भारतीय ट्रेनों की लेटलतीफ़ी की दास्तान

उत्तर भारत के गांवों से मज़दूर जब शहरों की तरफ पलायन करता है तो सबसे पहले अपनी आंत को सुखा लेता है ताकि पखाना पेशाब का सिस्टम मर जाए और जाने की नौबत ही न आए.

भारतीय ट्रेनों की लेटलतीफ़ी की दास्तान

मोदी सरकार के चार साल हुए हैं तो रेल मंत्रालय के भी चार साल हुए हैं. इस दौरान दो काबिल नेताओं को रेल मंत्री बनने का मौका मिला है. पहले सुरेश प्रभु और फिर डाइनैमिक पीयूष गोयल. आपके जमा टैक्स से रेल मंत्रालय के विज्ञापनों में न तो ट्रेन के देरी से चलने का डिटेल होता है और न ही प्लेटफार्म पर ठंडे पानी की ख़राब वेडिंग मशीन का. हमारे सहयोगी और दर्शक इस काम में सहयोग कर रहे हैं. बीजेपी के सांसद अंशुल वर्मा ने बताया कि मुरादाबाद मंडल यानी कई ज़िलों के प्लेटफार्म पर पानी की वेंडिंग मशीन ख़राब है. तो हमारे सहयोगी अनवर मुरादाबाद स्टेशन गए. वहां पर एक परिवार को शौचालय में बंद देखा. आप कह सकते हैं कि इसमें नया क्या है. इस लिहाज़ से भारत में फिर कुछ भी नया नहीं है. न नेता का झूठ नया है न उसका सब कुछ बदल देने का दावा नया है.

रेलवे की खिड़की से झांकती भारत की ग़रीबी. खिड़की पर खड़े इन बच्चों की आंखों में हमारी आपकी रेल यात्रा की स्मृति दौड़ने लगती होगी. मम्मी डैडी के साथ की गई रेल यात्रा और वो विंडो सीट पर बैठकर महान भारत को गुज़रते देखना. यहां किसी अपराधी की तरह स्तब्ध खड़े ये बच्चे हमारे कैमरे से भय ही खा गए होंगे कि उनकी तरफ बढ़ने वाला कैमरा न जाने क्या करेगा. कहीं उन्हें चलती ट्रेन से उतरवा तो नहीं देगा. कैमरा जैसे जैसे नज़दीक पहुंचता है, भीतर झांकता है तो पता चलता है कि यह कोच नहीं है, शौचालय है. इस शौचालय में आठ लोगों का परिवार बंद है. इन आठ लोगों ने टीवी पर न तो रेल मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस देखी है और न ही अखबारों में छपा विज्ञापन देखा है कि रेलवे का टर्न अराउंड हो गया है. अनवर ने दोनों शौचालय में देखा तो लोग भरे पड़े थे. यह ट्रेन कोलकाता से अमृतसर जाने वाली अकाल तख़्त एक्सप्रेस कहलाती है. उत्तर भारत के गांवों से मज़दूर जब शहरों की तरफ पलायन करता है तो सबसे पहले अपनी आंत को सुखा लेता है ताकि पखाना पेशाब का सिस्टम मर जाए और जाने की नौबत ही न आए. वरना जनरल बोगी में सवार लोग शौचालय तक पहुंच ही नहीं सकते हैं. सोचिए इन लोगों को इंग्लिश आती और इनका ट्विटर हैंडल होता तो ये लोग डाइनैमिक रेल मंत्री को क्या ट्वीट करते और हमारा कुलीन तबका कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करता. कभी आप जनरल बोगी में चलने वाले लोगों से इस बारे में सर्वे कीजिएगा. वैसे अनवर ने देखा कि मुरादाबाद स्टेशन पर ठंडे पानी की दो दो वेंडिंग मशीन ख़राब है.

हमने हरदोई स्टेशन का दिखाया कि कैसे पानी की वेंडिश मशीन तीन महीने से खराब है. चार पांच दिन दिखाने के बाद अगर पानी की वेंडिंग मशीन ठीक नहीं हो सकती है औ तब भी आप मीडिया से उम्मीद करते हैं, आपकी उम्मीदों को भी नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए. आज हम आपको बरेली रेलवे स्टेशन का हाल बताते हैं. यहां भी मशीन ख़राब पड़ी है. बरेली स्टेशन पर सात मशीनें हैं. दो के अलावा सब ठप्प पड़ी हैं. देखने से लगता है कि नई टाइप की मशीन लगी है और बड़ा भारी बदलाव आ गया है. मगर करीब से इसकी टोंटी सूखी है. यात्री सामान्य नल से ही पानी ले रहे हैं. स्टेशन पर तैनात मैनेजर के जवाब में स्पष्टता नहीं है. वे कहते हैं तीन मशीनें ठीक हैं. फिर भी चार तो ख़राब हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 7 महीने से कंपनी ने पैसा नहीं जमा किया था. अब जमा किया है तो मशीन जल्दी ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं. तो आपने देखा कि हरदोई और बरेली स्टेशन की पानी की वेंडिंग मशीन ख़राब है.

आपको लगता होगा कि हम यूं ही डाइनैमिक रेल मंत्री पीयूष गोयल के मंत्रालय की समीक्षा कर रहे हैं. आप उनके ट्विंटर हैंडल पर जाकर देखिए लोगों ने उनके रेल की कैसी समीक्षा कर रखी है. आप बताइये ट्रेन लेट होने से अगर किसी छात्रा की ज़िंदगी बर्बाद हो जाए और ऐसी कई और कहानियां सामने आ जाएं तब हमें क्या करना चाहिए. एक पत्र आया है. एक लड़की का एम्स की इम्तहान छूट गया. क्या उस लड़की को कोई दोबारा मौका दिलवा सकता है, तभी कहता हूं कि अगर आप परीक्षा देने जा रहे हों, या नौकरी ज्वाइन करने जा रहे हों तो अपने घर से एक हफ्ता पहले पैदल या बैलगाड़ी से निकल लीजिए, रेल से मत जाइये.

संगीता के दो साल अब कोई नहीं लौटा सकता मगर आज की शाम संगीता की बर्बादी से किसी को सहानुभूति नहीं, सब यही पता कर रहे होंगे प्रणब मुखर्जी संघ मुख्यालय जा रहे हैं तो देश की राजनीति में क्या भूचाल आ रहा है. जनता की ज़िंदगी में जो भूचाल आता है उसके बारे में देश की राजनीति कितनी परवाह करती है आप समझ गए होंगे. आइये लेट से चल रही कुछ गाड़ियों की चाल पर ग़ौर करते हैं. हमने जब चेक किया था तब के हिसाब से हम बता रहे हैं.

15212 जननायक एक्सप्रेस 27 मई को 13 घंटे 55 मिनट की देरी से खुली और रास्ते में 21 घंटे 52 मिनट लेट हो गई. 15910 अवध आसाम एक्सप्रेस 26 मई को चली थी, बारपेटा रोड स्टेशन पहुंचते पहुंचते 17 घंटे 4 मिनट लेट हो चुकी थी. 22405 भागलपुर आनंद विहार ग़रीब रथ 26 मई की ट्रेन आनंदविहार पहुंची है 28 मई को, 26 घंटे 8 मिनट लेट. 04403 बरौनी आनंद विहार एसी एक्सप्रेस स्पेशल. 26 मई की ट्रेन 28 मई को आनंद विहार पहुंची 19 घंटे 5 मिनट लेट. 19602 नई जलपाईगुड़ी उदयपुर एक्सप्रेस, 28 मई की ट्रेन रास्ते में ही 16 घंटे 26 मिनट लेट हो चुकी थी. 12334 इलाहाबाद से हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस 26 की ट्रेन हावड़ा पहुंची 17 घंटे 48 मिनट.

विभूति एक्सप्रेस के यात्री ने ट्वीट किया है कि इस ट्रेन ने 19 किमी की दूरी 3 घंटे में तय की. 12331 हिमगिरी एक्सप्रेस के एक यात्री ने ट्वीट किया है कि 3 महीने में इसके लेट होने के कारण 4 बार फ्लाइट छूट गई है.

सोमवार की रात गया स्टेशन के पास सियालदह से नई दिल्ली जा रही सियालदह राजधानी पर पथराव हो गया, जिसके कारण ट्रेन के 1 दर्जन से अधिक बोगियों की खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं. अब तुरंत तो कुछ किया नहीं जा सकता था इसलिए जब सवा दो बजे सियालदह राजधानी मुगलसराय पहुंची तो कर्मचारियों ने खिड़कियों पर कार्टून जिसका सही उच्चारण काटन है और प्लास्टिक चिपकाकर कामचलाऊ इंतज़ाम कर दिया ताकि यात्री मंज़िल तक पहुंच जाएं. मगर घायल यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी. हमारे सहयोगी अजय सिंह ने बताया है कि मुगलसराय एक डिविज़न है, रेलवे के कई बड़े अधिकारी यहां रहते हैं, इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी कोई इनका हाल जानने नहीं पहुंचा. यात्रियों ने बताया कि कई घंटों से कोई ट्रेन खड़ी थी जिसे रोक कर राजधानी को पास कराया जा रहा था. यात्री इस बात को लेकर उग्र हो गए और राजधानी पर पथराव शुरू कर दिया. राजधानी पर पथराव हो सकता है, उसमें सफर कर रहे यात्रियों ने सोचा भी नहीं था. जैसे तैसे सबने अपनी जान बचाई.

लोगों को एक बात समझनी चाहिए. देरी से चलने को लेकर समस्या है तो इसकी मांग कीजिए, न कि गुस्सा रेल के कोच पर निकालिए. अपने गुस्से को समझिए. खुद में झांकिए कि कई साल से आपने यह बर्दाश्त कैसे किया हुआ है कि बीस बीस घंटे लेट ट्रेन से चल रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पत्थर उठाकर कोच पर दे मारा. शर्मनाक है.

आज सुबह सुबह उत्तर प्रदेश के 1000 इंजीनियरों की तरफ से मेसेज आया कि पिछले साल उनकी नौकरी चली गई है. ये लोग 8 साल से ज़िला, ब्लाक, तहसील स्तर पर इंटरनेट की उपलब्धता और वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा को सुनिश्चित कर रहे थे. इस परियोजना का नाम था स्वान. सभी राज्यों में ऐसी परियोजना थी. इनका कहना है कि यूपी सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया है और इनकी छुट्टी कर दी है. इनका ये भी आरोप है कि सरकार इन्हें वेतन के रूप में 38,000 देती थी मगर जिस कंपनी को देती थी उससे उन्हें 15000 रुपये ही मिलते थे. अगर ऐसी लूट हुई है तो इसकी जांच दो मिनट में की जा सकती है. बहुत से लोग ऐसी शिकायत करते हैं कि वे साइन बीस हज़ार की सैलरी पर करते हैं मगर हाथ में 12,000 मिलता है. इस तरह की लूट भारत में ही संभव है. जितने भी ऐसे लोग लूटे जा रहे हैं उन सबको मिलकर लड़ना चाहिए. अपनी लड़ाई खुद भी लड़नी पड़ती है.

आयकर विभाग, एक्साइज़ विभाग में 3287 छात्रों को अभी तक नियुक्ति पत्र नही मिला है. दस महीने से ये इंतज़ार कर रहे हैं. हम एक हफ्ते से रोज़ प्राइम टाइम में बोल रहे हैं मगर अभी तक मीडिया में डाइनैमिक कहे जाने वाले वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया न ही इन्हें कोई ठोस जवाब दिया कि कब से मिलेगा. सोमवार को कुछ लड़के दफ्तर भी गए थे मगर किसी ने इनसे मुलाकात नहीं की.

मैं यह सब इसलिए बता रहा हूं ताकि आपके दिए गए टैक्स के पैसे से सरकार जो विज्ञापन छपवाती है, मंत्री जो हर राज्य और ज़िले में प्रेस कांफ्रेंस करते हैं, उनमें ये सब बातें न बताई जाती हैं न पूछी जाती हैं.

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प्राइम टाइम में हमने उत्तर बिहार की अंबेडकर यूनिवर्सिटी के ज़रिए एक पोलिटिकल थ्योरी प्रतिपादित की है कि अगर राज्य चाहे तो पांच से छह लाख नौजवानों को बिना इम्तहान के दो साल तक एक ही क्लास में रख सकती है. युवाओं में राजनीतिक चेतना और ऊर्जा एक मिथक और बोगस अवधारणा है. वाकई इन छात्रों की हालत बहुत खराब है. ये दिन भर यूनिवर्सिटी दौड़ते रहते हैं. इनकी कोई नहीं सुनता है. आप करीब से देखेगे तो रो देंगे.

जय प्रकाश नारायण यूनिवर्सिटी के लाखों छात्र बिना परीक्षा के एक ही क्लास में बैठे थे. वे अपनी बर्बादी को इतना ही महत्व दे सके कि उन्होंने बहुत मेहनत कर मुझे व्हाट्सऐप मेसेज किया कि परीक्षा नहीं हो रही है. हमारे छात्र कितने मेहनती हो गए हैं. 2015-18, 2016-19, 2017-20 बैच के छात्रों का एक साल का भी इम्तहान नहीं हुआ है. इस पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी वालों को रिसर्च करना चाहिए कि कैसे बिहार राज्य के लाखों छात्र बिना इम्तहान के छात्र जीवन गुज़ार रहे हैं. सिर्फ 2013-16 बैच के तीनों साल का इम्तहान हुआ है. जयप्रकाश नारायण यूनिवर्सिटी की 24 मार्च को बैठक हुई थी. तय हुआ कि इस साल के अंत तक सभी परीक्षाएं हो जाएंगी. इसमें आप बिहार यूनिवर्सिटी को भी जोड़ लीजिए. इसलिए कहता हूं कि दुनिया के तमाम विश्वविद्यालयों से रिसर्च स्कालर को बिहार आकर अध्ययन करना चाहिए कि जून से दिसंबर यानी छह महीने में 6 साल के कोई पांच दस लाख छात्र कैसे इम्तहान देंगे. यह दुनिया में परीक्षा का सबसे बड़ा ईवेंट होने जा रहा है. अगर वाकई छह महीने में सारे इम्तहान हुए तो इसका मतलब कि कोई पढ़ाई नहीं होगी, सिर्फ और सिर्फ परीक्षा होगी.