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Happy Father's Day 2019: मुझ को छांव में रखा और खुद भी वो जलता रहा...फादर्स डे पर पढ़ें मशहूर शायरी

Father's Day 2019: हर साल जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे (Father's Day) मनाया जाता है. फादर्स डे की शुरुआत 1910 में सोनोरा लुईस स्मार्ट डॉड (Sonora Louise Smart Dodd) नाम की लड़की ने की थी.

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Happy Father's Day 2019: मुझ को छांव में रखा और खुद भी वो जलता रहा...फादर्स डे पर पढ़ें मशहूर शायरी

फादर्स डे (Father's Day 2019) के मौके पर पढ़े ये शायरी

खास बातें

  1. 'फादर्स डे' के मौके पर पढ़े ये शायरियां
  2. इस साल 16 जून को मनाया जा रहा है 'फादर्स डे'
  3. हर साल जून के तीसरे संडे को मनाया जाता है 'फादर्स डे'
नई दिल्ली:

Father's Day 2019: हर साल जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे (Father's Day) मनाया जाता है. फादर्स डे की शुरुआत 1910 में सोनोरा लुईस स्मार्ट डॉड (Sonora Louise Smart Dodd) नाम की 16 वर्षीय लड़की ने की थी. सोनोरा का लालन-पालन उनके पिता ने किया था. सोनोरा ने जब मदर्स डे के बारे में सुना तो उसने फादर्स डे (Father's Day) मनाने के बारे में सोचा. इस तह सोनोरा के प्रयासों से ही फादर्स डे  (Father's Day) की शुरुआत हुई. इस साल फादर्स डे (Father's Day 2019) 16 जून को है. फादर्स डे के मौके पर अब कई तरह के आयोजन होते हैं और गिफ्ट्स की भी भरमार है. फादर्स डे (Father's Day 2019) पर उर्दू के शायरों ने खूब शायरी की है.  

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फादर्स डे (Father Days 2019) के इस खास मौके पर पढ़े ये 10 शेर:


मुझ को छांव में रखा और खुद भी वो जलता रहा 
मैं ने देखा इक फरिश्ता बाप की परछाईं में 
अज्ञात

बच्चे मेरी उंगली थामे धीरे-धीरे चलते थे
फिर वो दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया

खालिद महमूद

घर लौट के रोएंगे मां बाप अकेले में 
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में 
कैसर-उल जाफरी

मेरा भी एक बाप था अच्छा सा एक बाप 
वो जिस जगह पहुँच के मरा था वहीं हूं मैं 
रईस फरोग

सुबह सवेरे नंगे पांव घास पे चलना ऐसा है 
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माओं की 
हम्माद नियाजी

उन के होने से बख्त होते हैं 
बाप घर के दरख्त होते हैं 
अज्ञात

मुझ को थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़ 
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते 
मेराज फैजाबादी

बेटियां बाप की आखों में छिपे ख्बाव को पहचानती हैं 
और कोई दूसरा इस ख्बाव को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं

इफ्तिखार आरिफ

ये सोच के मैं बाप की खिदमत में लगा हूं
इस पेड़ का साया मेरे बच्चों को मिलेगा
मुनव्वर राना

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