NDTV Khabar

भारतीय रेल लेटलतीफ़ी की शिकार क्यों?

एक यात्री ने बताया कि जब तंग आकर आप टिकट कैंसिल कराते हैं क्योंकि आप तय समय पर नहीं पहुंच पाते तो कई बार जाने का लाभ नहीं होता, ऐसे में टिकट कैंसिल कराने पर नुकसान भी यात्री को उठाना पड़ता है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
भारतीय रेल लेटलतीफ़ी की शिकार क्यों?

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

बिहार के जयनगर से चलकर नई दिल्ली आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस पिछले कई दिनों से राइट टाइम चलने लगी है. देरी भी होती है तो 2 मिनट या 15 मिनट की देरी हो रही है. इसके पहुंचने में जो देरी हो रही थी उसमें काफी कमी आई है मगर अभी भी यह ट्रेन 2 से 3 घंटे देर हो जा रही है. जो ट्रेन पिछले कई महीनों में समय से नहीं चली, जब भी चली 20 से 30 घंटे की देरी से चली उसके बारे में प्राइम टाइम पर दो बार दिखाने से यह छोटा सा बदलाव आया है. रविवार को जो दिल्ली से चली थी वो ट्रेन 15 मिनट पहले इलाहाबाद पहुंच गई. यात्री और दर्शक इस ट्रेन का ट्रैक रख रहे हैं कि क्या वाकई रेलवे स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस को रोज़ समय से चलवा रही है. ये होता है दर्शकों की जागरूकता का कमाल और असर. आप यकीन नहीं करेंगे लेट चलने में कुछ ट्रेनों का रिकॉर्ड भयानक है. क्या कोई ट्रेन 44 घंटे देर चल सकती है? रविवार यानी 6 मई को यूपी के गोंडा स्टेशन पर एक यात्री इंतज़ार कर रहे थे. पता चला कि ट्रेन 44 घंटे है.

यात्रा की तारीख तो 5 मई थी मगर कई बार स्टेशन गए, फोन किया और अंत में पता चला कि ट्रेन कैंसिल हो गई. ये रेलवे की वेबसाइट का स्क्रीन शाट है जिसमें साफ साफ लिखा है कि गोरखपुर देहरादून 44 घंटे लेट है. फिर कैंसिल हो गई है.

क्या आप ऐसी ट्रेन का इंतज़ार करना चाहेंगे तो 44 घंटे लेट चलती हो. यही एक ट्रेन नहीं है. रेल यात्रियों से बात कीजिए. 7 घंटे से लेकर 44 घंटे की देरी से चलने वाली ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से बात कीजिए, उनकी पीड़ा आपसे सुनी नहीं जाएगी. एक यात्री ने बताया कि जब तंग आकर आप टिकट कैंसिल कराते हैं क्योंकि आप तय समय पर नहीं पहुंच पाते तो कई बार जाने का लाभ नहीं होता, ऐसे में टिकट कैंसिल कराने पर नुकसान भी यात्री को उठाना पड़ता है. जिस तरह से प्राइम टाइम के बाद स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस समय पर चलने लगी है क्या दूसरी ट्रेनों को भी समय से चलने का गौरव हासिल होगा. बिहार के अररिया ज़िले के जोगबनी से एक ट्रेन आती है दिल्ली के आनंद विहार, नाम है सीमांचल सुपरफास्ट. सीमांचल के यात्रियों से उनकी यात्रा का अनुभव पूछिए. शिवांक ने इस काम में थोड़ी मदद कर दी. ईट्रेन डाट इंफो नाम की एक वेबसाइट में सीमांचल सुपरफास्ट ट्रेन का नंबर 12488 डाल देखा तो पता चला कि यह ट्रेन 36-36 घंटे की देरी से चली है. यह ट्रेन पूरे साल इसी तरह लेट चलती रही है जबकि सुपरफास्ट है. पिछले एक साल में 323 दिन सीमांचल लेट चली है, 41 दिन कैंसिल हुई है. इसके लेट होने का औसत 10 घंटे है. अधिकतम 36 घंटे लेट है. 5 मई को जोगबनी से चली सीमांचल एक्सप्रेस 32 घंटे 36 मिनट की देरी से चल रही है. 5 से 7 मई हो गया मगर जब हमने चेक किया था तब यह ट्रेन अलीगढ़ ही पहुंची थी. 6 मई को जोगबनी से चलने वाली सीमांचल 12487 27 घंटे 20 मिनट की देरी से खुलेगी. 7 मई को जोगबनी से चलने वाली सीमांचल 8 मई को रवाना होगी, 16 घंटे लेट.

अगर सुपरफास्ट का यह हाल है कि वह 36 घंटे लेट चले तो सोचिए यात्रियों का धीरज कितना गहरा होगा. वो ट्रेन में बैठकर कितनी साधना करते होंगे, उनके भीतर कितना संतोष और संतुलन होगा, कुछ नहीं होने को लेकर. क्या रेल मंत्री पीयूष गोयल सारा काम छोड़ कर सीमांचल एक्सप्रेस को समय से चलाने का चैलेंज स्वीकार कर सकते हैं. अररिया से दिल्ली के बीच न जाने कितने सांसद होते होंगे, किसी न किसी ने रेलमंत्री को पत्र भी लिखा होगा. न लिखा होगा तो जनता ने उनसे शिकायत की ही होगी, पर यह ट्रेन एक साल से इस तरह लेट क्यों चल रही है. मेरा यकीन है कि अगर आप सही सवाल करेंगे तो रेल मंत्री सारा काम छोड़कर वाकई सीमांचल एक्सप्रेस को समय से चलवा देंगे. इसके बाद हम उनसे गुज़ारिश करेंगे कि वे पटना कोटा एक्सप्रेस को भी समय से चलवा दें. हमारे सहयोगी मनीष और हबीब ने पटना स्टेशन पर जाकर इस ट्रेन और यात्रियों का हाल लिया.

पटना रेलवे स्टेशन पर कोटा जाने वाले यात्रियों की तकलीफ का हाल कोई लेने वाला नहीं है. पटना स्टेशन पर कोटा जाने वाले यात्रियों का रोज़ का हाल यही है. यह ट्रेन जब पटना से ही शुरू होकर चलती है तो फिर 21 घंटे की देरी से कैसे खुल सकती है. प्लेटफार्म पर यात्री वहीं धूप और लू में चादर बिछाकर सोने के लिए मजबूर हो जाते हैं. ये यात्री रोज़ अपने धीरज की परीक्षा लेते हैं कि आज वे कितने घंटे तक पटना कोटा का इंतज़ार कर सकते हैं. इस ट्रेन से कोटा जाने के लिए बिहार भर से यात्री पटना पहुंच कर इंतज़ार करते रहते हैं. किसी की क्लास छूट जाती है तो किसी की परीक्षा छूट जाती है. मां बाप और छात्र सब छटपटाते रहते हैं कि कोई इनकी ट्रेन राइट टाइम चला दे. प्राइम टाइम में हम कोशिश करेंगे कि रेल मंत्री सारा काम छोड़ कर कल से ही पटना कोटा एक्सप्रेस राइट टाइम पर चलवा दें. उन्हें दो ट्रेनों का जल्दी ही उद्धार करना है. एक पटना कोटा एक्सप्रेस का और दूसरा 36 घंटे लेट चलने वाली सीमांचल सुपरफास्ट का. आइये अब हम आपको पटना कोटा एक्सप्रेस का कुछ रिकार्ड बताते हैं. 1 मई को चलने वाली पटना कोटा एक्सप्रेस पटना से 21 घंटे लेट चली और कोटा 31 घंटे की देरी से पहुंची. 2 मई को पौने 17 घंटे देर से खुली और 19 घंटे 50 मिनट की देरी से कोटा पहुंची. 3 मई को 9 घंटा 55 मिनट देर से खुली और कोटा पहुंची 17 घंटा 20 मिनट की देरी से. 4 मई को पटना से 25 घंटे की देरी से खुली और कोटा पहुंची 28 घंटे लेट. 5 मई को पटना से 19 घंटे 40 मिनट देरी से खुली और खबर लिखने तक यह ट्रेन सफर में थी.

क्या रेलवे में कोई ऐसा है जो पटना-कोटा एक्सप्रेस और सीमांचल को समय पर चलवा दे ताकि छात्रों को परेशानी न हो. इसका मतलब यह नहीं कि हमें दिखाने के लिए दो ट्रेनें सही से चलें और बाकी ट्रेनें और लेट हो जाएं. हम लेट होने वाली ट्रेनों पर सीरीज़ करते रहेंगे. अब आप पटना-कोटा एक्सप्रेस से सफर करने वाले यात्रियों की व्यथा सुनिए. क्या पता रेल मंत्री तुरंत सारा काम छोड़कर इस ट्रेन को कल ही समय पर चलवा दें. ई ट्रेन डाट इंफो के मुताबिक कोटा एक्सप्रेस 43 घंटे तक लेट हुई है. औसतन यह 14 घंटे लेट होती है. पिछले एक साल में सिर्फ 2 बार यह ट्रेन टाइम पर चली है.

रविवार को अमृतसर जाने वाले एक यात्री ने बताया कि इंटरसिटी बंद होने से सचखंड एक्सप्रेस पर काफी दबाव बढ़ गया है. जनरल बोगी में यात्री किसी तरह लदा फदा के जा रहे हैं. कोई नीचे सो रहा है तो कोई चादर बांध कर हवा में लटका है. जनरल बोगी से उन्होंने मोबाइल से शूट कर भेजा था आप देखिए क्या हाल है. इस वीडियो में एक आदमी दिखेगा जिसने हवा में चादर बांध दी है और उसी में बैठा सफर कर रहा है.

कई लोग पूछते हैं कि पहले भी तो ऐसा था. तो पहले भी रिपोर्टिंग होती थी. हमारे ही सहयोगी परिमल और रवीश रंजन ने कई दफा त्योहारों के समय रेलगाड़ी के भीतर के हाल की रिपोर्टिग की है. सवाल आज का होना चाहिए. आज क्यों ये सारी ट्रेनें इस हालत में हैं. क्यों 36 घंटे देरी से चल रही हैं. क्या आम लोगों के वक्त की कोई कीमत नहीं है. आप रेल यात्रा के अपने अनुभवों को वीडियो रिकॉर्ड कर हमें भेजिए. हम आपका फीडबैक प्राइम टाइम के ज़रिए रेल मंत्रालय को देंगे. अगर कोई उनका अधिकारी देख रहा होगा तो क्या पता ट्रेन सही समय पर चलने लगे. अगर आप सही सवाल पूछेंगे तो ट्रेन समय पर चल कर रहेगी.

चंपारण हमसफर एक्सप्रेस बिल्कुल नई ट्रेन है. पिछले महीने ही लांच हुई है चंपारण सत्याग्रह के मौके पर. नाम चंपारण एक्सप्रेस है मगर शुरू होती है, हफ्ते में दो बार बिहार के कटिहार से और दिल्ली तक सफर तय करती है. एक महीने भी नहीं चली है लेकिन अब यह ट्रेन भी पुरानी ट्रेन की तरह लेट होने लगी है. एक महीने के भीतर यह ट्रेन 10 से 11 घंटे लेट चलने लगी है. कटिहार से नई दिल्ली का मूल किराया 1456 रुपये है. जब हमने 7 मई की शाम चेक किया तो डाइनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के कारण 14 मई का किराया 2155 रुपए दिखा रहा था. 4 मई को यह ट्रेन दिल्ली से कटिहार के लिए निकली, कटिहार पहुंचते पहुंचते 30 घंटे देर हो गई. नई ट्रेन के भीतर का हाल देखिए. लगता है कि कोई पुरानी ट्रेन है.

चंपारण सत्याग्रह का सौ साल होना कितनी बड़ी घटना है. इस मौके पर चलाई गई ट्रेन अगर महीने भर के भीतर रेंगने लगे तो आप खुद से पूछिए कि क्या हम इस तरह से बापू के संघर्षों को याद कर रहे हैं. जब समय पर नहीं चला सकते तो इस ट्रेन को चलाने की ज़रूरत ही क्या थी. ऐसा नहीं है कि सिर्फ बिहार से दिल्ली आने वाली ट्रेन लेट चल रही है. हमने अभी आपको गोरखपुर देहरादून एक्सप्रेस का हाल बताया जो 6 मई के दिन 44 घंटे लेट हो जाने के कारण कैंसिल कर दी गई.

12558 जम्मू-गोरखपुर एक्सप्रेस 5 मई को रात 10 बज कर 45 मिनट पर जम्मू से रवाना होने वाली थी. लेकिन यह ट्रेन 24 घंटे की देरी से 6 मई को रात 10 बज कर 50 मिनट पर रवाना हुई. नई दिल्ली-जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस 6 मई को दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर रवाना होने वाली थी लेकिन यह ट्रेन खुलती है 7 मई को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर, 20 घंटे की देरी से.

अब एक ट्रेन का हाल बताता हूं. लखनऊ-छत्रपति शिवाजी टर्मिनस वीकली सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 02112 का हाल देखिए. इस ट्रेन को 2 मई को दोपहर तीन बजे खुलना था लेकिन खुलती है 3 मई को. 24 घंटे 25 मिनट की देरी से लखनऊ से मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के लिए रवाना होती है. यह ट्रेन छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पहुंच ही नहीं पाई, इसकी यात्रा कल्याण में ही समाप्त कर दी गई. कल्याण पहुंचते पहुंचते 27 घंटे लेट हो चुकी थी. हमने रेल मंत्री के ट्विटर हैंडल पर जाकर देखा कि लेट चलने से परेशान यात्री रेल मंत्री को क्या लिख रहे हैं. हमने जाकर देखा तो 7 मई की शाम 7 बजे से 8 बजे के बीच 65 के करीब लोगों ने ट्विट किए जिसमें देरी की शिकायत है.

Devendra Khare( @Devendr34836561) ने ट्विट किया है कि सर हम जम्मूतवी गोरखपुर से यात्रा कर रहे हैं. 25 घंटे लेट है. हमें मजबूरी में जम्मू 24 घंटे रुकना पड़ा. मुझे काम पर लौटने में देरी हो रही है.

@arunjaiswal1107 ने ट्विट किया है कि Dear @RailMinIndia नींद से जागिए. ट्रेन नंबर 05228 34 घंटे से भी ज़्यादा लेट हो चुकी है. इस ट्रेन के कारण ट्रेन नंबर 15228 30 घंटे से अधिक लेट हो चुकी है. पिछले कुछ महीने से यह हो रहा है. कुछ कीजिए.

टिप्पणियां
@Anshu74556499 डियर सर, मैं आपके मंत्रालय में किए जा रहे काम से खुश हूं लेकिन आपका ध्यान ट्रेन नंबर 15025 पर दिलाना चाहता हूं जो मऊ से आनंद विहार आती है. यह ट्रेन 22 घंटे 50 मिनट की देरी से चल रही है.

@Shivash05243981 सर ट्रेन नंबर 12685 चेन्नई से मंगलोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस चेन्नई से शाम 5 बजे की जगह रात 10.15 बजे खुलने वाली है. क्या आप कारण का पता लगाकर मुझे सूचित कर सकते हैं.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement