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विचार
  • गोवा में गहराता राजनैतिक संकट...
    मनोरंजन भारती
    गोवा में राजनैतिक संकट गहराता जा रहा है... संकट इस बार संवैधानिक बन सकता है, जैसा कि कांग्रेस कह रही है... गोवा के हालात एकदम अलग हैं... वहां BJP की सरकार है, जिसके पास 14 विधायक हैं और वह 40 सदस्यों की विधानसभा में सबसे बड़ा दल नहीं है... सबसे बड़ा दल कांग्रेस है, जिसके पास 16 विधायक हैं... मगर गोवा में सरकार BJP की है, जिसे महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, यानी MGP के 3, गोवा फॉरवर्ड पार्टी, यानी GFP के 3 और 3 निर्दलीय विधायकों का सर्मथन मिला हुआ है... इन सभी पार्टियों ने साफ कह रखा है कि उन्होंने BJP को नहीं, बल्कि मनोहर पर्रिकर को समर्थन दिया है...
  • हर दो मिनट में होती है तीन बच्चों की मौत, लेकिन यह मुद्दा नहीं...
    राकेश कुमार मालवीय
    आखिर कोई क्यों यह आवाज़ नहीं उठाता है कि दुनिया में शिशु मृत्यु के सर्वाधिक आंकड़े भारत के हैं, जिसके बाद नाइजीरिया का नंबर है. यहां तक कि गरीब देश भी अपने आंकड़े सुधार रहे हैं.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रियों से कह सकते हैं कि...
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक काम करना चाहिए. अपने मंत्रियों से कह सकते हैं कि अपने अपने मंत्रालय पर बोला कीजिए, इससे लगता है कि आपके पास अपने मंत्रालय का कोई काम नहीं है. रक्षा मंत्री डोकलाम और रफाल पर बोलेंगी और आंतरिक सुरक्षा पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह बोलेंगे.
  • अगुस्ता वेस्टलैंड विवाद, एक आरोपी को लेकर भ्रम
    रवीश कुमार
    ईज़ इक्वल टू वो थ्योरी है जिसके तहत अगर ये साबित हो जाए कि अगर आपके राज में घोटाला हुआ है तो उनके राज में भी घोटाला हुआ था. अदालत से भले न साबित हो मगर इनके घोटाले के सामने उनके घोटाले के आरोपों को रख दिए जाएं तो दोनों घोटाले का असर समाप्त हो जाता है.
  • हिंदी के बीहड़ और दुर्धर्ष व्यक्तित्व का अवसान
    प्रियदर्शन
    हिंदी के विलक्षण कवि-लेखक विष्णु खरे नहीं रहे. बुधवार दोपहर बाद दिल्ली के गोविंद वल्लभ पंत अस्‍पताल में उनका निधन हो गया. करीब हफ़्ते भर पहले वे मस्तिष्काघात के शिकार हुए थे और नीम बेहोशी में अस्पताल लाए गए थे.
  • हिन्दुत्व की भागवत कथा और हिन्दुस्तान का सच
    प्रियदर्शन
    में मुस्लिम नहीं रहेंगे, तो हिन्दुत्व नहीं रहेगा, लेकिन कई वाक्यों की तरह यह एक आदर्श वाक्य भर है - या संघ परिवार के दर्शन और व्यवहार में इसकी कोई वास्तविक-लोकतांत्रिक झलक भी मिलती है...?
  • मैनहोल में होने वाली मौतों का ज़िम्मेदार कौन?
    रवीश कुमार
    सरफ़राज़, पंकज, राजा, उमेश और विशाल को आप नहीं जानते होंग. 9 सितंबर 2018 को पश्चिम दिल्ली के कैपिटल ग्रीन डीएलएफ अपार्टमेंट में इन पांचों की सीवर की सफाई करते हुए मौत हो गई. क्या आपको दिल्ली के घिटोरनी इलाके के स्वर्ण सिंह, दीपू, अनिल और बलविंदर याद हैं.
  • मानव संसाधन मंत्री जावड़ेकर प्रधानमंत्री के री-ट्वीट संसाधन मंत्री बन गए हैं
    रवीश कुमार
    @PrakashJavdekar ने 2 सितंबर को न तो ट्वीट किया और न ही री-ट्वीट किया. मैं 1 सितंबर से लेकर आज तक मानव संसाधन मंत्री के ट्वीट और री-ट्वीट का अध्ययन कर रहा था. इस अध्ययन से पता चलता है कि मानव संसाधन मंत्री प्रधानमंत्री के दोनों ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट को री-ट्विट करने में काफी तत्पर रहते हैं.
  • एक अबूझ शख्स की कई अनसुलझी दास्तानें
    डॉ विजय अग्रवाल
    वे अमेरिकी अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगभग पौने तीन साल की कार्यशैली से खुश हो सकते हैं, जो 'अमेरिकन फर्स्ट' के नारे पर विश्वास करते हुए अपने देश के लिए एक 'स्वर्णयुग' की कल्पना कर रहे हैं, लेकिन सच यह है कि अधिकांश अमेरिकी उनकी कार्यशैली से बेहद नाखुश हैं.
  • जनता के जनता होने की संभावना बची है या समाप्त हो चुकी है...
    रवीश कुमार
    जब आंखों पर धर्मांन्धता और धार्मिक गौरव की परतें चढ़ जाती हैं तब चढ़ाने वाले को पता होता है कि अब लोगों को कुछ नहीं दिखेगा. इसीलिए अमित शाह कहते हैं कि बीजेपी पचास साल राज करेगी. कहते हैं कि हम अख़लाक़ के बाद भी जीते. क्या वे किसी की हत्या के लिए किसी भीड़ का धन्यवाद ज्ञापन कर रहे हैं?
  • क्या माल्या को भागने से रोका जा सकता था?
    रवीश कुमार
    बहुत से लोग माल्या के भारत परित्याग प्रकरण को लेकर परेशान हैं. भारत की तमाम सुरक्षा प्रक्रियाओं से गुज़रते हुए विजय माल्या ने जिस तरह से भारत का परित्याग किया है वह इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि उनके पहले और उनके बाद भी कई लोगों ने भारत का परित्याग किया है.
  • क्या मायावती को घेरने की तैयारी कर रही बीजेपी?
    अखिलेश शर्मा
    बीएसपी प्रमुख मायावती को उनके गढ़ में ही घेरा जा रहा है. एक तरफ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में कांग्रेस के साथ समझौते को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है तो अब उत्तर प्रदेश में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. पिछले साल सहारनपुर में हुई हिंसा के आरोपी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून एनएसए के तहत जेल में बंद भीम सेना के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की समय से पहले रिहाई इसी की ओर इशारा कर रही है.
  • जेटली न तो इस्तीफ़ा दें और न ही अपना बचाव इन चंपू पत्रकारों से करवाएं
    रवीश कुमार
    मैं नहीं चाहता कि जेटली इस्तीफ़ा दें. मैं इसलिए ये चाहता हूं कि मुझे चांस ही नहीं मिला उनका बचाव करने के लिए. बहुत से पत्रकारों को जब जेटली का बचाव करते देखा तो उस दिन पहली बार लगा कि लाइफ में पीछे रह गया. मगर फिर लगा कि जब जेटली को भी इन पत्रकारों के बचाव की ज़रूरत पड़ जाए तब लगा कि मुझसे ज़्यादा तो जेटली जी पीछे रह गए.
  • प्रधानमंत्री जी, बैंकों के लाखों करोड़ न चुकाने वाली कंपनियां कौन हैं, मालिक कौन हैं?
    रवीश कुमार
    क्या प्रधानमंत्री उन कंपनियों के नाम ले सकते हैं जिन्होंने भारत की जनता के जमा पैसे से सस्ती दरों पर लोन लिया और उस लोन का दस लाख करोड़ बैंकों को वापस नहीं किया? क्या वित्त मंत्री उन कंपनियों के नाम ले सकते हैं? क्या अमित शाह नाम ले सकते हैं? क्या कांग्रेस से राहुल गांधी, चिदंबरम नाम ले सकते हैं? जब ये दोनों नेता लोन लेकर भागने वालों के नाम नहीं ले सकते हैं तो फिर ये बहस हो किस चीज़ की रही है?
  • हे राजन! तब तुम्हीं थे न जो राजन का मज़ाक उड़ा रहे थे, राजन को ज़िम्मेदार बता रहे थे?
    रवीश कुमार
    अप्रैल 2015 में हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा था कि रघुराम राजन ने नॉन परफॉर्मिंग असेट के कुछ हाई-प्रोफाइल फ्रॉड की सूची प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी थी. मांग की थी कि जांच हो और कुछ को जेल भेजा जाए. अखबार के अनुसार राजन ने 17,500 करोड़ के फ्रॉड के बारे में सूचना दी थी. इसमें विनसम डायमंड एंड ज्वेलरी, ज़ूम डेवलपर्स, तिवारी ग्रुप, सूर्य विनायक इंडस्ट्री, डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग, फर्स्ट लीजिंग कंपनी ऑफ इंडिया, सूर्या फार्मा. इन कंपनियों के नाम हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा था. दो साल बाद विनसम डायमंड के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया था.
  • आरोप-प्रत्यारोप के दौर में बैकफुट पर सरकार
    मनोरंजन भारती
    मौजूदा हफ्ता राजनैतिक पत्रकारों के लिए लॉटरी से कम नहीं रहा... पहले लगातार पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें सुर्खियों में रहीं. तेल की कीमत आसमान छू रही है ..जनता परेशान है, सरकार से उम्मीद बांधे है कि शायद सरकार ही कुछ रहम कर दे. मगर केन्द्र सरकार ने जरा भी राहत देने से मना कर दिया.
  • बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कौन है ज़िम्मेदार?
    रवीश कुमार
    बैंकों ने जितना लोन दिया, उस लोन का जितना हिस्सा बहुत देर तक नहीं लौटता है तो वह नॉन परफार्मिंग असेट हो जाता है. जिसे एनपीए कहते हैं. एनपीए को लेकर यूपीए बनाम एनडीए हो रहा है. लेकिन जिसने इन दोनों सरकारों में लोन लिया या नहीं चुकाया, उसका तो नाम ही कहीं नहीं आ रहा है. 2015 में जब आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने भारतीय रिज़र्व बैंक से पूछा था कि लोन नहीं देने वालों के नाम बता दीजिए तो रिजर्व बैंक ने इंकार कर दिया था. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नाम बताने के लिए कहा था. क्या यह अजीब नहीं है कि जिन लोगों ने लोन नहीं चुकाया उनका नाम राजनीतिक दल के नेता नहीं लेते हैं. न प्रधानमंत्री लेते हैं न राहुल गांधी लेते हैं न अमित शाह नाम लेते हैं. क्या यह मैच फिक्सिंग नहीं है. असली खिलाड़ी बहस से गायब है और दोनों तरफ के कोच भिड़े हुए हैं.
  • ...तो हर इंग्लैंड दौरे में कुछ ऐसा ही हाल होगा!
    मनीष शर्मा
    इंग्लैंड के खिलाफ हालिया संपन्न पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी टेस्ट की दूसरी पारी में केएल राहुल और ऋषभ पंत ने अपनी शतकीय पारियों से सीरीज की स्कोर लाइन 3-2 करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन आखिर में भारत को 4-1 से हार का कलंक वहन करने पर मजबूर होना पड़ा.
  • बीजेपी और कांग्रेस के बीच अब राष्ट्रवाद को लेकर नई जंग
    अखिलेश शर्मा
    हिंदुत्व के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस में राष्ट्रवाद को लेकर नई जंग छिड़ गई है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लगातार तथाकथित शहरी नक्सलियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं तो वहीं कांग्रेस सेना में डेढ़ लाख पदों की कटौती को लेकर बीजेपी के राष्ट्रवाद पर सवाल उठा रही है.
  • राफेल डील: क्या पीएम को खुद सौदा तय करने का अधिकार?
    रवीश कुमार
    फ्रांस की कंपनी दास्सो से खरीदे जाने वाले रफाल लड़ाकू विमान को लेकर फिर से अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण ने प्रेस कांफ्रेंस की है. तीनों की यह दूसरी प्रेस कांफ्रेंस है. पहले सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए सौदे का डिटेल नहीं दिया जा सकता है, लेकिन बाद में याद दिलाया गया कि रक्षा राज्य मंत्री तो नवंबर 2016 में ही संसद में रफाल विमान का दाम बता चुके थे. हाल ही में अरुण जेटली ने ब्लॉग लिखकर कांग्रेस को घेरा है. उसके बाद विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने भी लेख लिखा है. हम उन लेख में उठाए गए प्रश्नों और दावों के बारे में संक्षेप में बात करेंगे, लेकिन पहले सुनते हैं कि प्रशांत भूषण ने आज प्रेस कांफ्रेंस क्यों की.
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