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विचार
  • कितना दम है सरकारी नौकरी के चुनावी वादे में? 
    अखिलेश शर्मा
    बिहार के विधानसभा चुनाव में इस बार नौकरियों और रोजगार का मुद्दा छाया हुआ है. आरजेडी के दस लाख सरकारी नौकरियों के वादे को खूब प्रचार मिल रहा है और बीजेपी को भी इसके जवाब में अगले पांच साल में चार लाख नौकरियों और 15 लाख रोजगार का वादा करना पड़ा है.
  • पुलवामा, फ़वाद चौधरी का बयान और हिंदुस्तान
    प्रियदर्शन
    पाकिस्तान के कैबिनेट मंत्री फ़वाद चौधरी ने अपनी संसद में कह दिया है कि पुलवामा हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ था. भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसमें सक्रिय हिस्सेदारी निभाने का आरोप पाकिस्तान पर पुराना है और गाहे-ब-गाहे उसके सबूत भी मिलते रहते हैं. मगर पहली बार संसद में किसी मंत्री का यह बयान एक अलग अहमियत रखता है.
  • प्रधानमंत्री की मगही और भाषाओं का दर्द
    प्रियदर्शन
    बिहार में पटना की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मगही बोलने की कोशिश करते नज़र आए. बिहार की तीन प्रमुख भाषाओं में मगही कुछ लटपटाई हुई सी भाषा है. उसमें न भोजपुरी वाली अक्खड़ता है और न मैथिली वाला माधुर्य, बल्कि इसकी जगह एक घरेलूपन है जिसमें प्रेम और क्रोध दोनों एक सीमा के भीतर ही प्रगट होते हैं.
  • हम साथ-साथ हैं! चिराग पर क्यों चुप हैं प्रधानमंत्री
    मनोरंजन भारती
    बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री 6 रैलियां कर चुके हैं. पहली रैली से ही जेडीयू नेताओं को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री चिराग पासवान पर कुछ बोलेंगे, मगर प्रधानमंत्री की 6 रैलियों के बाद भी जेडीयू के नेता ये जानने की कोशिश में लगे हैं कि चिराग पासवान को लेकर प्रधानमंत्री के मन में क्या है.
  • कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के सामने अपनी अहमियत साबित करने को तैयार ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया
    स्वाति चतुर्वेदी
    कमलनाथ और कांग्रेस अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश में 28 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में जोरदार मुकाबला होगा. मंगलवार को होने वाले इस महामुकाबले में अगर किन्हीं दो स्टार खिलाड़ियों की टक्कर है, तो वो सचिन पायलट बनाम ज्योतिरादित्य सिंधिया है.
  • भारत-अमेरिका साथ, चीन को संदेश
    कादम्बिनी शर्मा
    भारत और अमेरिका के बीच 2 प्लस 2 बैठक खत्म हुई. बैठक का महत्व इतना कि महामारी के वक्त और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से महज़ एक हफ्ता पहले अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्री दोनों भारत आए और आमने सामने अपने समकक्षों के साथ बैठक की - एक तथ्य जो विदेश मंत्री एस जयशंकर से प्रेस के सामने भी नोट किया.
  • यह कैसी भाषा है नीतीश कुमार जी? इसका असली मतलब क्या है?
    प्रियदर्शन
    नीतीश कुमार को हम क़सूरवार क्यों मानें? दरअसल हमारी राजनीति ही नहीं, हमारे समूचे सार्वजनिक विमर्श की भाषा बहुत सपाट और निरर्थक हो चुकी है. इस विमर्श में शब्द अपने अर्थ जैसे खो चुके हैं. वे तभी चुभते या तंग करते हैं जब वे बहुत अश्लील या फूहड़ ढंग से इस्तेमाल किए जाते हैं.या तब भी वे चुभते नहीं हैं, बस हमारे राजनीतिक इस्तेमाल के लायक हो जाते हैं. हम अपना पक्ष देखकर उनका विरोध या बचाव करते हैं.
  • Mirzapur2: कालीन भैया का कोई जोड़ नहीं... गुड्डू भैया का कोई तोड़ नहीं...मुन्ना भैया में कोई खोट नहीं, लेकिन...
    मनीष शर्मा
    ओरिजनल सीरीज (Original Web/real series) की पहली और अनिवार्य शर्त यह है वह अपनी "आत्मा" अपने "मिजाज व चरित्र" (पटकथा, फिल्मांकन, डायलॉग, अभिनय, वगैरह-वगैरह) के लिहाज से "वास्तविकता" सामने लेकर आए!! पता नहीं मिर्जापुर (#Mirzapur Part-1) भाग-1 कितने प्रतिशत वास्तविक थी और कितनी काल्पनिक, लेकिन पहला भाग वास्तविकता के दर्शन कराने में कामयाब रहा था. पहले भाग में लेखक पूरी तरह महसूस कराने में यह असल ही है!! कई सीन (फिल्मांकन) गैंग्स ऑफ वासेपुर से "प्रेरित" थे, लेकिन यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं था!! वास्तव में जो स्तर सेक्रेड गेम्स ने स्थापित किया, उसे मिर्जापुर भाग-1 और आगे लेकर गया था. लोगों को भरपूर मजा आया, भारी सफलता मिली और नए मानक स्थापित हुए.
  • तेजस्वी ने साबित किया, नहीं हैं वो 'बिहार का पप्पू'
    स्वाति चतुर्वेदी
    31 साल के तेजस्वी यादव को मध्यम वर्ग की उम्मीदों के अनुरूप चलने वाले और अधिकारप्राप्त नेता के तौर पर देखा गया था. नीतीश कुमार के साथ राजद के गठजोड़ के दौरान जब 2015 में गठबंधन सरकार बनी थी तो वह मंत्री थे.
  • क्या बिहार की हवा तेजस्वी के पक्ष में बहने लगी है?
    प्रियदर्शन
    एक बड़ी अंतर्दृष्टि से भरी किताब है- 'टॉकिंग टु माई डॉटर: अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ कैपिटलिज़्म.' इसके लेखक हैं यानिस वारौफ़किस, जो यूनान के संकट में वित्त मंत्री भी बने. अर्थशास्त्री और दार्शनिक के रूप में उनकी ख्याति रही है. वे अर्थशास्त्र के इस ज़िक्र में साहित्य और सिनेमा भी लाते हैं. किताब उन्होंने अपनी पंद्रह साल की बिटिया को संबोधित करते हुए लिखी है- तो बहुत सरल भाषा में है.
  • रवीश का डोनाल्ड ट्रंप के नाम खुला खत : लगता है बिहार वाला भैक्सीन घोंपना पड़ेगा
    रवीश कुमार
    'ए ट्रंप बाबू. ढेर डिबेट का शौक़ चढ़ल है न तो आ जाइये बिहार.आपके फ़्रेंड जाने वाले हैं. ऊहां भैक्सीन बाँटने वाले हैं. फिरी में बाँटेंगे. आठ करोड़ भैक्सीन फिरी में देंगे. त हम बूझे कि सगरो फिरी बंटेगा लेकिन फ़्रेंड भाई का पलानिंग त आप जानते ही हैं.'
  • अमेरिकी चुनाव में ईरान, रूस चीन की दखलंदाज़ी?
    कादम्बिनी शर्मा
    नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने एक प्रेस कॉन्फेरेंस कर कहा कि ईरान और रूस ने वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल कर ली है और ईरान धुर दक्षिणपंथी गुट प्राउड बॉय्ज़ बन के वोटरों को धमकाने वाले ईमेल भेज रहा है. इस प्रेस कॉन्फेरेंस में एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस रे भी मौजूकि जो द थे
  • एक जुमला, एक चुनाव
    मनोरंजन भारती
    बीजेपी बिहार चुनाव के दौरान ये घोषणा कर रही है फिर थोड़े दिनों बाद बंगाल चुनाव को देखते हुए बंगाल में भी यही घोषणा करेगी. जो काम किसी भी सरकार का कर्तव्‍य होना चाहिए उसे बीजेपी अपने घोषणा पत्र में शामिल कर रही है. बीजेपी को पता है नीतीश के साथ वो इस चुनाव को नहीं जीत पाएंगे इसलिए अब जुमलेबाजी पर उतर आए हैं.
  • 15 साल का दर्द... तुम क्या जानो नीतीश बाबू
    मनोरंजन भारती
    बिहार में चुनाव धीरे-धीरे रंग पकड़ता जा रहा है. जैसे-जैसे दिन बीतते जाऐंगे, बिहार की स्थिति और साफ होती जाएगी. जब चुनाव शुरू हुए थे तब लग रहा था कि एनडीए यानि BJP और JDU गठबंधन को आसानी से बहुमत मिल जाएगा, क्योंकि इस गठबंधन ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत हम पार्टी के जीतन राम माझी और वीआईपी पार्टी के मुकेश साहनी को भी जोड़ लिया.
  • डिमांड में योगी आदित्यनाथ - नीतीश कुमार के उम्मीदवार भी कराना चाहते हैं प्रचार
    स्वाति चतुर्वेदी
    यह पहली बार नहीं है जब आदित्यनाथ को रैलियों में भीड़ खींचने और भाजपा के लिए वोटरों को रिझाने के काम में लगाया गया है लेकिन हाथरस में सामूहिक बलात्कार को लेकर प्रशासन पर जनता का गुस्सा इस कदर था कि बहुत कम नेताओं को राज्य के बाहर (बिहार) इस तरह चुनावी सभाओं में लोगों को रिझाने के लिए ड्यूटी पर लगाया गया.
  • महागठबंधन में भाकपा माले- कितने अवसर, कितनी चुनौती?
    प्रियदर्शन
    2015 के विधानसभा चुनावों में भाकपा माले ने लगभग अकेले दम पर तीन सीटें जीती थीं- बलरामपुर, दरौली और तरारी. बेशक, तरारी वाली सीट वह बहुत कम अंतर से जीत पाई थी- शायद मुश्किल से सवा दो सौ या ढाई सौ वोटों से. लेकिन भोजपुर क्षेत्र में उसकी वापसी का मज़बूती भरा इशारा भी थी. सुदामा प्रसाद को पूरे दो दशक बाद यह कामयाबी मिली थी. बेशक, तब वाम मोर्चे के नाम पर जुटे बहुत सारे दलों का गठबंधन उसके साथ था, लेकिन उन चुनावों में भाकपा-माकपा- किसी का खाता नहीं खुल पाया था. जाहिर है, माले की जीत उसकी अपनी थी.
  • इन तीन बड़े बयानों के साथ अमित शाह दे रहे बदलाव का संकेत
    स्वाति चतुर्वेदी
    कोविड-19 के संक्रमण में लंबा वक्त बीतने और अस्पताल में ज्यादा दिन तक ठहराव के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अप्रत्याशित तौर पर ज्यादा नरम रुख अख्तियार कर रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौर में भी 55 वर्षीय राजनेता विरोधियों पर हमले नहीं कर रहे हैं. 
  • 25 साल: दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे: किसी भी दौर में ताजा हवा का झोंका!
    मनीष शर्मा
    यह फिल्म भारतीय सिनेमा सहित कई लोगों मतलब यशराज बैनर और किंग खान के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई! अमिताभ बच्चन के बाद भारतीय सिनेमार के सबसे बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान का करियर 360 के कोण पर घूम गया! मंगलवार (20 अक्टूबर) को 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' की रिलीज को पूरे 25 साल हो जाएंगे, लेकिन आज भी यह फिल्म किसी ताजे हवा के झोंके की तरह है.
  • किसकी लंका जलाता है यह हनुमान या फिर अपनी पूंछ ही जला बैठता है
    लोक जनशक्ति पार्टी नेता चिराग पासवान ने एनडीटीवी से एक इंटरव्यू में कहा है कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान हूं अगर मेरा सीना चीर कर देखिएगा तो आपको मोदी जी की तस्वीर मिलेगी. चिराग का कहना है उसे प्रधानमंत्री की तस्वीर पोस्टर में नहीं लगाने दिया गया तो क्या हुआ प्रधानमंत्री उनके दिल में हैं.
  • रेटिंग के बहाने नियम बदल कर वही खेल खेले जाने का दिमाग़ किसका है भाई
    रवीश कुमार
    आपको एक दर्शक के नाते चैनल के ऊपर जो कंटेंट दिखाया जा रहा है उस पर नज़र रखें. देखिए कि क्या उसमें वाकई कोई पत्रकारिता है, क्या आपने वाकई किसी चीज़ के बारे में जाना. जिन पर सरकार की भक्ति और भजन का आरोप लग रहा है वही एक चैनल को टारगेट करने के बहाने संत बनने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए.
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