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विचार
  • कलयुग के कथित भगवान पर आयकर विभाग का छापा
    रवीश कुमार
    कल्कि भगवान बनकर लॉन्‍च हुए तमिलनाडू के एक बाबा के यहां 600 करोड़ की संपत्ति मिली है. लेकिन इससे बड़ी ख़बर यह है कि कल्कि भगवान देश छोड़ कर नहीं जाएंगे और आयकर विभाग का सामना करेंगे क्योंकि देश के कानून का सम्मान करते हैं. सही बात है, जिस देश के लोगों ने इतना पैसा दिया, उस देश के कानून पर विश्वास जता कर कल्कि भगवान ने देश का बड़ा सम्मान किया है. सीखना चाहिए विजय माल्या या नीरव मोदी को.
  • खूब लड़ा ऑस्ट्रेलिया का मीडिया, खूब झुका भारत का मीडिया
    रवीश कुमार
    आप जो अख़बार ख़रीदते हैं, या जो चैनल देखते हैं, क्या वह आज़ाद है? उसके आज़ाद होने का क्या मतलब है? सिर्फ छपना और बोलना आज़ादी नहीं होती. प्रेस की आज़ादी का मतलब है कि संपादक और रिपोर्टर ने किसी सूचना को हासिल करने के लिए मेहनत की हो, उन्हें छापने से पहले सब चेक किया हो और फिर बेखौफ होकर छापा और टीवी पर दिखाया हो. इस आज़ादी को ख़तरा सिर्फ डर से नहीं होता है. जब सरकारें सूचना के तमाम सोर्स पर पहरा बढ़ा देती हैं तब आपके पास सूचनाएं कम पहुंचने लगती हैं. सूचनाओं का कम पहुंचना सिर्फ प्रेस की आज़ादी पर हमला नहीं है, वो आपकी आज़ादी पर हमला है. क्या आप अपनी आज़ादी गंवाने के लिए तैयार हैं?
  • साल 1947 में बना कोलकाता का वो सिनेमा हॉल जहां उस्ताद अल्ला रक्खा और पंडित रविशंकर भी पेश कर चुके हैं कार्यक्रम
    रवीश कुमार
    यह हॉल शुरू से मल्टी परपस रहा है. फिल्म रोक कर शास्त्रीय संगीत समारोह हुए हैं. भाषण हुआ है. यहां पर उस्ताद अल्ला रक्खा, भीमसेन जोशी, पंडित रविशंकर, लता मंगेशकर का कार्यक्रम भी हुआ है.आप जो बड़ा सा प्रोजेक्टर देखेंगे उसी से पाथेर पाँचाली दिखाई गई थी. 1955 में फिल्म का प्रीमियर इसी हॉल में हुआ था. जो प्रोजेक्टर है वो आज भी चालू हालत में है.
  • दिल्ली विधानसभा चुनाव: आम आदमी पार्टी ने की दोतरफ़ा किलाबंदी
    शरद शर्मा
    पांच महीने ऐसे कि मई के महीने में लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के एकदम अगले ही दिन आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी में जुट गई थी और उसने  'दिल्ली में तो केजरीवाल' कैंपेन शुरू कर दिया था. खास बात यह है कि पार्टी चुनावों के लिए दो तरफा किलाबंदी की है. एक है पार्टी स्तर की तो दूसरी सरकार स्तर की.
  • मेक्सिको ने 311 भारतीयों को वापस भेजा, मानव तस्‍करी रैकेट को कड़ा संदेश
    रवीश कुमार
    बहुत दिनों से मेक्सिको का झगड़ा अमरीका से चल रहा था, ट्रंप साहब मेक्सिको की सीमा पर दीवार चिनवा रहे थे कि वहां से कोई माइग्रेंट नहीं आ जाए. हम समझ रहे थे कि ये दोनों मुल्क आपस में समझ रहे हैं, हमारा क्या है. मगर मेक्सिको ने तो 311 भारतीयों को जहाज़ में बिठाकर दिल्ली भेज दिया.
  • गुप्त काल पर इतिहास लिखने के लिए संदर्भ सूची, आप भी पढ़ें और इतिहासकार बनें
    रवीश कुमार
    कभी ख़ुद से पूछिएगा. छात्र जीवन में खपे नौजवानों का कितना प्रतिशत इतिहास पढ़ता होगा. इतिहास में प्राचीन इतिहास कितने पढ़ते होंगे. पूरा जीवन लगा देंगे तो भी आप प्राचीन इतिहास के सारे पहलुओं के बारे में जान नहीं सकेंगे.
  • NEET परीक्षा में धांधली की सज़ा छात्र क्यों भुगतें?
    रवीश कुमार
    अगर आप छात्र हैं और किसी परीक्षा सिस्टम से गुज़र रहे हैं तो आपको मालूम है कि यहां सिर्फ परीक्षा ही नहीं देनी होती है. दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो, और आप किसी भी नॉन रेज़िडेंट इंडियन से पूछ सकते हैं, जहां परीक्षाओं को लेकर धांधली की इतनी ख़बरें आती हैं. मैं करीब दो साल से इस तरह के विषयों पर प्राइम टाइम कर रहा हूं. हर दिन सैकड़ों मैसेज और तस्वीरों से गुज़रता हूं. घंटों इन्हें पढ़ता रहता हूं. मैं चाहता हूं कि आप ये बात ध्यान से सुनें और इस शोध पर नोबेल देने की ज़रूरत नहीं है. इसका निष्कर्ष यह है कि आप इन परीक्षा सिस्टम के ज़रिए भारत के करोड़ों नौजवानों की ज़िंदगी पांच से दस साल तक बर्बाद कर सकते हैं.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: 'सर सैय्यद डे' पर AMU के एक छात्र डॉ. शोएब अहमद से मुलाकात
    रवीश कुमार
    अलीगढ़ के छात्रों को पता भी है या नहीं कि उनके लिए कोई हसन कमाल साहब इतना सोचते हैं. उनके कारण कुछ ऐसे ही जुनूनी लोगों से मुलाक़ात हुई जो अपने छात्रों की हर संभव मदद के लिए बेताब थे. पैसे और हुनर दोनों से मदद करने के लिए. हसन कमाल वैसे तो बेहद ख़ूबसूरत भी हैं और इंसान भी बड़े अच्छे. अपने काम करने के शहर के चप्पे चप्पे से जानते हैं जैसे कोई अलीगढ़ का छात्र अपने शहर की गलियों को जानता होगा. उनकी मुस्तैदी का क़ायल हो गया. हाथ में एक घड़ी पहन रखी है. आई-फोन वाली. कदमों का हिसाब रखते हैं. शायद इसीलिए फिट भी हैं.
  • अमित शाह का मास्टरस्ट्रोक है सौरव गांगुली का BCCI चीफ बन जाना...
    स्वाति चतुर्वेदी
    चूंकि क्रिकेट समूचे देश में जुनून की तरह छाया रहता है, सो, सौरव गांगुली और उनकी टीम पर बेहद बारीक नज़र रखी जाएगी, और अगर सौरव BCCI में प्रभावी और साफ-सुथरा प्रशासन दे पाते हैं, तो उनकी साख बहुत बढ़ेगी. BCCI ने हमेशा से पारदर्शिता को रोकने की कोशिश की है, सो, गांगुली का आकलन इसी आधार पर होगा कि वह स्थिति बदल पाती है या नहीं.
  • कोर्ट में मामला भूमि विवाद का, लेकिन मीडिया के लिए आस्था
    रवीश कुमार
    भारत के इतिहास में यह सबसे लंबा, सबसे हिंसक, सबसे विवादास्पद और सबसे राजनीतिक भूमि विवाद है. इस विवाद को राजनीति के मैदान में लड़ा गया. दावों और प्रतिदावों के बीच इससे संबंधित हिंसा में न जाने कहां-कहां लोग मारे गए. हिन्दू भी मारे गए, मुस्लिम भी मारे गए. अंत में लड़ते-झगड़ते सब इस बिन्दु पर पहुंचे कि जो भी अदालत का फैसला होगा, सब मानेंगे. अदालतों का फैसला भी रेगिस्तान की गर्मी और ऊंचे पहाड़ों की थकान से गुज़रते हुए अब अंजाम पर पहुंचता दिख रहा है. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई. उस मामले में कौन-कौन शामिल थे, इस पर पता लगाने के लिए 17 साल तक लिबरहान आयोग की सुनवाई चली. यूपी के ट्रायल कोर्ट में जारी है, मगर अपराधी सजा से दूर हैं. इस सवाल को मौजूदा बहस से गायब कर दिया गया है. मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम पर जो मर्यादाएं तोड़ी गईं उन पर न प्रायश्चित है और न अदालत का फैसला.
  • आंदोलन की राह पर मध्‍यप्रदेश पुलिस के परिवार वाले, यूपी के सिपाही भी परेशान हैं
    रवीश कुमार
    अगर देश भर के सिपाही एक हो जाएं तो वे काम करने के बेहतर हालात और सैलरी हासिल कर लेंगे. यूपी के सिपाही भी परेशान हैं. दूर पोस्टिंग होती है. सैलरी कम होती है तो दो जगह ख़र्चा चलाना मुश्किल होता है. छुट्टी नहीं मिलती तो पत्नी से मिलने नहीं जा सकते. उनके जीवन में प्यार ही नहीं है. शादी के बाद हनीमून पर भी नहीं जा पाते. दहेज लेकर शादी करते हैं और उसी दहेज की अटैची में कपड़ा रखकर पत्नी से जुदा हो जाते हैं. सिपाही चौबीस घंटे काम करते हैं. उनकी हालत दयनीय है.
  • PMC खाताधारकों की मुश्किलें कब दूर होंगी?
    रवीश कुमार
    लोकतंत्र में संख्या बेमानी हो गई है. चुनाव में इस संख्या के दम पर जीत तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद इस संख्या का कोई मोल नहीं रह जाता. इसलिए जब पेड़ों के काटने के खिलाफ लोग प्रदर्शन करते हैं तो उन पर सख्त धाराएं लगा दी जाती हैं, ताकि उनकी ज़िंदगी मुकदमों में उलझकर रह जाएं और इस बात से किसी को फर्क नहीं पड़ता है. उसी शहर में जब हज़ारों लोग अपने पैसे की वापसी को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो वही शहर उनसे भी बेगाना हो जाता है. उनकी संख्या जितनी भी हो बेमानी हो जाती है. जनता जब जनता की नहीं होती है तो संख्या फिर संख्या नहीं रह जाती, ज़ीरो हो जाती है.
  • भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन को नोबेल पुरस्कार
    रवीश कुमार
    आज का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर लेकर आया है, मगर भारतीय मूल के अर्थशास्त्री के लिए बहुत ही अच्छी ख़बर लाया है. विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी का अनुमान डेढ़ प्रतिशत घटा दिया है. 7.5 प्रतिशत से घटा कर 6 प्रतिशत कर दिया है. डेढ़ प्रतिशत की कमी बहुत होती है. दूसरी तरफ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए करने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला है.
  • आसमां का रंग गुलाबी ही होता है. The Sky is Pink होता है...
    रवीश कुमार
    गुलाबी ही तो होता है आसमान. बल्कि सिर्फ गुलाबी नहीं होता. वैसे ही जैसे सिर्फ नीला नहीं होता. पीला भी होता है. सफेद भी और गहरा लाल भी. सुनहरा भी. आसमान को सिर्फ नीले रंग से नहीं समझा जा सकता है. जब तक आप इस धारणा से बाहर नहीं निकलते हैं, इस फिल्म को देखते हुए भी आप नहीं देख पाते हैं. थियेटर में होते हुए भी आप बाहर होते हैं. जहां अरबों बच्चों की तरह आपको भी आसमान को सिर्फ एक ही रंग से देखना सीखाया गया है. जैसा रंग आज अपने आस-पास देखते हैं. कोई फ़िल्म सियासत पर बात न करते हुए, सियासत को समझने का ऐसे ही ताकत देती है. वही फ़िल्म है ये. जिन्होंने ये फ़िल्म देखी है, वो बहुत दिनों तक इससे बाहर नहीं निकल पाएंगे.
  • जो काम निर्मला सीतारमण अधूरा छोड़ गई थीं उसे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूरा किया
    रवीश कुमार
    मैं देशभक्त हूं. सच्चा भी और अच्छा भी. दोनों का कांबो(युग्म) कम ही देशभक्त में मिलता है जो कि मुझमें मिलता हुआ दिखाई दे रहा है. इसलिए रविशंकर प्रसाद के हर बयान के साथ हूं. एक राष्ट्रवादी सरकार के मंत्री की योग्यता की सीमा नहीं होती. वह एक ही समय में अर्थशास्त्री भी होता है. कानूनविद भी होता है. शिक्षाविद भी होता है. राष्ट्रवाद की राजनीति आपको असीमित क्षमताओं से लैस कर देती है. यह बात रविशंकर प्रसाद का मज़ाक उड़ाने वाले कभी नहीं समझ पाएंगे.
  • अर्थव्यवस्था का ढलान जारी है फिर भी आयोजनों की भव्यता तूफानी है
    रवीश कुमार
    आपको पता होगा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर हैं. चीन का भारत आना हमेशा ही महत्वपूर्ण घटना है. इस दौरे के लिए कहा गया है कि अनौपचारिक है.कोई एजेंडा नहीं है. दोनों नेता बयान नहीं देंगे. लेकिन इसका मतलब नहीं कि दौरा महत्वपूर्ण नहीं है.अनौपचारिक बातचीत में कई उलझे हुए मसलों पर खुलकर बातचीत होती है. दोनों नेता एक दूसरे का मन टोहते हैं.
  • चीन के राष्ट्रपति का भारत दौरा, क्‍या दोनों देशों के रिश्‍ते बेहतर होंगे?
    रवीश कुमार
    चेन्नई एयरपोर्ट पर ऐसे जहाज़ों को उतारने की क्षमता थी इसलिए यह जगह उसके हिस्से आया. चेन्नई से 56 किमी दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर महाबलीपुरम है जिसे मामल्लापुरम कहा जाता था. यह नाम पल्लव राजा नरसिम्हावर्मन प्रथम के नाम पर पड़ा जिन्हें महान योद्धा कहा जाता था. पल्लव राजा के काल में एक ही चट्टान को काट कर कलाकृति बनाने का कौशल समृद्ध हुआ जिसे द्रविड़ स्थापत्य कला के रूप में जाना जाता है.
  • नई पीढ़ी के साथ बदल रही है शिवसेना
    सुनील कुमार सिंह
    शिवसेना की स्थापना 19 जून 1966 को महाराष्ट्र की अस्मिता और मराठी भाषियों के अधिकार और न्याय दिलाने के लिए हुई थी. साठ के दशक में मुम्बई में गुजराती और दक्षिण भाषियों का वर्चस्व बढ़ रहा था. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने मराठी मन की उस व्यथा को देखा उसे समझा और अपने ओजस्वी भाषणों से मराठी मन को आकर्षित कर न सिर्फ एक मजबूत संगठन खड़ा किया बल्कि मराठियों की खोई अस्मिता को फिर से स्थापित किया. आज बाल ठाकरे भले जीवित नही हैं लेकिन शिवसैनिक आज भी उनके लिए सब कुछ समर्पित करने को तैयार रहते हैं. पर अब शिवसेना बदल रही है खासकर ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले आदित्य ठाकरे की सोच अलग है.
  • दलित अल्पसंख्यक से अन्याय की बात करना गलत कैसे?
    रवीश कुमार
    क्या महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के छह छात्रों को इसलिए निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. इस पत्र में दलित और अल्पसंख्यकों के साथ हो रही मॉब लिचिंग और बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई गई है. कश्मीर का भी ज़िक्र है और असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स का भी मसला है.
  • जल जमाव के बाद बिहार की राजनीति में सुशील मोदी को लेकर इतने सवाल क्यों?
    मनीष कुमार
    पटना शहर से जल जमाव की समस्या फ़िलहाल ख़त्म हो गई है. इस जल जमाव के यूं तो कई कारण रहे लेकिन वो चाहे भाजपा समर्थक हों या विरोधी, सब मानते हैं कि अगर एक व्यक्ति जिसकी लापरवाही का सबने ख़ामियाज़ा उठाया वो हैं सुशील मोदी. और राजधानी पटना की इस नरकीय स्थिति ने सबसे ज़्यादा नुक़सान किसी की व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को पहुंचाया है तो वो हैं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी. सुशील मोदी ने पटना की हर समस्या में आम लोगों के साथ खड़े होकर अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक छवि चमकाई और साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी को लगातार पिछली पांच विधानसभा चुनावों से हर सीट पर जीत दिलाई. उसी सुशील मोदी ने इस बार के पानी में, उनके समर्थकों के अनुसार सब कुछ खोया है.
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