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RSS ने सिखाया पाठ, RSS ने ही छोड़ दिया साथ, जानिए आनंद राय की कहानी - रवीश कुमार

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RSS ने सिखाया पाठ, RSS ने ही छोड़ दिया साथ, जानिए आनंद राय की कहानी - रवीश कुमार

आरएसएस कार्यकर्ता रहे आनंद राय बाद में बीजेपी सदस्य बने (फाइल फोटो)

''मैंने राष्ट्र प्रथम आर एस एस की शाखा में ही सीखा है। 2005 से लेकर 2013 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय रहा हूं। इंदौर आर एस एस के विभाग प्रचारक प्रमोद झा का करीबी रहा। संघ की कार्यशालाओं में हिस्सा लेता रहा हूं। अब आर एस एस वाले भी नहीं बुलाते हैं। आर एस एस भी अब मेरा साथ नहीं दे रहा है।''
 
प्राइम टाइम में बीजेपी के प्रवक्ता जी वी एल नरसिम्हा राव ने जैसे ही आनंद राय को कांग्रेसी और दिग्विजय सिंह का एजेंट कहा वो भीतर तक हिल गए। टीवी पर पूरा जवाब देने का मौका तो नहीं मिला लेकिन वे अब भी हैरान हैं कि जिस आर एस एस और बीजेपी में उनका अबतक जीवन गुज़रा है उससे वे ऐसे कैसे खारिज किये जा सकते हैं। आनंद राय ने अपनी बात के प्रमाण में कई चिट्ठियां और तस्वीरें भी दिखाईं।



यह तस्वीर तब की है जब इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तरुण कुंभ का आयोजन किया था। तस्वीर में आनंद का कद छोटा है। दोनों स्वयंसेवक खाकी निकर और चश्मे में हैं। चश्मा इनकी सोच को आधुनिक बना रहा है। शायद धूप की छांव में इनकी आंखें ज़्यादा देख पा रही हों। तस्वीर के ऊपर आर एस एस का दिया हुआ परिचय पत्र भी हैं। आनंद ने बताया कि व्यवस्था संभालने वालों को परिचय पत्र दिया जाता है। ये तस्वीर इंदौर में हुए संघ शिक्षा वर्ग के सम्मेलन की है।

38 साल के आनंद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डाक्टरों और चिकित्सा पर बने सेल आरोग्य भारती के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। कहा कि इंदौर के नेहरू स्टेडिम में डाक्टरों की एक साप्ताहिक शाखा लगा करती थी उसमें भी नियमित रूप से जाता रहा हूं। इंदौर शहर में कई बार संघ के पथ-संचलन में भी हिस्सा लिया है। छात्र जीवन से ही आनंद राजनीति में सक्रिय रहे हैं। मेडिकल कालेज के धुरंधर छात्र नेता माने जाते रहे हैं और मध्य प्रदेश जूनियर डाक्टर संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2006 में बीजेपी के इंदौर नगर के महामंत्री सुदर्शन गुप्ता ने उन्हें इंदौर नगर भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया था। इसकी कापी आप देख सकते हैं।


 
आनंद राय के पास बीजेपी के सांसदों, संगठन मंत्रियों के कई पत्र भी हैं। उनके पास पार्टी की अनेक कार्यशालाओं के परिचय पत्र हैं। यह रसीद उस आजीवन सहयोग निधि की है जो हज़ार या पांच सौ रुपये देकर कटाई जा सकती है। आनंद की यह रसीद 2007 की है, तब उन्हें भी पता नहीं था कि वे एक व्यापमं घोटाले के व्हीसल ब्लोओर बन जायेंगे और मध्यप्रदेश के नौजवानों के भविष्य के लिए लड़ते हुए अपनी पार्टी और विचारधारा के लिए बाग़ी हो जाएंगे।


 
आप सभी जानते हैं कि आनंद राय अपनी जान जोखिम में डाल मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में तथ्यों को उजागर कर रहे हैं। व्यापम से संबंधित बहसों में आनंद राय ही टीवी पर राज्य सरकार के दावों से लोहा लेते रहते हैं। आनंद को सरकार ने सुबह ग्यारह बजे से शाम सात बजे तक ही सुरक्षा दी है। वो भी एक गार्ड की। जिस व्यक्ति का सक्रिय और आदर्शवादी जीवन बीजेपी और आर एस एस के आंगन में गुज़रा वही उन आदर्शों को तार तार होते देख रहा है। लेकिन आर एस एस की राष्ट्र प्रथम की दी हुई सीख ही उसका सहारा है भले ही आर एस एस अपने ही साहसी स्वयंसेवक का बचाव नहीं कर पा रहा है। मध्यप्रदेश की राजनीति में आर एस एस की गहरी पकड़ है इसके बावजूद आनंद राय को डराने के लिए उनकी पत्नी का तबादला इंदौर से दूर कर दिया गया।

 आनंद राय का परिवार इंदौर से 150 किमी दूर हरदा के महेंद्रगांव का रहने वाला है। पिता एक टीचर रहे हैं जो अब रिटायर हो चुके हैं। सातवीं तक हिन्दी माध्यम में पढ़ाई करने वाले आनंद राय 1993 में प्री मेडिकल टेस्ट की तैयारी करने इंदौर आ गए। कहते हैं कि रोज़ 55 किमी साइकिल चलाकर तीन तीन कोचिंग की। मेडिकल टेस्ट में तीन बार नाकाम होने के बाद चौथी बार सफल हुए। डाक्टर बनने का सपना पूरा कर ही लिया। आनंद की पत्नी गौरी देवी भी डाक्टर हैं और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की रहने वाली हैं। दोनों का प्रेम विवाह है और एक छोटा सा बच्चा भी है।




यह तस्वीर बीजेपी के विकास शिविर की है। इसमें डाक्टर आनंद राय भगवा लिबास में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नज़दीक नज़र आ रहे हैं। हो सकता है कोई कह दे कि मुख्यमंत्री के साथ कोई भी तस्वीर खींचा सकता है लेकिन आनंद बीजेपी के सदस्य हैं, पदों पर रहे हैं और आर एस एस से जुड़े रहे हैं क्या ये भी खारिज किया जा सकता है। राजनीति में अगर आप ईमानदार हैं तो आपका इम्तहान बहुत सख़्त होने वाला है।

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आनंद का अनुभव बताता है कि ईमानदारी और कहने की हिम्मत की ज़रूरत किसी को नहीं है। बाकी सब बातें कहने की हैं। वर्ना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर कीमत पर अपने इस मूल्यवान कार्यकर्ता की रक्षा के लिए आगे आता। उसकी सुरक्षा का बंदोबस्त कराता।

आनंद को संघ की विचारधारा से बग़ावत करनी होती तो बहुत से आसान रास्ते हो सकते थे। जान जोखिम में डालकर उसी बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ से कोई लोहा क्यों लेगा। आनंद कहते हैं कि यही तो सीखा है कि राष्ट्र प्रथम होता है। तो क्या सीखाने वाला मास्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना ये पाठ याद नहीं रहा। आनंद अब कांग्रेसी हो गया।!


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