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विचार
  • बिहार के सरकारी अस्पतालों की व्यथा-कथा
    रवीश कुमार
    आज बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक ट्वीट किया है कि राबड़ी देवी बताएं, उनके शासन में मेडिकल कॉलेजों की क्या स्थिति थी. यह सुनकर किसी को भी लग सकता है कि राबड़ी देवी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद काफी कुछ सुधार हुआ होगा.
  • क्या विश्वविद्यालयों से देश को ख़तरा है?
    प्रियदर्शन
    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार छात्रों को देशभक्त बनाने के लिए एक अध्यादेश लेकर आई है. उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश नाम के इस कानून के मुताबिक विश्वविद्यालयों में अगर राष्ट्र विरोधी गतिविधियां हुईं तो उन पर कार्रवाई हो सकती है, उनकी मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: बिहार में बच्चों की मौत पर रिपोर्टिंग करती टीवी पत्रकारिता को टेटेनस हो गया
    रवीश कुमार
    आम तौर पर तीन बेड पर एक डॉक्टर होना चाहिए. अगर 1500 बेड की बात कर रहे हैं तो करीब 200-300 डॉक्टर तो चाहिए ही नहीं. बेड बनाकर फोटो खींचाना है या मरीज़ों का उपचार भी करना है. जिस मेडिकल कालेज की बात कर गए हैं वहां मेडिकल की पढ़ाई की मात्र 100 सीट है. 2014 में हर्षवर्धन 250 सीट करने की बात कर गए थे. यहां सीट दे देंगे तो प्राइवेट मेडिकल कालेजों के लिए शिकार कहां से मिलेंगे. गेम समझिए. इसलिए नीतीश कुमार की घोषणा शर्मनाक और मज़ाक है. अस्पताल बनेगा उसकी घोषणा पर मत जाइये. देश में बहुत से अस्पताल बन कर तैयार हैं मगर चल नहीं रहे हैं. गली-गली में खुलने वाले एम्स की भी ऐसी ही हालत है.
  • बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था कब तक बीमार रहेगी?
    रवीश कुमार
    बिहार के मुज़फ्फरपुर ज़िले में 109 बच्चों की मौत हो चुकी है. यह आधिकारिक आंकड़ा है. मीडिया में आंकड़ा तो 130 पार कर गया है. जब तक हम पूरे बिहार के हेल्थ सिस्टम और बजट को नहीं समझेंगे, बड़े सवाल नहीं करेंगे. श्री कृष्ण मेडिकल कालेज अस्पताल के कुछ वीडियो लेकर तड़क भड़क करने से कुछ नहीं होगा. आप अभी भी स्वास्थ्य से जुड़े असली मसलों से भाग रहे हैं. यह एक दिन का मामला नहीं है.
  • असदुद्दीन ओवैसी को देख इन्हें याद आती है भारत माता...!
    प्रियदर्शन
    लोकसभा में असदुद्दीन ओवैसी जब शपथ लेने के लिए आए, तो BJP सांसदों ने 'वन्दे मातरम्' और 'भारत माता की जय'के नारे लगाने शुरू कर दिए. असदुद्दीन ओवैसी हमेशा की तरह ज़्यादा समझदार निकले और उन्होंने हाथ से इशारा किया कि और ऊंची आवाज़ में यह नारे लगाए जाएं.
  • सामंती घोड़ों पर सवार हमारे लोकतंत्री नवाब
    डॉ विजय अग्रवाल
    केंद्र में उपप्रधानमंत्री तथा राज्यों में एक-एक उपमुख्यमंत्री के बारे में तो हम लोग सुनते आए थे, लेकिन एक राज्य में पांच उपमुख्यमंत्री- यह आंध्र प्रदेश ने हमें पहली बार दिखाया है. और ऐसा तब है, जब इस पदनाम के रूप में न उनके पास कोई अतिरिक्त अधिकार होंगे, न किसी तरह की भी कोई विशेष सुविधा, तो फिर ऐसा क्यों है...?
  • मुजफ्फरपुर में 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?
    रवीश कुमार
    मुजफ्फरपुर ज़िले में मौत से जुड़े जो कारण सामने आ रहे हैं वो एक ऐसा विषय है अगर 100 बच्चों की मौत न हो तो आपका यही मीडिया उस पर तीस सेकेंड की भी ख़बर न दिखाए. मीडिया ही नहीं आप भी नहीं देखना चाहेंगे. ज़ाहिर है आप भी रात के 9 बजे कुपोषण पर चर्चा नहीं देखना चाहेंगे क्योंकि आप तो मानते हैं कि वो दिखाया जाए जिससे लगे कि कुछ हो रहा है. कुपोषण वगैरह तो चलता ही रहता है.
  • वर्ल्‍ड कप 2019 में बारिश और बेल्‍स की ही चर्चा..
    मनोरंजन भारती
    इंग्‍लैंड में हो रहे मौजूदा वर्ल्ड कप को लेकर दो बातें काफी चर्चा में हैं एक है इंग्‍लैंड की बारिश और दूसरा है वर्ल्ड कप में प्रयोग में की जा रही गिल्लियां (Bails)जो गिरती नहीं है...बारिश का साया इस बार के वर्ल्ड कप पर बुरी तरह पड़ा है. इस बारिश की वजह से श्रीलंका के दो मैच और वेस्ट इंडीज,बांग्लादेश, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के एक-एक मैच रद्द हो चुके हैं.
  • सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारियां - सुप्रीम कोर्ट सख्त क्यों नहीं
    विराग गुप्ता
    गिरफ्तार लोगों में से अधिकांश को निचली अदालतें जेल भेज देती हैं, क्योंकि सभी लोग तो सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकते. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJM कोर्ट ने 20,000 रुपये की दो ज़मानतों और बंधपत्र दाखिल करने पर पत्रकार प्रशांत कनौजिया को रिहा कर दिया. प्रियंका शर्मा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आपत्तिजनक मीम बनाया, जिन्हें माफी की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई दी. दोनों ही मामलों में पुलिस की गलत FIR और बेजा गिरफ्तारी के बावजूद, निचली अदालतों ने रिमांड आदेश पारित कर दिया था. पुलिस और निचली अदालतों के इस गैर-ज़िम्मेदार सिस्टम पर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्ती नहीं बरतने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं.
  • दिल्ली में 50 डिग्री का अलार्म
    सुधीर जैन
    10 जून को दिल्ली गर्मी से झुलसने लगी. पारा ज्ञात इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़कर 48 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. मामला मौसम का है. इस पर किसी का बस नहीं है सो करने के लिए ज्यादा बात बनती नहीं है. एक दो हफ्ते में नहीं तो दो तीन हफ्ते बाद पानी गिरेगा ही. भूल जाएंगे कि इस साल गर्मियों में क्या हुआ था. लेकिन रिकॉर्ड तोड़ तापमान की घटना आगे के लिए दिल्ली को कोई चेतावनी तो नहीं है?
  • अगर गिरीश कर्नाड अर्बन नक्सल थे, तो अर्बन नक्सल को श्रद्धांजलि कैसी, चैनल बताएंगे या प्रोपेगैंडा मास्टर
    रवीश कुमार
    क्या उन चैनलों पर भी गिरीश कर्नाड को श्रद्धांजलि दी जा रही होगी जिनके अर्बन नक्सल के प्रोपेगैंडा के विरोध में गिरीश कर्नाड बीमारी के बाद भी अर्बन नक्सल की तख़्ती लेकर खड़े हो गए थे? जिन लोगों को अर्बन नक्सल बताकर जेल भेजा गया था, वो आज भी जेल में हैं. सुधा भारद्वाज अब भी जेल में हैं. गौरी लंकेश की हत्या की जांच एक मुकाम पर पहुंची तो है मगर अंजाम से अब भी दूर है. कब सियासी सौदा हो जाए और जांच की फाइलें बदल जाए कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.
  • क्या भारत की जीडीपी 4.5 प्रतिशत रही है, भारत ने ढाई प्रतिशत बढ़ा-चढ़ा कर बताया है?
    रवीश कुमार
    भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने जीडीपी के हिसाब-किताब के नए पैमाने पर सवाल उठा दिया है. उनका कहना है कि 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत की जीडीपी को काफी बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान जीडीपी की दर 7 प्रतिशत के आस-पास रही है लेकिन अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि वास्तविक जीडीपी हर साल 4.5 प्रतिशत के आस-पास रही है.
  • गिरीश कर्नाड प्रतिरोध का व्याकरण थे, जो हम भूलते जा रहे हैं...
    प्रियदर्शन
    गिरीश कर्नाड की कुछ अंतिम मार्मिक छवियां उन प्रतिरोध सभाओं से बनती हैं, जहां वह कभी 'मैं भी अर्बन नक्सल' और कभी 'नॉट इन माई नेम' की तख़्ती लगाकर पहुंचे दिखाई पड़ते थे. 80 साल की उम्र में अपनी लगातार बड़ी होती शारीरिक व्याधियों के बीच वह अगर इन सभाओं में लंबी दूरी तय कर पहुंचते थे, तो इसलिए नहीं कि उनमें किसी तात्कालिक राजनीतिक प्रतिरोध का शौक या जुनून था, बल्कि इसलिए कि वह जिस बहुलता, विविधता और स्वतंत्रता को भारतीय चेतना का मूल्य मानते रहे, उस पर बढ़ रहे खतरे का उन्हें गंभीरता से एहसास था.
  • काम के लंबे घंटे और वर्किंग हॉलिडे, अलग है अमित शाह का गृह मंत्रालय
    नीता शर्मा
    दिल्ली में नॉर्थ ब्लॉक में स्थित गृह मंत्रालय में काम के घंटे बढ़ गए हैं. ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि गर्मी के दिन काफी लंबे होते हैं, बल्कि इसकी वजह गृह मंत्री की बहुत ज्यादा काम करने की प्रवृति है. अमित शाह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को सुबह 10 बजे से पहले ही अपने कार्यालय पहुंच गए. गुरुवार को भी वे सुबह 9.40 बजे पहुंचे और देर तक रुके. मैं बीते एक दशक से गृह मंत्रालय को कवर कर रही हूं और चार गृह मंत्रियों को देखा है. अमित शाह ऐसे पहले गृह मंत्री हैं जो अपना पूरा दिन ऑफिस में बिताने हैं और रात 8 बजे के बाद निकलते हैं.
  • कांग्रेस की कलह रोकने के लिए जल्द बनाना होगा नया अध्यक्ष
    मनोरंजन भारती
    कांग्रेस से यह खबर आ रही है कि राहुल गांधी से अलग पार्टी किसी और को अध्यक्ष बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है और नए पार्टी अध्यक्ष की खोज भी शुरू हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की माने तो पार्टी का नया अध्यक्ष गैर गांधी होगा यानी नए अध्यक्ष का गांधी परिवार से कोई लेना देना नहीं होगा. साथ ही अगले दो से तीन महीनों में इसकी घोषणा की जाएगी.
  • मोदी और शाह- दो बाघ, एक पहाड़, राजनाथ कहां छूटे?
    "एक पहाड़ पर दो बाघ नहीं हो सकते." क्या यह चीनी कहावत नरेन्द्र मोदी की हाल ही में शुरू हुई दूसरी पारी की खासियत बनने जा रही है? या फिर मोदी और अमित शाह इसे गलत साबित करेंगे?
  • छह महीने में मिलेंगे कॉलेजों को दो लाख नए शिक्षक, उनकी योग्यता को लेकर रहिए सतर्क
    रवीश कुमार
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश के सभी वाइस चांसलरों से कहा है कि वह छह महीने के भीतर ख़ाली पदों को भर दें. अगर ऐसा हुआ तो छह महीने के भीतर दो लाख से अधिक लोगों को यूनिवर्सिटी में नौकरी मिलेगी.
  • राहुल गांधी के मिजाज से मुश्‍क‍िल में कांग्रेस
    अगर राहुल पद छोड़ने के प्रति गंभीर हैं तो उन्हें अब एक काम करने की जरूरत है कि वह रास्ता साफ करें और एक नेता को आगे लाएं जो कमियों को दूर करके जल्दी से आगे बढ़ सकता है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : जेम्स बॉन्ड को मालूम है, बंगाल में 370 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड का ख़रीदार कौन है
    रवीश कुमार
    क्या ऐसा हो सकता है कि कई सारी अज्ञात शक्तियां, देसी और विदेशी, एक पार्टी के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदती हैं. वह पार्टी उस बॉन्ड के पैसे से कुछ प्रभावशाली लोगों को ख़रीद लेती है और वो लोग उन वोटरों को जो दो से तीन हज़ार के नोट के लिए वोट बेचने के लिए तैयार बैठे हैं. 
  • अकेला हाथी किसका साथी...
    मनोरंजन भारती
    मायावती ने एकला चलो रे का एलान कर दिया है मतलब उत्तर प्रदेश में जो 11 उपचुनाव होन वाले हैं उसमें बीएसपी अपने उम्मीदवार खड़े करेगी मगर जो तर्क मायावती ने दिए उसकी जांच पड़ताल करनी जरूरी है. मायावती ने कहा कि उनके एकला चलो रे के पीछे वजह है कि समाजवादी पार्टी के वोट बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों को नहीं मिले.
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