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क्या तेल के बढ़ते दाम पर लगेगी रोक?

2013 का ज़माना चला गया जब पेट्रोल का दाम 68 रुपये लीटर होने पर हंगामा होता था और रुपया 60 के पार जाने पर देश का स्वाभिमान आहत हो जाता था. भारत बंद होता था. मीडिया में रोज़ बहस चलती थी.

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क्या तेल के बढ़ते दाम पर लगेगी रोक?

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

क्या आपको पता है कि भारत का रुपया क्यों लगातार कमज़ोर हो रहा है, आजकल भारत का रुपया गिरने में हर दिन इतिहास बना रहा है. 31 अगस्त को बाज़ार बंद होने पर एक डॉलर था 70 रुपये 99 पैसे. कहां तो इसे श्री श्री रविशंकर के अनुसार 40 रुपये के आस पास होना चाहिए था मगर अब यह 70 रुपये 99 पैसे पर पहुंच गया है. इसका सबसे बुरा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है. भारत को तेल आयात करने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं. उसी तरह विदेशों में पढ़ रहे भारतीयों को भी फीस के ज़्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं. तो रुपया कमज़ोर हो रहा है, तेल का दाम बढ़ रहा और अब खबर आई है कि 2018-19 की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 8.2 फीसदी बढ़ गई है. जो पिछले साल के पहली तिमाही के 5.6 फीसदी से बहुत ज्यादा है. पिछले साल की आखिरी तिमाही में जीडीपी दर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई थी. वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव एस सी गर्ग दावा करते हैं 2018-19 में विकास दर 7.5 फीसदी रहेगी. इस विकास दर का क्या मतलब है जब नौकरियां घटने की खबरें आ रही हैं, तेल के दाम बढ़ने की खबरें आ रही हैं, रुपया गिरता ही जा रहा है.

कुछ ही महीने पहले जब तेल की बढ़ी कीमतों की रिपोर्टिंग कर रहे थे तब खोज रहे थे कि किस किस शहर में 80 रुपये से अधिक पेट्रोल मिल रहा है. कई शहरों में पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. इस बार तो कई शहरों में पेट्रोल का दाम 86 रुपये के पार चला गया है. डीज़ल का दाम ऐतिहास स्तर पर बढ़ गया है. दिल्ली में पेट्रोल 78.52 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 70.21 रुपये प्रति लीटर हो गया है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 85.93 रुपये और डीज़ल 74.54 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. वहीं कोलकाता में पेट्रोल 81.44 रुपये और डीज़ल 73.06 रुपये प्रति लीटर हो गया है. जबकि चेन्नई में पेट्रोल 81.58 रुपये और डीज़ल 74 रुपये 10 पैसे लीटर है. महीने भर में ही पेट्रोल डीज़ल की कीमतों में भारी बढ़त देखने को मिल रही है.

2013 का ज़माना चला गया जब पेट्रोल का दाम 68 रुपये लीटर होने पर हंगामा होता था और रुपया 60 के पार जाने पर देश का स्वाभिमान आहत हो जाता था. भारत बंद होता था. मीडिया में रोज़ बहस चलती थी. अब यह बहस का मुद्दा नहीं है. तब पेट्रोल के दाम बढ़ने से न जाने क्या क्या हो जाता था अब कुछ होता ही नहीं. 30 जुलाई 2018 को पेट्रोल की कीमत 76 रुपये 25 पैसे प्रति लीटर थी जो 30 अगस्त को यानी एक महीने में बढ़कर 78 रुपये 30 पैसे हो गयी. यानी 2 रुपये पांच पैसे प्रति लीटर कीमत की बढ़ोतरी हुई. अब अगर डीज़ल की बात करें तो 30 जुलाई को एक लीटर डीज़ल 67 रुपये 75 पैसे प्रति लीटर मिल रहा था जो 30 अगस्त 2018 को बढ़कर 69 रुपये 93 पैसा हो गया. हर लीटर पर अब 2 रुपये 18 पैसे ज़्यादा देने पड़ रहे हैं. डीज़ल की कीमतें काफी बढ़ी हैं. इसी साल 1 जनवरी, 2018 को डीज़ल 59.70 रुपये लीटर था. ये 30 अगस्त, 2018 को 69.93 प्रति लीटर हो गया. आठ महीने में 10.23 रुपये की बढ़ोतरी यानी 17.13%.

कोई बोलता है कि इस समस्या का एक समाधान है. जीएसटी के दायरे में पेट्रोल डीजल के दाम लाने से दाम कम हो जाएंगे. कुछ लोगों का कहना है कोई फर्क नहीं पड़ेगा मगर यह बहस तो तब भी हुई थी जब 20 से अधिक शहरों में पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर से अधिक पर मिलने लगा था. अब भी हो रही है जब 86 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. क्या वाकई हम जीएसटी के भीतर डीज़ल पेट्रोल को लाने के लिए गंभीर हैं या समस्या सामने देख मार्केट में एक नई कल्पना छोड़ देते हैं.

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महानगरों में जितना पेट्रोल डीज़ल महंगा हुआ है उससे कहीं ज्यादा छोटे शहरों में हुआ है. डीज़ल तो पेट्रोल के दाम से भी आगे है. लेकिन देश में कई ऐसे शहर हैं जहां पेट्रोल की कीमत 85 रुपये के पार है. महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल की कीमत 87.71 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीज़ल 75 रुपये लीटर है. जबकि सतारा में पेट्रोल 86.38 रुपये लीटर है और डीज़ल की कीमत 73.83 रुपये लीटर है. बिहार के अररिया में पेट्रोल 86.05 रुपये प्रति लीटर है, तो वहीं डीज़ल 76.69 रुपये प्रति लीटर है. मध्य प्रदेश में बालाघाट में पेट्रोल 85.79 रुपये लीटर है, तो वहीं डीज़ल 75.47 रुपये लीटर है. मध्य प्रदेश के ही डिंडोरी में पेट्रोल 85.26 रुपये लीटर है तो वहीं डीज़ल 74 रुपये 97 पैसे लीटर. आंध्र प्रदेश के नैल्लूर में पेट्रोल 85 रुपये 15 पैसे लीटर तो डीज़ल 77 रुपये 88 पैसे लीटर है.

जून से लेकर अगस्त के बीच अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत में बहुत ज़्यादा उछाल नहीं आया है. 70 डॉलर प्रति बैरल से 79 डॉलर प्रति बैरल ही रहा है. यह कम नहीं है. 30 अगस्त को कच्चे तेल की कीमत 77.38 डॉलर प्रति बैरल थी. इसके 80 डॉलर तक जाने की बात हो रही है. यानी आप और दाम देने के लिए तैयार रहें.


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