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विचार
  • तेजस्वी यादव और उनके माफ़ीनामा को बिहार की जनता कितनी गंभीरता से लेती है?
    तेजस्वी यादव का ये बयान उनकी सोची समझी राजनीति का हिस्सा हैं. 15 वर्ष पूर्व बिहार की सत्ता से बेदख़ल होने के बाद अपनी पार्टी की तरफ़ से इतने बेबाक़ होकर इस बात को स्वीकार करने वाले वो पहले नेता हैं.
  • क्या श्रीप्रकाश शुक्ला का दौर याद दिला रहा है गैंगस्टर विकास दुबे?
    राकेश तिवारी
    कानपुर के कुख्यात हिस्ट्री शीटर विकास दुबे और उसकी गैंग के हाथों उत्तर प्रदेश के आठ पुलिस वालों का जान गंवाना क्या यूपी में अपराध के उस दौर की वापसी का संकेत है, जब 24 साल के अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला का ख़ौफ़ राज्य के बड़े हिस्से में व्याप्त हो गया था. वो बड़े-बड़े नेताओं की हत्या की सुपारी लेता और रेलवे से लेकर तमाम सरकारी ठेकों का इकलौता मालिक बन बैठा था. 
  • रेलवे ने भर्तियां बंद कीं, उदास न हों नौजवान, पॉजिटिव रहें, व्हाट्सऐप में रहें
    रवीश कुमार
    रेलवे ने पिछली भर्ती के लोगों को ही पूरी तरह ज्वाइन नहीं कराया है और अब नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है. यही नहीं आउटसोर्सिंग के कारण नौकरियां खत्म की गईं, अब उस आउटसोर्सिंग का स्टाफ़ भी कम किया जाएगा. पहले रेलवे रोजगार पैदा करती थी, अब बेरोजगार पैदा कर रही है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : प्राइवेट स्कूल-कॉलेज और उनके शिक्षकों की समस्या
    रवीश कुमार
    प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षक परेशान हैं. उनकी सैलरी बंद हो गई. हमने तो अपनी बातों में स्कूलों को भी समझा है. हमेशा कहा है कि ऐसे वक्त में डेटा सही होना चाहिए. पता चलना चाहिए कि कितने मां बाप फीस नहीं दे पा रहे हैं. उसी अनुपात में सैलरी का वितरण हो सकता है.
  • पासवान कहते हैं 2.13 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को अनाज दिया, BJP कहती है 8 करोड़
    रवीश कुमार
    16 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सभी राज्यों ने जो मोटा-मोटी आंकड़े दिए हैं उसके आधार पर हमें लगता है कि 8 करोड़ प्रवासी मज़दूर हैं जिन्हें मुफ्त में अनाज देने की योजना का लाभ पहुंचेगा. केंद्र सरकार इसका ख़र्च उठाएगा.
  • मिडिल क्लास: तुम मांगोगे किससे, मांगने वाले हाथों को तुमने ही तो कुचला है
    रवीश कुमार
    भारत में एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को कम से कम सर्वे तो करना ही चाहिए कि कितने फ्री-लांस, पूर्णकालिक, रिटेनर, स्ट्रिंगर, अंशकालिक पत्रकारों की नौकरी गई है. सैलरी कटी है. उनकी क्या स्थिति है. इसमें टेक्निकल स्टाफ को भी शामिल किया जाना चाहिए. पत्रकारों के परिवार भी फीस और किराया नहीं दे पा रहे हैं.
  • प्रियंका गांधी को सरकारी घर खाली करने का नोटिस, क्या बदले की राजनीति?
    मनोरंजन भारती
    प्रियंका गांधी को केंद्र सरकार ने बंगला खाली करने का नोटिस दिया है. सरकार नियमों का हवाला दे रही है कि यदि आपके पास एसपीजी की सुरक्षा नहीं है तो आप एक विशेष टाईप के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस नियम के तहत प्रियंका गांधी लोधी रोड के अपने 35 नंबर के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस सबकी शुरुआत उसी वक्त हो गई थी जब मौजूदा सरकार ने सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी. तब यह दलील दी गई थी कि अब उनके ऊपर उतना खतरा नहीं है. ये सब सरकार की एक समिति ने तय किया था. उसी वक्त यह भी तय किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री को भी अब एसपीजी की सुरक्षा नहीं मिलेगी.
  • उत्तर प्रदेश में मायावती और प्रियंका गांधी वाड्रा की लड़ाई ही छाई है...
    स्वाति चतुर्वेदी
    मायावती, बहुजन समाज पार्टी की मुखिया, जो अपने गुस्से और गरजने-बरसने के लिए कुख्यात हैं, बड़े शहरों से गांवों में लौटकर आए प्रवासियों की आवाजाही और उनकी परेशानियों पर बहुत असामान्य तरीके से चुप्पी साधे रही हैं.
  • हार्ली डेविडसन पर चीफ जस्टिस की फोटू और लेंबोर्गिनी चलाने की मेरी अधूरी ख्वाहिश
    रवीश कुमार
    ट्विटर पर इस तस्वीर को देखकर गर्व से सीना 56.2 इंच का हो गया. .2 इंच की बढ़ोतरियां बेपरवाह ख़ुशी देने वाली हैं वैसे ही जैसे इतनी सी तोंद कम हो जाने पर मिलती है. भाव बता रहा है कि हम सभी के भीतर नौजवानी कुलांचे मारती रहती है. बाइक के कद्रदान ही समझ पाएंगे हार्ली डेविडसन पर बैठने की खुशी. इस खुशी को प्राप्त करने के लिए जरूरी नहीं कि बाइक अपनी हो. यह खुशी दूसरे की बाइक पर बैठकर ही महसूस की जाती है. दोस्त की नई बाइक स्टार्ट करने को मिले तो समझिए कि दोस्ती गहरी है. बस ऐसा दोस्त भी हो जिसके पास डेविडसन, जावा और बुलेट हो. बाइक विहीन मित्रता अधूरी मित्रता होती है. 
  • 'क्यों पहले से ही तय लग रहे हैं बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे?'
    मनीष कुमार
    बिहार में कोरोना का क़हर जारी है कोई नहीं जानता कि आने वाले दिनो में , हफ़्ते में या कुछ महीने में इस बीमारी का क्या स्वरूप होगा. लेकिन चुनाव की तैयारी में एनडीए सुनियोजित तरीक़े से लग गया है.  क्योंकि इस बात का भरोसा है कि चुनाव आयोग सही समय पर चुनाव कराएगा. वहीं विपक्ष में भी सरगर्मी तो दिख रही हैं लेकिन सब कुछ फीका फीका है. अगर आप बारीकी से देखेंगे तो चुनाव के नतीजे साफ़ दिख रहे है कि जो जहां हैं वो वहीं रहेगा. मतलब मुख्यमंत्री का ताज नीतीश कुमार के सर पर तो विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को और इंतज़ार करना होगा. 
  • सतर्क ही रहिए कोरोना से, 4 लाख से अधिक केस और 13000 से अधिक मारे गए
    रवीश कुमार
    आपके भीतर अब गिनती समाप्त हो चुकी है. आख़िर कोई कब तक गिनेगा. संख्या के प्रति संवेदनशीलता अब वैसी नहीं है जैसी शुरू के दिनों में थी. 100 केस आने पर रगों में सिहरन दौड़ जाती थी. अब सिहरन नहीं दौड़ती है लेकिन 100 क्या, 1000 से अभी अधिक एक दिन में 15000 से अधिक केस आने लगे हैं.  भारत में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 13, 425 हो गई है. दिल्ली में ही दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.
  • काफ़ी अंतर है पुलवामा हमले और चीन से गुत्थमगुत्थी के बाद प्रधानमंत्री की भाषा में
    रवीश कुमार
    चीन ने लद्दाख (Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर क़ब्ज़ा किया है या नहीं, क्या भारतीय सीमा क्षेत्र में क़ब्ज़ा कर लिया है, इन प्रश्नों का जवाब क्या प्रधानमंत्री (PM Narendra Modi) की पहली प्रतिक्रिया में मिलता है? पहले आप कल का बयान पढें और फिर पुलवामा हमले के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया को पढ़ें.
  • क्या समय रहते जागी है केंद्र सरकार या देर हो जाने के बाद ख़्याल आया है दिल्ली का
    रवीश कुमार
    स्कोप दूसरी एजेंसियों के लिए भी नहीं बचा जब केजरीवाल ने कह दिया कि 31 जुलाई तक 1 लाख बिस्तरों की ज़रूरत पड़ेगी. हमसे जितना हो सकेगा, हम कर रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद केंद्र के पास भी स्कोप नहीं बचा कि वो दिल्ली को केजरीवाल के भरोसे छोड़ दे. मैं नहीं कहता कि मेरी बात का असर है लेकिन लगातार देस की बात में कह रहा था कि अगर केजरीवाल का अनुमान सही है तो फिर इसमें केंद्र और उसके अस्पतालों की क्या भूमिका है?
  • कड़ी निंदा : बात निकली है तो फिर दूर तलक जाएगी
    विमल मोहन
    'तो रूलिंग पार्टी ही कोरोना लेकर आई है क्या...? हद हो गई, तुम लेफ्टिस्टों को बस एक नाम से चिढ़ है... कब तक अपनी फैन्टेसी में फंसे रहोगे, यार... तुम कभी नहीं समझोगे... मैं इस व्हॉट्सऐप ग्रुप से एग्ज़िट कर रहा हूं... तुम तो हर बात में एक कहानी ले आते हो...'
  • कर्नाटक में जारी है दिग्गजों की जंग - येदियुरप्पा बनाम शाह
    सोमवार को 77-वर्षीय मुख्यमंत्री की पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व, यानी अमित शाह ने बी.एस. येदियुरप्पा को ज़ोरदार झटका देते हुए वे तीनों नाम खारिज कर दिए, जिनकी सिफारिश 19 जून को होने वाले चुनाव के ज़रिये राज्यसभा में भेजे जाने के लिए उन्होंने की थी. इसके बजाय अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से तीन कतई अलग नाम घोषित कर दिए.
  • सिर्फ उम्मीद से पत्रकारिता नहीं चलती है
    रवीश कुमार
    पत्रकारिता बिनाका गीतमाला नहीं है. फरमाइश की चिट्ठी लिख दी और गीत बज गया. गीतमाला चलाने के लिए भी पैसे और लोगों की ज़रूरत तो होती होगी. मैं हर दिन ऐसे मैसेज देखता रहता हूं. आपसे उम्मीद है. लेकिन पत्रकारिता का सिस्टम सिर्फ उम्मीद से नहीं चलता. उसका सिस्टम बनता है पैसे से और पत्रकारिता की प्राथमिकता से. कई बार जिन संस्थानों के पास पैसे होते हैं वहां प्राथमिकता नहीं होती, लेकिन जहां प्राथमिकता होती है वहां पैसे नहीं होते. कोरोना के संकट में यह स्थिति और भयावह हो गई है.
  • पंजाब सरकार प्रवासी मजदूरों को बसों से वापस ला रही, क्या है इस राज्य की मजबूरी?
    मनोरंजन भारती
    पंजाब अब प्रवासी मजदूरों को वापस बुला रहा है. इसके लिए पंजाब सरकार ने रेल मंत्रालय को तो लिखा ही है, इस संदर्भ में पंजाब के इंडस्ट्री मंत्री ने भारत सरकार को भी पत्र लिखा है. मगर वह ट्रेनों का इंतजार नहीं कर रहे हैं. जाहिर है पिछली बार जब ये प्रवासी मजदूर अपने गांव जा रहे थे तब पंजाब का अनुभव उतना अच्छा नहीं रहा था. यही वजह है कि पंजाब सरकार ने मजदूरों को वापस लाने के लिए बसों का इंतजाम किया है. तीन बसें इन प्रवासी मजदूरों को लेकर वापस भी आ चुकी हैं.
  • जर्मनी ने बेरोज़गार होने से बचाया, अमेरिका ने बेरोज़गार होने दिया, भारत ने रामभरोसे छोड़ा
    रवीश कुमार
    महामारी एक है. जर्मनी और अमेरिका एक नहीं हैं. रोज़गार और बेरोज़गारी को लेकर दोनों की नीति अलग है. जर्मनी ने सारे नियोक्ताओं, यानी कंपनियों दफ्तरों और दुकानों के मालिकों से कहा कि उनके पे-रोल में जितने भी लोग हैं, उनसे सिर्फ एक फॉर्म भरवा लें. कोई प्रमाणपत्र नहीं.
  • जब सब कुछ रामभरोसे ही छोड़ना था, तो तालाबंदी कर अर्थव्यवस्था की रीढ़ क्यों तोड़ी...?
    रवीश कुमार
    अगर जान बचाने के लिए तालाबंदी की गई थी तो संक्रमण की हालत ऐसी क्यों है? जल्दी ही इस नाकामी के लिए आबादी का थ्योरी लांच कर दिया जाएगा. इतनी बड़ी आबादी है तो क्या करें. हर नाकामी का यह अचूक मंत्र हो गया है.
  • सनक की सीमा होती है, बोलसोनारो के सनक की कोई सीमा नहीं है
    रवीश कुमार
    राष्ट्रपति जे बोलसनारो को भारत के गणतंत्र दिवस पर मेहमान बनाकर बुलाया गया था. लेकिन इस नेता की राजनीति और वचनों में एक भी लक्षण ऐसे नहीं हैं जो एक लोकतांत्रिक देश के गणतांत्रिक उत्सव में मेहमान के तौर पर बुलाया जाता.
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