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  • अविश्वास प्रस्ताव- पक्ष-विपक्ष कमर कस तैयार
    अखिलेश शर्मा
    मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के पहले अविश्वास प्रस्ताव के लिए सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं. बीजेपी चुनावी साल में इसे एक बड़े मौके के तौर पर देख रही है. अभी लोकसभा में स्पीकर को छोड़ कर 533 सदस्य हैं और 11 सीटें खाली हैं. एनडीए के पास 312 सांसद हैं जो बहुमत के आंकड़े 267 से काफी ज्यादा है.
  • संसद के गलियारे से...
    मनोरंजन भारती
    संसद भवन का सेंट्रल हॉल एक ऐसी जगह है जहां सभी सांसद, सभी दलों के नेता साथ-साथ बैठते हैं, साथ खाते हैं और गप्पें मारते हैं. साथ ही देश के राजनैतिक हालात पर खुल कर अपनी राय रखते हैं. संसद के गलियारे में हर जगह चर्चा थी कि अगला लोकसभा चुनाव कब होगा. कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
  • रेल मंत्री ने ट्वीट किया है...
    रवीश कुमार
    रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया है कि अप्रैल-जून में हुई लेटलतीफी की तुलना में जुलाई में 10 प्रतिशत का सुधार हुआ है.
  • अविश्वास प्रस्ताव लाकर आखिर क्या हासिल करना चाहता है विपक्ष...?
    अखिलेश शर्मा
    नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और मतदान शुक्रवार को होगा. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मॉनसून सत्र के पहले ही दिन विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को मंजूर कर लिया. पिछले 15 साल में यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है, और इससे पहले 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव आया था, जो गिर गया था. 2008 में मनमोहन सिंह सरकार न्यूक्लियर डील पर विश्वास प्रस्ताव लाई थी और जीत गई थी.
  • अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष दोनों फायदे में
    मनोरंजन भारती
    लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को बहस के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया है. इसका मतलब है कि 10 दिनों के अंदर अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी और वोटिंग भी. सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि सरकार इसके लिए तैयार है. दरअसल सरकार की रणनीति ये है कि हमेशा के लिए इस हथियार को खत्म कर दिया जाए जिसकी धमकी विपक्ष दो बार से दे रहा है.
  • क्या हमारी व्यवस्था भीड़ को हिंसा के लिए उकसा रही है?
    रवीश कुमार
    काश सुप्रीम कोर्ट का दिशानिर्देश न्यूज़ चैनलों के बारे में भी होता जहां आए दिन किसी न किसी बहाने हिन्दू-मुस्लिम टापिक पर डिबेट होता रहता है. चैनलों पर ऐसी बातें लिखी जाती हैं जिनके तेवर सांप्रदायिक होते हैं. एक समुदाय को दूसरे समुदाय से भिड़ाया जाता है. भीड़ का निर्माण चैनलों के ज़रिए भी हो रहा है.
  • पीएम की महत्वाकांक्षा पूरी करने की दिशा में मायावती बढ़ा रही हैं ठोस कदम
    अखिलेश शर्मा
    2019 में विपक्ष के महागठबंधन में प्रधानमंत्री का एक और ताकतवर दावेदार सामने आया है. वह हैं बीएसपी प्रमुख मायावती. लोकसभा चुनावों की तैयारी के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं के पहले सम्मेलन में कल लखनऊ में नवनियुक्त राष्ट्रीय कॉआर्डिनेटर वीर सिंह और जय प्रकाश सिंह ने कहा कि अब बहनजी के प्रधानमंत्री बनने का समय आ गया है. इन नेताओं ने कहा कि कर्नाटक में कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनवाने के बाद मायावती ताकतवर नेता के रूप में उभरी हैं. वे अकेली दबंग नेता हैं जो मोदी के विजय रथ को रोक सकती हैं. जयप्रकाश सिंह तो एक कदम आगे चले गए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राजनीति में कभी कामयाब नहीं होंगे. उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपने पिता की तरह नहीं, बल्कि मां सोनिया गांधी की तरह दिखते हैं जो कि विदेशी हैं. इसीलिए वे कभी भी पीएम नहीं बन पाएंगे.
  • मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट : कानूनों पर अमल की बजाय सिर्फ दिशानिर्देश
    विराग गुप्ता
    सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि मॉब लिंचिंग की घटना होने पर तुरंत FIR, जल्द जांच और चार्जशीट, छह महीने में मुकदमे का ट्रायल, अपराधियों को अधिकतम सज़ा, गवाहों की सुरक्षा, लापरवाह पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, पीड़ितों को त्वरित मुआवज़े जैसे कदम राज्यों द्वारा उठाए जाएं.
  • सिर्फ संख्या से नहीं बन जाती है जनता - लेखपालों, शिक्षामित्रों समझ लीजिए...
    रवीश कुमार
    हर दिन मेरे व्हॉट्सऐप के इनबॉक्स में त्रिभुवन का मैसेज आ जाता है. एक लाश और उसके आस-पास रोती-बिलखती औरतों की तस्वीर होती है. उत्तर प्रदेश में ऐसी लाश को शिक्षामित्र कहते हैं, जिनके बीच ज़िन्दा लोगों की संख्या अब भी पौने दो लाख है. मरने वालों के कारण अलग-अलग हैं, मगर सदमा, दिल का दौरा और अवसाद के अलावा आत्महत्या भी बड़ा कारण है.
  • महिलाओं के खिलाफ अपराध घट क्यों नहीं रहे?
    रवीश कुमार
    दिल्ली के साकेत कोर्ट में एक महिला वकील के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है. आरोपी वकील ही है और घटना कोर्ट परिसर में हुई है. वकील गिरफ्तार है और उसका चेंबर सील है. मैं इसका ज़िक्र इसलिए नहीं कर रहा क्योंकि किसी रिपोर्ट में भारत को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित जगह बताया गया है. मैं इसलिए भी नहीं कर रहा कि कुछ लोग अपनी भड़ास निकालने आ जाएं कि इन सबको चौराहे पर फांसी दे देनी चाहिए. दरअसल मैं इसीलिए कह रहा हूं, क्योंकि फांसी-फांसी करके हमने हासिल कुछ नहीं किया. कई राज्यों ने फांसी की सज़ा जोड़ दी मगर हमारे समाज में औरतों के प्रति क्रूरता का अंत नहीं हुआ. अंत छोड़िए, लगता नहीं कि ऐसी घटनाएं कम हो रही हैं. आए दिन ऐसी घटना ज़रूर हो जाती हैं जो पिछली घटना से ज़्यादा क्रूर होती है.
  • नीतीश कुमार के एक महीने के अल्टीमेटम के क्या हैं मायने?
    मनीष कुमार
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की सता में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी से उम्मीद जताई है कि 15 अगस्त तक उन्हें ये बता दिया जाएगा कि आखिर उनके पास जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के लिए अगले साल लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने के लिए कितनी सीटों का ऑफ़र है. नीतीश ने सोमवार को जब से ये बात बोली है तब से इसका अर्थ और विश्लेषण सब लोग अपनी तरह से कर रहे हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि नीतीश कुमार सीटों के मुद्दे पर बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहते. उन्होंने भले ही भाजपा के कर्ता धर्ता अमित शाह को इंतजार के समय के बारे में नहीं बताया हो, लेकिन मीडिया के माध्यम से और सुशील मोदी की उपस्थिति में समय का खुलासा कर दिया है.
  • क्या हिंदू-मुसलमान की बहस में असली मुद्दे पीछे छूट गए हैं? 
    अखिलेश शर्मा
    गरीबों, किसानों, बेरोजगारों, दलितों, मजदूरों, पिछड़ों के मुद्दे जैसे कहीं पीछे छूट गए हैं और देश में सिर्फ एक ही मुद्दा बच गया है- हिंदू-मुसलमान का. देश की दो सबसे बड़ी पार्टियां हिंदू और मुसलमान के सवाल पर आपस में उलझी हुई हैं. याद नहीं आता कि राजनीतिक शब्दावली में हिंदू-मुसलमान शब्दों का इतने दुस्साही ढंग से खुलकर इस्तेमाल आखिरी बार कब किया गया था. पीएम नरेंद्र मोदी तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस से पूछ रहे हैं कि वो केवल मुसलमान पुरुषों की पार्टी है या उसे मुस्लिम महिलाओं की भी चिंता है? यही नहीं वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस पुराने बयान की भी याद दिला रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का भी है.
  • मैं ट्रोल हूं
    रवीश रंजन शुक्ला
    मेहरौली में अतिक्रमण हटाने की खबर के दौरान अचानक पीछे से अवाज आई रवीश जी क्या हाल है?  मैं घूमा तो तीन लड़के खड़े थे उन्हीं में से एक ने पुकारा था. मैंने सोचा कि एनडीटीवी के दर्शक होंगे इसलिए मुझे पहचान गए हैं, लेकिन चश्मा लगा रखे एक दरम्याने कद के लड़के ने आगे बढ़कर मेरी ओर हाथ बढ़ाते कहा आपने मुझे पहचाना? मैंने कहा नहीं. वो बोला मैं आपका ट्रोल हूं.
  • मोहम्मद कैफ: सीमित योग्यता के सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल के बेहतरीन उदाहरणों में से एक!
    मनीष शर्मा
    मोहम्मद कैफ भारत के सर्वकालिक सीमित योग्यता बल्लेबाजों में से एक रहे हैं. क्रिकेट प्रशंसकों के जहन में बमुश्किल ही कैफ की गेंदबाज के सिर के ऊपर से छक्का मारने की तस्वीरें जहन में कौंधती होंगी. और यह आसानी से समझ भी आता है क्योंकि कैफ की सारी ताकत सिंगल्स और डबल्स में निहित थी
  • रेल का धंधा डबल मगर कर्मचारी 18 लाख से घटकर 13 लाख...
    रवीश कुमार
    लोकसभा टीवी के अनुराग पुनेठा के सवाल का जवाब देते हुए भारतीय रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी कहते हैं कि रेलवे लगातार कर्मचारियों की संख्या में कमी लाती जा रही है. जब बिजनेस डबल हो चुका है तब हम पहले के 18 लाख कर्मचारियों की तुलना में 13 लाख पर आ गए. लोहानी कहते हैं कि हमें वैकेंसी भरनी हैं अन्यथा रेलवे चला नहीं पाएंगे.
  • बेहाल सड़कों की सुध लेने वाला कोई नहीं?
    रवीश कुमार
    12 जुलाई के प्राइम टाइम में जब हम सहरसा मधेपुरा नेशनल हाईवे 107 की बात कर रहे थे तब अमरीका के न्यू जरसी में दिवाकर भी प्राइम टाइम देखते हुए अपने ज़िले की सड़क को याद कर सिहर उठे. दिवाकर ने तुरंत मुझे मैसेज किया उनके होमटाउन भागलुर से कहलगांव के बीच नेशनल हाईवे 80 का हाल बहुत बुरा है.
  • प्राइम टाइम का असर, हाइवे पर बने गड्ढों को भरने का काम शुरू
    रवीश कुमार
    अब अगर नेशनल हाईवे की मरम्मत भी प्राइम टाइम देखने के बाद होने लगे तो आप सभी को अपने-अपने इलाके की सड़क की रिपोर्ट कहां भेजनी चाहिए, बताने की ज़रूरत नहीं है. हमें कई जगहों से सड़क निर्माण संघर्ष समिति के ईमेल मिले हैं. लोग अपने-अपने इलाके में नई सड़क और टूटी सड़क की मरम्मत के लिए समिति बनाकर संघर्ष कर रहे हैं.
  • शशि थरूर का बयान और राजनीति की इकहरी भाषा
    प्रियदर्शन
    शशि थरूर के वक्तव्य पर आ रही प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि हमारी राजनीतिक भाषा की समझ कितनी इकहरी, सतही और भोंथरी हो गई है. शशि थरूर ने कहा कि 2019 में बीजेपी की जीत से भारत 'हिंदू पाकिस्तान' हो जाएगा. इस वक्तव्य से असहमत होने की गुंजाइश बहुत सारी है, लेकिन पहले इस बयान का मतलब भी ठीक से समझने की ज़रूरत है.
  • क्या भारत कभी हिंदू पाकिस्तान बन सकता है?
    अखिलेश शर्मा
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के हिंदू पाकिस्तान बयान से उठा विवाद अब कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन गया है. बीजेपी की मांग है कि उनके बयान के लिए राहुल गांधी माफी मांगें जबकि कांग्रेस ने खुद को थरूर के बयान से अलग कर लिया.
  • 2019 से पहले की BJP की रणनीति...
    मनोरंजन भारती
    BJP अध्यक्ष अमित शाह बिहार में हैं और वहां सरकार बनने के बाद पहली बार नीतीश कुमार से मुलाकात की है... नाश्ते पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई है, और डिनर पर भी होगी... आखिर मतलब क्या है इन मुलाकातों का...
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