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प्राइम टाइम इंट्रो : नेताओं में मानहानि की होड़ क्यों मची?

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015 में आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया था. ये मई 2017 है और केस चल ही रहा है.

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प्राइम टाइम इंट्रो : नेताओं में मानहानि की होड़ क्यों मची?
मानहानि किसकी होती है, कैसे होती है और कितने की होती है, यह सब किस तराजू पर तौला जाता है, अब जान लेने में ही हम सब की भलाई है. वित्त मंत्री जेटली की मानहानि दस करोड़ की हुई है या बीस करोड़ की, इसका फैसला तराजू पर तौल कर होगा या हैसियत का भी कोई बैरौमीटर होता है उससे होगा. सामान्य नागरिक की मानहानि की रकम कैसे तय की जाएगी. हम सबको जानना चाहिए और अपनी प्रतिष्ठा किसी धर्मकांटे पर तौलवा कर रखनी चाहिए ताकि हम तुरत फुरत दावा कर सके कि कितने की मानहानि हुई. एक मानहानि का सेंसेक्स भी हो सकता है. जैसे हर बात में कोई काम न हो, तो मोबाइल ऐप बना दो.

जैसे गुलज़ार वानी की कितनी मानहानि हुई होगी, जिसे 16 साल आतंक के आरोप में जेल में रहना पड़ा. गुलज़ार सभी आरोपों से बरी हो गए हैं. 28 साल की उम्र रही होगी जब गुलज़ार को गिरफ्तार किया गया होगा, अब 44-45 साल के हो चुके होंगे. अदालतों को ऐसे मामलों में मानहानि और धन हानि का भी हिसाब करना चाहिए. 16 साल तक एक नौजवान के जेल में बंद होने से परिवार की आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ा, इसका हिसाब होना चाहिए. गिरफ्तारी के वक्त गुलज़ार अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे थे, इस लिहाज़ से संभावना थी कि एक शिक्षक बनते. कभी अदालतों को ऐसा फैसला भी सुना देना चाहिए कि गुलज़ार जैसे युवकों को आतंक के फ़र्ज़ी आरोपों में फंसाया गया, इनका जीवन बर्बाद हुआ इसलिए 16 साल तक एक असिस्टेंट या एसोसिएट प्रोफेसर की जो सैलरी होती है उसके बराबर की रकम हर्जाने के तौर पर दी जाए. गुलज़ार ही नहीं, न जाने कितने रमेश, सुरेश, विमला, सरला होंगी जो इस तरह अदालतों में जेल में सड़ जाती होंगी.

मानहानि का केस करना और लंबे समय तक मुकदमा लड़ना सबके बस की बात नहीं है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015 में आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया था. ये मई 2017 है और केस चल ही रहा है. अभी पहला वाला सुलटा नहीं कि वित्त मंत्री जेटली ने एक और दस करोड़ की मानहानि का केस कर दिया है.

जेटली ने जब यह मानहानि का मुकदमा किया था तब अकेले नहीं गए थे, उनके साथ कई मंत्री पटियाला कोर्ट गए थे, एक तरह से मानहानि के मुकदमे की यह सबसे शक्तिशाली तस्वीर थी जिसमें आपको अलग अलग फ्रेम में वेकैंया नायडू, रविशंकर प्रसाद, जे पी नड्डा, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण, राज्यवर्धन राठौर, सांसद विजय गोयल, महेश गिरी, अमन सिन्हा, वी के मल्होत्रा, विजेंद्र गुप्ता उस समय के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय जैसे कई नेता दिखेंगे जो मुकदमा दायर करने अदालत गए थे. उस रोज़ वित्त मंत्री ने आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के ख़िलाफ मानहानि का मुकदमा किया था. वैसे वित्त मंत्री के ख़िलाफ़ सबसे पहले तो उनकी ही पार्टी के सांसद कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाए थे मगर उनका नाम मानहानि के इस मुकदमे में नहीं था. कीर्ति आज़ाद ने तो ट्वीट भी किया था कि उनका नाम क्यों हटा दिया गया. वैसे कीर्ति आज़ाद के ख़िलाफ़ गौतम दत्ता ने मानहानि का केस किया हुआ है.

बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने भी अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया था. इस मामले में केजरीवाल को दो दिन के लिए जेल भी भेज दिया था. इंटरनेट के आर्काइव में केजरीवाल के ख़िलाफ मानहानि के दस मुकदमों का ज़िक्र मिलता है. आम आदमी पार्टी ने भी एक न्यूज़ चैनल और वेबसाइट के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया है. सितंबर 2016 में संजय सिंह और दुर्गेश पाठक ने अपने विधायक देवेंद्र सहरावत के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया, इस साल इसी महीने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने अपनी ही पार्टी के निलंबित विधायक के ख़िलाफ़ मानहानि किया है. हमने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मानहानि के कुछ मुकदमों की सूची बनाई है.

- 2017 में छगन भुजबल ने अंजलि दमानिया के ख़िलाफ़ मानहानि का केस कर दिया है
- 2015 में सुशील मोदी की पत्नी ने तब के स्वास्थ्य मंत्री के ख़िलाफ़ मानहानि का केस कर दिया
- 2017 में तेजप्रताप यादव ने सुशील मोदी पर मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी थी
- 2017 में शिवसेना सांसद गायकवाड़ ने भी एयर इंडिया के ख़िलाफ मानहानि की धमकी दी थी
- 2015 में बिहार के डुमरांव एस्टेट के सदस्यों ने चेतन भगत पर केस किया
- 2015 में राहुल गांधी के खिलाफ भी मानहानि का केस हो गया, उन्होंने कहा था कि संघ ने गांधी की हत्या की थी
- राहुल गांधी के ख़िलाफ़ असम के बारपेटा कोर्ट में भी मानहानि का केस चल रहा है
- 2017 में ही मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया
- 2014 में कांग्रेस में रहते हुए अवतार सिंह भडाना ने अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया था. एक करोड़ का.

कर्नाटक के कांग्रेसी मंत्री रौशन बेग ने भी बीजेपी के नेता के ख़िलाफ़ मानहानि का केस किया है. केरल के मुख्यमंत्री ने भी सोलर स्कैम की मुख्य आरोपी और चार पत्रकारों के खिलाफ मानहानि का केस किया है. स्मृति ईरानी ने संजय निरुपम के खिलाफ मानहानि का केस किया हुआ है, अजित जोगी ने बीजेपी नेता नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ मानहानि का केस किया था. राजस्थान की मुख्यमंत्री के बेटे ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के खिलाफ मानहानि का केस किया हुआ है. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ मानहानि का केस किया हुआ है. जयललिता जब मुख्यमंत्री थीं तब उन्होंने पत्रकार, नौकरशाह और राजनीतिक विरोधियों के ख़िलाफ़ 200 से अधिक मानहानि के मुकदमे किये थे. हमने ये जानकारी मीडिया में छपी रिपोर्ट से ली है, इसलिए हम नहीं बता सकते कि किस केस की अंतिम या मौजूदा स्थिति क्या है. अब तो सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप के ज़रिये नाना प्रकार के विरोधियों के ख़िलाफ़ अफवाहों का अभियान किया जाता है, उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जाता है. तो बदनाम करना, मानहानि करना एक राजनीतिक रणनीति भी है. इस काम को ट्रोल अंजाम देते हैं और अब कई खुलासों से यह बात सामने आने लगी है कि ट्रोल को पैसे भी मिलते हैं.

ऑल्टन्यूज़ डाट इन पर ऐसे कई खुलासे मिलेंगे. किस तरह से राजनीतिक निष्ठा और संगठन के आर्थिक समर्थन के दम पर कई वेबसाइट बनाए गए हैं जो ख़बरों के साथ-साथ किसी को बदनाम करने का आइटम भी परोसते रहते हैं. व्हाट्सऐप की दुनिया तो इसके लिए बदनाम ही है. आपको भी नहीं पता होगा मगर राजनीतिक दलों के लोग व्हाट्सऐप के ज़रिये तरह तरह की बातें फैला देते हैं. इसलिए मानहानि का केस करना अगर एक तरीका है तो मानहानि करने के लिए कई तरीके हैं. मुख्यधारा की मीडिया में भी यह काम हो रहा है.

मानहानि का मुकदमा फौजदारी और दीवानी दो प्रकार का होता है. मई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्रिमिनल डिफेमेशन लॉ संवैधानिक है. तब राहुल गांधी, सुब्रमण्यम स्वामी और अरविंद केजरीवाल ने याचिका दायर कर इसकी संवैधानिकता को चुनौती दी थी. हम यह समझना चाहते हैं कि मानहानि का केस फालतू का मुकदमा है या ऐसे कानून न हों तो कोई भी किसी के ख़िलाफ़ कुछ भी आरोप लगा सकता है. यह प्रवृत्ति कैसे रुकेगी, क्या मानहानि के केस या कानून से रुक जाएगी. क्या मानहानि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश है, आप किसी को इसके ज़रिये डराते हैं, दो तरह की मानहानि क्यों होती है, मानहानि है क्या इसके लिए किन चीज़ों की ज़रूरत होती है, वगैरह वगैरह.


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