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Google Doodle Kamala Das: 'मैं नहीं चाहती मेरे शरीर को जलाया जाए...' और फिर 65 की उम्र में अपना लिया इस्लाम

Kamala Das Google Doodle: मलयालम लेखिका कमला दास अपनी क्रांतिकारी लेखनी के लिए पहचानी जाती हैं. कमला दास ने अपनी आत्मकथा MY Story लिखी तो हड़कंप मच गया. आज गूगल डूडल बनाकर उन्हें याद कर रहा है

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Google Doodle Kamala Das: 'मैं नहीं चाहती मेरे शरीर को जलाया जाए...' और फिर 65 की उम्र में अपना लिया इस्लाम

Google Doodle Kamala Das: आज ही के दिन रिलीज हुई थी कमला दास की आत्मकथा My Story

खास बातें

  1. 65 की उम्र में अपनाया था इस्लाम
  2. माय स्टोरी से मचा दिया था हंगामा
  3. तीन कहानियों पर बन चुकी हैं फिल्में
नई दिल्ली: मशहूर कवयित्री और लेखिका कमला दास माधवीकुट्टी के नाम से भी लिखती थीं. 1 फरवरी के दिन 1976 में उनकी आत्मकथा My Story को लॉन्च किया गया था. गूगल आज डूडल बनाकर मलयालम और इंग्लिश लेखिका कमला दास की बेस्टसेलर My Story को याद कर रहा है. वे अंग्रेजी में कविताएं लिखती थीं और उसके साथ ही केरल में मलयालम की मशहूर लेखिका भी थीं. आज का Google Doodle आर्टिस्ट मंजीत थाप ने बनाया है. उनकी जिंदगी पर 'अमी' नाम से फिल्म भी बन रही है और इसमें मंजू वॉरियर लीड रोल निभा रही हैं. हालांकि इस फिल्म में पहले विद्या बालन को लेने की बात चल रही थी. लेकिन उन्होंने इसमें काम करने से हाथ खींच लिया था. कमला दास की शादी 15 साल की उम्र में हुई थी और उनके पति माधव दास एक बैंक ऑफिसर थे. उन्होंने कमला को लिखने के लिए प्रेरित किया और कमला ने इंग्लिश और मलयालम में लिखना शुरू कर दिया. 

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और इस वजह से अपना लिया इस्लाम
कमला दास का जन्म पारंपरिक हिंदी नायर परिवार में हुआ था. उनके परिवार की जड़ें शाही परिवार जुड़ी थीं. कमला दास ने 11 दिसंबर, 1999 में 65 साल की उम्र में इस्लाम को अपना लिया और कमला सुरैया हो गईं. उन्होंन एक इंटरव्यू में कहा थाः "मुझे दाह संस्कार की हिंदू प्रक्रिया पसंद नहीं है. मैं नहीं चाहती मेरे शरीर को जलाया जाए. यह एक छोटी वजह हो सकती है. लेकिन मेरा इस्लामिक जीवनशैली के प्रति खास लगाव रहा है. मैंने दो नाबीना मुस्लिम बच्चों इरशाद अहम और इम्तियाज अहमद को गोद लिया है. वे मुझे इस्लाम के करीब लाए हैं..."

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कमला दास की कहानियों पर बनी फिल्में
कमला दास की तीन कहानियों पर फिल्में बनी थीं. राम रावणनः 'मनोमी' नाम से लिखे गए उनके उपन्यास पर आधारित इस फिल्म को 2010 में बनाया गया था. फिल्म को बीजू वत्ताप्पारा ने डायरेक्ट किया था. इस मलयालम फिल्म को पसंद किया गया था. इस उपन्यास को उन्होंने माधवीकुट्टी के नाम से लिखा था. ओरमईलेनमः 1998 में बनी ये फिल्म माधवीकुट्टी की कहानी पर ही आधारित थी. फिल्म को टी. मोहन ने डायरेक्ट किया था. काधावीदुः 2013 में आई इस मलयालम फिल्म में तीन कहानियों को पिरोया गया था. इसमें एक कहानी कमलाा दास की भी थी. 

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