अनुभव सिन्हा अब Covid 19 महामारी पर बनाएंगे फिल्म, बोले- 'यह इतना दिलचस्प समय है कि...'

अनुभव सिन्हा (Anubhav Sinha) अब जल्द ही कोविड 19 महामारी पर फिल्म बनाएंगे.

अनुभव सिन्हा अब Covid 19 महामारी पर बनाएंगे फिल्म, बोले- 'यह इतना दिलचस्प समय है कि...'

अनुभव सिन्हा (Anubhav Sinha) अब कोविड 19 महामारी पर बनाएंगे फिल्म

खास बातें

  • अनुभव सिन्हा कोरोनावायरस महामारी पर बनाएंगे फिल्म
  • चार निर्माताओं के साथ मिलकर बनाएंगे फिल्म
  • फिल्म में कई कहानियां होंगी शामिल
नई दिल्ली:

इस साल रिलीज हुई फिल्म 'थप्पड़ (Thhapaad)' की सफलता के बाद, अनुभव सिन्हा (Anubhav Sinha) ने हाल ही में अपनी अगली परियोजना की घोषणा कर दी है. यह कोरोनोवायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की कहानियों और अनुभवों पर आधारित एक एंथोलॉजी फिल्म होगी, जिसका निर्माण बनारस मीडियावर्क्स के तहत किया जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि कोविड-19 महामारी के बीच हमारी हालिया स्थिति के विषय पर केंद्रित एक एंथोलॉजी फिल्म विकसित करने के लिए अनुभव सिन्हा ने हंसल मेहता, सुधीर मिश्रा (Sudhir Mehta), केतन मेहता और सुभाष कपूर जैसे अपने चार फिल्म निर्माता दोस्तों के साथ हाथ मिलाया है.


एन्थोलॉजी के विचार और इसके पीछे की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए, अनुभव सिन्हा ने बताया, "यह हमारे जीवन में एक दिलचस्प समय की कहानियों को बताने के लिए नामों का एक दिलचस्प ग्रुप होगा. हम सभी फरवरी/मार्च 2020 से इस अवधि की व्याख्या करेंगे और हम सभी इससे एक कहानी बताएंगे." अनुभव सिन्हा (Anubhav Sinha) बताते हैं, "यह इतना दिलचस्प समय है, कि भले ही मुझे यह एहसास है कि इस स्थिति के लिए दिलचस्प अच्छा शब्द नहीं है, सुधीर भाई के ड्राइवर कोविड की चपेट में आ गए थे और उन्हें बिस्तर नहीं मिल रहा था और हम उन्हें अस्पताल में बिस्तर दिलाने के लिए सभी को फोन कर रहे थे. उस रात मेरे दिमाग में आया की हमें इसे डॉक्यूमेंट करना चाहिए और अलग-अलग चीजों को देखने वाले विभिन्न फिल्म निर्माताओं के साथ इसे करने की तुलना में बेहतर तरीका क्या हो सकता है भला? सुधीर भाई के पीताजी की मौत कोविड के समय में हुई थी. हमने इरफ़ान को भी खो दिया - और हम इरफ़ान के जनाज़े पे भी नहीं जा पाए. निकलूं कि नहीं निकलूं... तिग्मांशु (धूलिया) को पुलिस से झगड़ा करना पड़ा- उन्होंने कहा कि मैं तो जाऊंगा, भाई है मेरा."

वह आगे कहते हैं, "ये सारी चीजें परेशान करने वाली थी. मुझे लगा इनको रिकॉर्ड करना चाहिए. मैंने फिर सभी दोस्तों से बात की और उन सभी ने कहा- हां यार करतें हैं और इस तरह इसके पीछे का विचार औपचारिक होना शुरू हो गया. यह हम सभी के लिए एक अच्छे सहयोग की तरह लग रहा था. इसमें सुभाष की एक कहानी, हंसल की एक, सुधीर भाई की एक, केतन की एक कहानी है. ये ऐसे फिल्मकार हैं जिनके बारे में मेरा मानना ​​है कि 'बॉलीवुड' ने इन्हें काफी हद तक अनदेखा किया है." प्रत्येक फिल्म निर्माता की कहानी पर अधिक रोशनी डालते हुए, अनुभव बताते हैं, "

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