अंतरिम आदेशों के बावजूद सरकार ने आधार को पिछले दरवाजे से जरूरी बनाकर अदालती आदेश को धता बता दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसले में अब बच्चों को 18 साल की उम्र होने पर आधार से बाहर निकलने का विकल्प दिया है. इसका मतलब यह है कि सैद्धांतिक तौर पर आधार लेना अब किसी नागरिक के लिए जरूरी नहीं है. परन्तु व्यवहारिक तौर पर क्या यह संभव है.

अमीरों के लिए पैन और गरीबों के लिए सब्सिडी का चाबुक
फैसले के अनुसार पैन कार्ड बनवाने और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार जरूरी है. देश में लगभग 36 करोड़ लोगों के पास पैन नम्बर है. बैंक में खाता खोलने, बीमा और सभी वित्तीय लेन-देन में पैन कार्ड जरूरी होता है तो फिर आधार के दायरे में मध्यम और उच्च वर्ग के सभी लोग आ ही जाएंगे. गरीबों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही 430 योजनाओं और सब्सिडी के लिए आधार अनिवार्य बना रहेगा. तो फिर आधार के दायरे से बाहर कौन रह सकेगा?


आधार का डाटा कैसे डिलीट होगा
सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे के अनुसार देश में 122 करोड़ लोगों को आधार नम्बर दिया जा चुका है. फैसले के अनुसार पांच साल की बजाय अब सरकार सिर्फ 6 महीने तक ही आधार के ऑथेंटिकेशन डाटा को सुरक्षित रख सकती है. प्राइवेसी पर 9 जजों की पीठ के फैसले के बावजूद सरकार डाटा सुरक्षा कानून बनाने में विफल रही. आधार पर फैसले के अनुसार बैंक, मोबाइल और अन्य निजी कम्पनियों द्वारा आधार का डाटा अब नहीं लिया जा सकता. जिन लोगों ने अपना आधार विवरण पहले ही बैंक और मोबाइल कम्पनियों को दे दिया है, उनके डाटा को डिलीट करना अब बड़ी चुनौती है. क्या इस बारे में सरकार द्वारा दिशा निर्देश जारी होंगे या लोगों को निजी स्तर पर प्रयास करने होंगे?

घुसपैठियों से आधार कैसे वापस लिया जाएगा
अपुष्ट खबरों के अनुसार देश में 4 करोड़ से अधिक घुसपैठिये और शरणार्थी हैं. केन्द्र सरकार द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार देश में रहने वाले हर व्यक्ति को आधार दिया जा रहा है. संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि घुसपैठियों को आधार नम्बर नहीं मिलना चाहिए. करोड़ों अनधिकृत लोगों को जब आधार नम्बर पहले ही मिल चुका है तो उनका पता कैसे चलेगा?

आधार के नाम पर अब होगी देश भर में एनआरसी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विदेश घुसपैठियों की पड़ताल के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर या एनआरसी की व्यवस्था लागू की गई थी. इसके तहत अवैध तौर पर असम में रह रहे 40 लाख लोगों को चिन्हित किया गया है. देश में अवैध तरीके से बसे 40 हजार रोहिंग्याओं को बाहर निकालना मुश्किल है फिर करोड़ों संदिग्ध घुसपैठियों पर कार्रवाई करना असंभव ही माना जाएगा. इसके बावजूद भाजपा द्वारा आम चुनावों के पहले देश भर में एनआरसी की व्यवस्था को लागू करने की मांग की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में यदि घुसपैठियों की देशव्यापी पड़ताल की गई तो एनआरसी की व्यवस्था को पिछले दरवाजे से लागू करने पर विवादों का नया आधार बन सकता है.

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(विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है .



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