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A.K. Hangal: 50 की उम्र में बने एक्टर, 98 की उम्र में दिखे सीरियल में- 'शोले' के रहीम चाचा के बारे में खास बातें

A.K. Hangal: ए.के. हंगल की आज 108वीं जयंती है. ए.के. हंगल का पूरा नाम अवतार किशन हंगल था, और उनका जन्म 1 फरवरी, 1914 को सियालकोट में हुआ था. ए.के. हंगल ने 'शोले', 'शौकीन', 'मंजिल', 'लगान', 'पहेली' और 'बावर्ची' जैसी बेहतरीन फिल्मनों में काम भी किया.

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A.K. Hangal: 50 की उम्र में बने एक्टर, 98 की उम्र में दिखे सीरियल में- 'शोले' के रहीम चाचा के बारे में खास बातें

A.K. Hangal Happy Birthday: ए.के. हंगल की 105वीं जयंती है आज

खास बातें

  1. 50 साल की उम्र में शुरू की एक्टिंग
  2. आजादी की लड़ाई में लिया हिस्सा
  3. शानदार एक्टिंग के लिए पहचाने गए
नई दिल्ली:

बॉलीवुड एक्टर और शोले रहीम चाचा के नाम से मशहूर ए.के. हंगल (A.K. Hangal) की आज 105वीं जयंती है. ए.के. हंगल का पूरा नाम अवतार किशन हंगल था, और उनका जन्म 1 फरवरी, 1914 को सियालकोट में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में हैं. ए.के. हंगल (A.K. Hangal) ने 1929 से लेकर 1947 तक आजादी के संग्राम में हिस्सा लिया था, और वे जेल भी गए थे. आजादी के संग्राम में हिस्सा लेने के साथ ही वे 1936 से 1965 तक रंगमंच कलाकार भी रहे और उन्होंने रंगमंच पर अपनी सेवाएं दीं. लेकिन ए.के. हंगल (A.K. Hangal) ने 50 साल की उम्र में पहली बार कैमरा फेस किया और उसके बाद वे हिंदी सिनेमा के चहेते कलाकार बन गए. ए.के. हंगल (A.K. Hangal) ने 'शोले', 'शौकीन', 'मंजिल', 'लगान', 'पहेली' और 'बावर्ची' जैसी बेहतरीन फिल्मनों में काम भी किया.  


 

ए.के. हंगल (A.K. Hangal) के बारे में खास बातेंः

ए.के. हंगल (A.K. Hangal) ने 50 साल की उम्र में कैमरा फेस किया और 96 वर्ष की उम्र में वे व्हीलचेयर पर बैठकर फैशन परेड में शामिल हुए था. 97 वर्ष की उम्र में उन्होंने एनिमेटेड फिल्म में अपनी आवाज भी दी थी.  

ए.के. हंगल (A.K. Hangal) ने चार दशक से अधिक के करियर में लगभग 225 फिल्मों में काम किया और अपने आखिरी दिनों में वे टीवी सीरियल 'मधुबाला' में भी नजर आए थे. 

ए.के. हंगल (A.K. Hangal) का जन्म सियालकोट में हुआ था, और ए.के. हंगल ने अपना अधिकांश बचपन पेशावर में बिताया. उन्होंने दर्जी के तौर पर काम किया और रंगमंच ने उन्हें राह प्रदान की. 

 

 

ए.के. हंगल (A.K. Hangal) के बारे बताया जाता है कि विभाजन के बाद वह 1949 में मुंबई चले आए थे. हंगल वामपंथ से संबद्ध पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) से जुड़े थे.

ए.के. हंगल (A.K. Hangal) ने 1966-67 में हिंदी फिल्मों में कदम रखा. ए.के. हंगल की शुरुआती फिल्मों में 'तीसरी कसम' और 'शागिर्द' शामिल हैं.

 

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ए.के. हंगल (A.K. Hangal) की यादगार फिल्मों में 'नमक हराम', 'शोले', 'बावर्ची', 'छुपा रुस्तम', 'अभिमान' और 'गुड्डी' शामिल हैं और, 'शौकीन' में भला उनकी भूमिका को कौन भूल सकता है, जिसमें उन्होंने एक सेवानिवृत्त रसिक बूढ़े शख्स का रोल किया था. 

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