भारत की पहली ऑस्कर अवॉर्ड विजेता भानू अथैया का निधन, 91 वर्ष की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा

भारत की पहली ऑस्कर विजेता (Oscar Winner) भानू अथैया (Bhanu Athaiya) ने 91 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया.

भारत की पहली ऑस्कर अवॉर्ड विजेता भानू अथैया का निधन, 91 वर्ष की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा

भानू अथैया (Bhanu Athaiya) का 91 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

खास बातें

  • भारत की पहली ऑस्कर विजेता का 91 वर्ष की उम्र में हुआ निधन
  • भानू अथैया ने गुरू दत्त की फिल्म सीआईडी से की थी फिल्मी करियर की शुरुआत
  • पिछले तीन सालों से बिस्तर पर थीं भानू अथैया
नई दिल्‍ली:

भारत की पहली ऑस्कर विजेता भानू अथैया (Bhanu Athaiya) ने 91 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. मशहूर इंडियन कॉस्ट्यूम डिजाइनर भानू अथैया ने ही भारत के लिए पहला अकादमी और ऑस्कर पुरस्कार जीता था. उन्होंने 1956 में बॉलीवुड एक्टर गुरू दत्त की फिल्म सीआईडी से बतौर कॉस्ट्यूम डिजाइनर अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उनकी बेटी ने इस बात की जानकारी दी कि वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं और बीते गुरुवार उनका निधन हो गया. वह पिछले तीन साल से बिस्तर पर थीं. 

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भानू अथैया (Bhanu Athaiya) की बेटी राधिका ने उनके निधन की जानकारी देते हुए कहा, "आज सुबह उनका निधन हो गया. आठ साल पहले उनके दिमाग में ट्यूमर होने का पता चला था. वह पिछले तीन सालों से बिस्तर पर ही थीं, क्योंकि उनके शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया था." बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार दक्षिण मुंबई के चंदनवाड़ी शवदाह गृह में किया जाएगा. उनके निधन को लेकर सोशल मीडिया यूजर भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. बता दें कि भानू अथैया ने गुरू दत्त, यश चोपड़ा, बी.आर चोपड़ा, राज कपूर, विजय आनंद, राज खोसला और आशुतोष गोवारिकर के साथ कॉस्ट्यूम डिजाइनर के तौर पर काम किया है. 

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बता दें कि भानू अथैया (Bhanu Athaiya) को रिचर्ड एटेनबरो की फिल्म 'गांधी' के लिए बेस्ट कॉस्ट्यूम के लिए ऑस्कर अवॉर्ड से नवाजा गया था. उन्होंने करीब 100 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम डिजाइनर काम किया था. आखिरी बार भानू अथैया ने आमिर खान की फिल्म 'लगान' और शाहरुख खान की फिल्म 'स्वदेस' में कॉस्ट्यूम डिजाइनर के तौर पर काम किया था. साल 2012 में उन्होंने ऑस्कर अवॉर्ड को लौटाने की घोषणा की थी. इस बारे में उन्होंने कहा था कि उनका परिवार और भारत सरकार उनके इस अमूल्य अवॉर्ड का रख-रखाव नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में यह अवॉर्ड अकादमी के संग्रहालय में ही सुरक्षित रहेगा.