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  • प्राइम टाइम इंट्रो : अपनों को हत्यारा बनाने से पहले संभल जाइये!
    उम्मीद है आपके भीतर रेल चलने लगी होगी. रेल की आवाज़ के साथ आपकी सांसों ने आपसे कुछ कहा होगा कि जो हो रहा है वो ठीक नहीं है. भीड़ को राजनैतिक मान्यता मिलने लगी है. औपचारिकता के नाम पर दो तीन दिन बीत जाने के बाद निंदा जैसा बयान आता है. फिर उसके कुछ दिन बाद भीड़ किसी और को मार देती है.
  • राष्ट्रपति चुनाव : जाति की बातें ज़्यादा, व्यक्तित्व की चर्चा कम...
    यह बात तो सिद्ध हो गई है कि राष्ट्रपति पद भी जातिगत राजनीति के घेरे में आ गया है. ऐसा क्यों करना पड़ा, यह पहेली भी देखी जानी चाहिए. राजनीति के वक्र होते जा रहे इस काल में यह तथ्य देखा जाना चाहिए कि पिछले एक-दो साल से दलितों पर दबिश की घटनाओं से उनमें असंतोष बढ़ा है. इस असंतोष का प्रबंधन हो नहीं पा रहा था.
  • मुझे मत मारो... मैं भी इंसान हूं...
    भारी भीड़...चलती ट्रेन.. कुछ आवाज़ें और फिर पिटाई. जो पिटाई नहीं कर रहे वो तामशबीन ज़्यादा खटकने लगे हैं. क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में चलता भीड़तंत्र लोकतंत्र को चुनौती नहीं दे रहा है. जिसे जहां मन करे पकड़ो, एक अफ़वाह उड़ाओ और फिर मार डालो.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : राज्यों पर कर्ज़ माफ़ी का दबाव, केंद्र का कर्ज़ माफ़ी से इनकार
    ये भी एक फैशन हो गया है, लोन लिया तो लोन वेभर करो. ये उस बयान का हिस्सा है जो केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने मुंबई में दिया है. किसानों की कर्ज़ माफ़ी फ़ैशन हो गया है. मुंबई में यह बयान दिया है कि कहीं इससे प्रभावित होकर उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री देवेंद फडणवीस कर्ज़ माफ़ी का अपना फ़ैसला वापस न ले लें.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता में सेंध
    अगर राष्ट्रपति पद के लिए दलित उम्मीदवार पर इतनी सहमति बन सकती है, तो क्या यही सहमति किसी दलित को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बन सकती है. आज तक कोई दलित प्रधानमंत्री नहीं हुआ और आज तक किसी ने इस संभावना पर विचार क्यों नहीं किया.
  • किसान आंदोलन से पैदा हुए कुछ सवाल...
    आजकल की सरकारों का तो अपना स्वभाव है कि वे किसी मुद्दे के अपने आप मर जाने का इंतज़ार करती हैं, लेकिन किसानों का यह मुद्दा ज़्यादा खिंच रहा है. लिहाज़ा इस मसले पर कुछ नए सवाल बनते हैं.
  • अंधियारी रात में आएगा GST, लेकिन उजाला कब होगा - 10 सवाल
    सरकारी विभागों, उद्योग एवं व्यापार संगठनों की मांग के बावजूद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स, यानी जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करने का दृढ़ निश्चय व्यक्त कर दिया है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या कर्ज़ माफ़ी पर गंभीरता से अमल होगा?
    जैसे ही आंदोलन से हटते हैं किसान सबकी नज़रों से हट जाते हैं. नेताओं की ओढ़ी हुई संवेदनशीलता ग़ायब हो जाती है. उन्हें पता है कि किसानों के पास किसान के अलावा उनकी जाति के पहचान हैं, धर्म के पहचान हैं. इन सब पहचानों के पीछे किसान हांक दिये जाएंगे और फिर सारे सवाल अगले किसी बड़े संकट तक के लिए स्थगित कर दिये जाएंगे.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : रामनाथ कोविंद आम सहमति से चुने जाएंगे?
    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने दलित पृष्ठभूमि को ठीक से रेखांकित कर दिया ताकि उनका दलित होना राज्यपाल, राज्यसभा और वकालत के विशाल अनुभवों के कारण पीछे न रह जाए. सोमवार को बीजेपी संसदीय समिति की बैठक में फैसला हुआ कि बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार होंगे.
  • शिक्षा के चक्रव्यूह में फंसकर खो गई है मौलिकता...
    यूनान के दार्शनिक सुकरात ने कहा था, "मेरे इस शहर के सभी लोग मूर्ख हैं, क्योंकि वे यह जानते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं... एक केवल मैं ही ज्ञानी हूं, क्योंकि मैं यह जानता हूं कि मैं कुछ नहीं जानता..."
  • फादर्स डे पर एक पिता को उसके बेटे का लिखा लेटर, पढ़कर इमोशनल हो जाएंगे आप
    मैं अक्सर सोचता हूं कि आप मुझे छोड़कर क्यों चले गए! आप साथ क्यों नहीं हैं... मैं सोचता हूं कि आज अगर आप मेरे साथ होते, तो मुझे मेरीगलती पर डांटते, गाइड करते और वह बात बोलते जिसे सुनने के लिए मैं अब तरस जाता हूं...
  • यदि तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया तो संभावित खतरे
    वकील इस मसले पर अपनी दलीले रख चुके हैं. संविधान पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. लिहाजा जुलाई में उनके फैसले के आने तक हमको इंतजार करना होगा. तब तक यह मामला विचाराधीन ही है. ऐसे में हमको इस मसले पर सतर्कता से बातचीत करनी होगी.
  • गुजरात के कांग्रेसी नेताओं ने कहा, राहुल गांधी फिर गलती कर रहे हैं
    गुजरात में बीजेपी को चुनौती देने की आधी ईमानदार कोशिश भी कांग्रेस के लिए गेम चेंजर साबित होती. यह असंतुष्‍ट पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नया जोश पर देती जो लगातार मिल रही हार के कारण धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते जा रहे हैं और जिन्‍होंने राहुल गांधी को नेता के रूप में और गंभीरता से लेने का मौका दिया.
  • उपवास ख़त्म करने के लिए झूठे वायदों का राष्ट्रधर्म ?
    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राष्ट्रधर्म हेतु किया गया उपवास मध्य प्रदेश में शांति बहाली के बाद उन्होंने ख़त्म कर दिया. तीन दौर में सत्ता की मलाई खाने के बाद सीएम का उपवास बनता है, पर किसानों से किए गए वायदों का राष्ट्रधर्म पूरा न होने के द्रोह का मूल्यांकन कैसे होगा? सीएम के अनशन के बाद क्या अब भाजपा में मंथन होगा?  
  • दार्जीलिंग में क्यों तेज़ हुई अलग राज्य की गूंज
    दार्जीलिंग की वादियां आजकल हिंसा विरोध प्रदर्शन और अशांति से गूंज रही है. बंगाली भाषा को अनिवार्य किए जाने के नाम पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को हवा दी है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : कृषि मंत्री योग में हैं, किसान आंदोलन में
    महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों का इतना बड़ा आंदोलन हो गया लेकिन कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह अपने संसदीय क्षेत्र मोतिहारी में बाबा रामदेव के साथ योग कार्यक्रम में दिखाई दिये. ऐसे तनावपूर्ण समय में किसानों के बीच न जाने की सलाह राहुल गांधी को दी गई मगर उस पर बेहतर अमल कृषि मंत्री ने किया. पांच किसानों की मौत के बाद भी कृषि मंत्री नहीं बोले हैं. शायद उनका मन योग में रमा हुआ है. किसानों से बातचीत में भी उनकी कोई भूमिका अभी तक सामने नहीं आई है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों की समस्या का हल किसके पास?
    बुधवार को इंदौर, उज्जैन, देवास में कई जगहों पर हिंसा की घटना हुई हैं. कई जगहों पर कर्फ्यू लगा और मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई. इसलिए कई जगहों से तस्वीरें या वीडियो नहीं आ पा रहे हैं. कहीं बस जला दी गई है तो कहीं दुकानों को तोड़ा गया है.
  • अतिवादी रूपकों में खोये यथार्थवादी और गंभीर सवाल
    मंगलवार को टीवी पर दो तस्वीरें दिखाई दीं. इनमें पूछे जाते सवाल एक बार फिर कश्मीर को चर्चा के केंद्र में लाते हैं... पहली तस्वीर पत्रकारों से घिरे समाजविज्ञानी पार्थ चटर्जी की थी.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या सिर्फ़ आश्‍वासनों से भरेगा किसान का पेट?
    मध्‍यप्रदेश के गृहमंत्री का बयान है कि किसानों की मौत पुलिस और वहां तैनात सीआरपीएफ जवानों की गोली से नहीं हुई है. दोनों ने किसानों पर गोली नहीं चलाई है. किसान एक जून से दस दिनों के हड़ताल पर हैं. उनकी मांग है कि कर्ज़ माफ हो, सब्ज़ी की उचित कीमत मिले.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर क्‍या हो रहा है इस मीडिया में...
    इतना भी घबराने की ज़रूरत नहीं है. बस जानने की ज़रूरत है कि इस मीडिया में क्या हो रहा है. फिर आपको समझ आ जाएगा कि आपके साथ क्या होने जा रहा है. डराने वाले ताकतवर होते हैं, यह बात सही है. पर उसका क्या करेंगे जिसके पास ताकत नहीं होती मगर जो डरता नहीं है.
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