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  • नदियों का व्यक्ति में बदलना...एक क्रांतिकारी कदम
    वांगनुई न्यूजीलैंड की तीसरी सबसे लंबी नदी का नाम है. गंगा-यमुना भारत की सबसे चर्चित दो नदियां हैं. अलग-अलग देशों में होने के बावजूद इनमें एक बहुत बड़ी समानता यह है कि ये नदियां-नदियां न होकर अब एक जीवित व्यक्ति बन गई हैं. आइए, इस रहस्य को थोड़ा समझते हैं.
  • गायकवाड़ जैसे नेताओं को एयरलाइंस की बजाय संसद में बैन करें - 10 सवाल
    केंद्र सरकार के मंत्रियों के अनुसार एयरलाइंस सामूहिक बैन नहीं लगा सकतीं, इसके बावजूद शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ की हवाई उड़ान पर देश की 6 एयरलाइनों ने रोक लगा दी है. अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफलता की वजह से देश के हर हिस्से में भीड़-तंत्र हावी हो रहा है जो कानून के शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इस पूरे प्रकरण में कई सवाल उभरकर सामने आते हैं जिन पर चर्चा करना जरूरी है.
  • सैंडविच पत्रकारिता के बाद अब पपीता पत्रकारिता का दौर चल रहा है
    देश में बहुत ख़बरें हैं लेकिन उत्तर प्रदेश एक पत्रकार के लिए 'जीना यहां मरना यहां' जैसा बन गया है. जिस खबरों का कोई महत्व नहीं, वो छाई हुई हैं. आदित्यनाथ योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बाल की खाल निकाली जा रही है. उनका बचपन का नाम क्या था, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए थे या उत्तराखंड में. नाश्ते में क्या-क्या लेते हैं, पपीता कब खाते हैं ,दलिया कब खाते हैं. ऐसा लगा रहा है जैसे पपीता पत्रकारिता का दौर चल रहा है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : मरीज़ के परिजन क्यों आपा खो रहे हैं?
    सवाल ख़ुद से पूछना चाहिए कि क्या हम हर हाल में हिंसा की संस्कृति के ख़िलाफ़ हैं. अगर हैं तो क्या सभी प्रकार की हिंसा के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं. आख़िर क्यों है कि पुलिस और अदालत के रहते हुए कई संगठन गले में का पट्टा डालकर खाने से लेकर पहनावे की तलाशी लेने लगते हैं. क्यों लोग इलाज में चूक होने पर सीधा डॉक्टरों को ही मारने लगते हैं.
  • क्‍या फिल्‍मों के चस्‍के ने बना दिया कपिल शर्मा को 'ऐसा'... ?
    कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर समेत उनकी पूरी टीम के बीच हुए इस झगड़े के पीछे क्‍या सब इतना ही फिल्‍मी है? क्‍या यह झगड़ा 'एक म्‍यान में दो तलवार' का है? जो शख्‍स अपने सफर की शुरुआत से हर 'दोस्‍त' को साथ जोड़ता आया है, वह अचानक 'फिल्‍मों का बिगड़ा हुआ नवाब' कैसे बन गया?
  • कॉमेडी छोड़ सिर्फ मंत्रिपद संभालें सिद्धू : अन्य नेता भी बंद करें कारोबार
    लाभ के पद पर विवाद होने की वजह से दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अनेक विधायकों की सदस्यता खतरे में है. सांसद और विधायकों के लिए 'काम नहीं तो वेतन नहीं' का नियम लागू होने की बात भी हो रही है, तो फिर सिद्धू के कॉमेडी शो के बहाने देशभर के नेताओं को जवाबदेह बनाने का कानून क्यों न बने...?
  • प्राइम टाइम इंट्रो : बातचीत की असफल मेज से मंदिर-मस्जिद विवाद सुलझने की उम्मीद क्यों?
    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद का मुद्दा एक बार फिर से पब्लिक में आ गया है. उन्हीं लोगों के बीच आ गया है जो 67 साल में बातचीत कर, आपस में लड़भिड़कर भी नतीजा नहीं निकाल सके. धीरे-धीरे यह मुद्दा राजनीति से निकलकर अदालत की देहरी में समा गया और आम तौर पर व्यापक शांति कायम हो गई. मीडिया ने यूपी के हर चुनाव में बीजेपी से पूछकर इसे पब्लिक में लाने के तमाम प्रयास किए कि मंदिर कब बनेगा मगर बीजेपी भी अदालत के फैसले की बात कर अपनी दूसरी रणनीतियों को अंजाम देने में जुट गई. बार-बार तमाम पक्षों ने दोहराया कि अदालत का फैसला अंतिम रूप से माना जाएगा.
  • उत्तर प्रदेश में बीजेपी की 'अविश्वसनीय' जीत के रहस्य का खुलासा...
    केंद्र में सत्ता में आते ही मंत्रिमंडल ने पहला निर्णय काले धन के लिए एक समिति गठित करने का लिया था, और देश के सबसे बड़े राज्य में सत्ता में आते ही इस मंत्रिमंडल ने अगला अत्यंत परिवर्तनवादी एवं प्रभावशाली फैसला किया है - राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का.
  • ...तो एफ-1 ट्रैक पर बलीनो RS चलाते वक्त क्यों नहीं बढ़ी मेरी हार्ट-बीट...?
    यह भी लगा कि शायद इतनी सारी तेज़-तर्रार कारें चलाने के बाद अब मिजाज़ शांत हो गया है, योगी टाइप का हो गया हूं. न हर्ष, न विषाद. तो दिल-दिमाग संतुलित हो गया है. लेकिन मुंह-हाथ धोकर वापस आ रहा था, तो लगा कि शायद घड़ी की रीडिंग ही गड़बड़ा गई होगी... :)
  • यूपी के लोगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कई उम्मीदें... 'ऐसे कैसे पूरी होंगी जनता की अपेक्षाएं'
    आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश को हमेशा से संवेदनशील राज्य माना जाता रहा है. पिछले कुछ दशकों से यहां पर बनी सरकारों पर पक्षपात रवैया अपनाने और कानून व्यवस्था को ठीक से नहीं संभाल पाने के आरोप लगते रहे हैं. पिछली सरकार के हालिया चुनाव में हार के प्रमुख कारणों में एक कारण राज्य में कानून व्यवस्था को ठीक से लागू नहीं कर पाना भी अहम था.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलना योगी के सामने बड़ी चुनौती
    यूपी में बीजेपी की जीत पर जितनी समीक्षाएं छपी हैं, उससे कम योगी के एलान के बाद नहीं छपी हैं. हर घंटे योगी की समीक्षा करता हुआ एक लेख अवतरित हो रहा है. इन लेखों में योगी के पुराने बयानों का हवाला दिया जा रहा है. स्त्री विरोधी बयान, अल्पसंख्यक विरोधी बयान. उतनी ही तेज़ी के साथ योगी को मुस्लिम हितैषी बताने वाले किस्से भी सामने आ रहे हैं. कैसे मंदिर परिसर में मुसलमानों की दुकाने हैं, कैसे मुसलमान उनके करीबी हैं.
  • अमित शाह की पसंद हैं योगी आदित्यनाथ, जानें क्यों...
    मीडिया के एक हिस्से में लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि कट्टर हिंदुत्व के चेहरे योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस ने बड़ी भूमिका निभाई. यह भी अटकलें लग रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह किसी ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे जिसे प्रशासनिक अनुभव हो और जो जातिगत पहचान से ऊपर हो. हालांकि बीजेपी के सूत्रों ने ऐसी अटकलों से इनकार किया है. उनका कहना है कि योगी आदित्यनाथ शुरुआत से ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की पसंद रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी पसंद पर मुहर लगाने के लिए तैयार किया.
  • ... तो इस वजह से पीएम मोदी, अमित शाह और RSS ने यूपी में कर दिया योगी का 'राजतिलक'
    हमेशा अपने सुरक्षा गॉर्ड से घिरे रहने वाले 44 वर्षीय योगी आदित्यनाथ देश के राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे. उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड बहुमत से जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने आदित्यनाथ को कमान देकर हिंदुत्व कार्ड को चर्मोत्कर्ष पर पहुंचाने का प्रयास किया है. इसके लिए योगी आदित्यनाथ सही मुखौटा है. योगी को यूपी की सत्ता देने का निर्णय लिए जाने के बाद, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि योगी मोदी के मंत्र 'सबका साथ - सबका विकास' के साथ कितना न्याय करेंगे, यह देखने वाली बात होगी.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : खेती से हारे, अब भाषा से हारते किसान
    संसाधन से लेकर संपादकीय पसंद जैसे तमाम कारणों से दिल्ली से चलने वाले स्थानीय किंतु राष्ट्रीय कहलाने वाले चैनलों की दुनिया में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत का आगमन तभी होता जब वहां ऐसा कुछ होता है जिसका तालुल्क भाषा से कम हो, हल्ला हंगामा या तमाशा से ज़्यादा हो. आज के मीडिया जगत में तमाशा की कोई भाषा नहीं होती है. तमाशा हो तो हिन्दी चैनलों पर फ्रांस की घटना भी भारत की ज़रूरी ख़बरों से ज़्यादा जगह घेर लेगी.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों की कर्ज़ माफ़ी आर्थिक तौर पर कितनी भारी?
    क्या आप जानते हैं कि भारत के किसानों पर कितने लाख करोड़ का कर्ज़ा है. इन किसानों में से कितने छोटे और मझोले किसान हैं और कितने खेती पर आधारित बिजनेस. कई बार हम खेती पर आधारित बिजनेस के लोन को भी किसानों के लोन में शामिल कर लेते हैं. सितंबर 2016 में राज्यसभा में कृषि राज्य मंत्री ने बताया था कि भारत के किसानों पर 30 सितंबर 2016 तक 12 लाख 60 हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ा है. इनमें से 9 लाख 57 हज़ार करोड़ का कर्ज़ा व्यावसायिक बैंकों ने किसानों को दिया है.
  • राहुल गांधी को राजनीति से संन्यास लेने के लिए क्यों नहीं धकेल रहा सोशल मीडिया ?
    चिंता और आश्चर्य की बात तो है ही. अपना समाज जो प्रदर्शन और मर्यादा के इतने कड़क पैरामीटर पर जीता है, उठता-बैठता-सोता है, वही हमारा प्रबुद्ध वर्ग आख़िर राहुल गांधी से राजनीति क्यों नहीं छुड़वा रहा?
  • प्राइम टाइम इंट्रो : ईवीएम पर किसे कितना भरोसा?
    सरकार बदलने से किसी दल के समर्थकों में हार की हताशा तो होती ही होगी, उनके भीतर एक भय भी होता है. कई बार हारने वाली पार्टी के कार्यकर्ता डर के कारणों को समझ नहीं पाते हैं. इसका कारण सिम्पल है. जब किसी समर्थक की पार्टी सत्ता में आती है तो थानों में भी आती है. झूठे मुकदमों और ज़मीन के कब्ज़ों के लिए भी आती है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : राजनीति में नैतिकता को तौलने वाला कोई तराजू नहीं
    भारतीय राजनीति में सब कुछ है बस एक तराजू नहीं है, जिस पर आप नैतिकता तौल सकें. चुनाव बाद की कोई नैतिकता नहीं होती है. राज्यपाल के बारे में संविधान की जितनी धाराएं और उनकी व्याख्याएं रट लें, व्यवहार में राज्यपाल सबसे पहले अपनी पार्टी के हित की रक्षा करते हैं. यही हम कई सालों से देख रहे हैं, यही हम कई सालों तक देखेंगे. राज्यपालों ने संविधान की भावना और आत्मा से खिलवाड़ न किया होता तो कर्नाटक, बिहार, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मामले में अदालत को राज्यपाल के फैसले पलटने नहीं पड़ते. उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को जब चुनौती दी गई तब उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा था लोग गलत फैसले ले सकते हैं चाहे वे राष्ट्रपति हों या जज. ये कोई राजा का फैसला नहीं है जिसकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती है.
  • एक मृत बेटे के पिता का समाज को संदेश
    महेश भट्ट की पहली और अद्भुत फिल्म “सारां” की शुरुआत ही इस दृश्य से होती है कि एक पिता विदेश में पढ़ रहे अपने जवान बेटे का अस्थि-कलश लेने के लिए लाइन में लगा हुआ है, और बाद में उसके लिए तंत्र से जूझता है. फिलहाल हमारे सामने ठीक इसके विपरीत यथार्थ दृश्य मौजूद है. इस दृश्य में एक पिता अपने मृत बेटे को बेटा मानने से इनकार करके उसके शव को लेने से मना कर देता है. ऊपरी तौर पर तो देखने से यही लगता है कि फिल्म का पिता एक करुणामय पिता है, तथा सच का पिता कठोर. किन्तु सच्चाई को जानने के बाद यह धारणा एकदम से पलट जाती है. आइए, इसे जानते हैं.
  • उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी की जीत बिहार के महागठबंधन के लिए नसीहत...
    इन दिनों हर कोई यही जानना चाहता है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अभूतपूर्व जीत का बिहार की राजनीति पर क्या असर होगा. निश्चित रूप से इसका प्रभाव बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में दिखेगा. यह सच बिहार की राजनीति के पुरोधा भी जानते हैं.

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