Pandit Usman हैं भारत का सच्चा दिल, निर्देशक बोले- मैंने इस फिल्म में एक ऐसी दुनिया रची है, जो...

उस्मान पंडित (Pandit Usman) शॉर्ट फिल्म हुई रिलीज, निर्देशन ने कही ये बात.

Pandit Usman हैं भारत का सच्चा दिल, निर्देशक बोले- मैंने इस फिल्म में एक ऐसी दुनिया रची है, जो...

पंडित उस्मान (Pandit Usman) शॉर्ट फिल्म हुई रिलीज

खास बातें

  • 'पंडित उस्मान' शॉर्ट फिल्म हुई रिलीज
  • फिल्म के निर्देशन ने कही ये बात
  • हिंदू-मुस्लिमों को जोड़ती है ये फिल्म
नई दिल्ली:

उस्मान पंडित (Pandit Usman) कुछ मायनों में अनोखी फिल्म है. यह हमें पहले तो दुनिया के पागलपन का चेहरा दिखाती है और इसके बाद बिना स्कूली तौर-तरीकों वाले पाठ पढ़ाए खूबसूरती से सीख देती है कि आज के संसार में प्यार की कितनी अहमियत है. यह कुछ तीखे व्यंग्य बाण भी चलाती है. इसे देखना शानदार अनुभव है. इसे सधे हुए ढंग से लिखा गया है. इसके निर्देशन के पीछे गहरी सोच नजर आती है. कलाकारों का परफॉरमेंस शानदार है, जिसे कैमरे ने सुंदर ढंग से कैद किया है. फिल्म का संगीत आत्मा को छूता है.

फिल्म उस्मान पंडित (Pandit Usman) के बारे में बात करते हुए इसके लेखक-निर्देशक अकरम हसन कहते हैं, "मैंने एक ऐसी दुनिया इस फिल्म में रची है, जिसे आप कम या अधिक जादुई यथार्थ कह सकते हैं. एक ऐसी दुनिया जिसका संबंध हमारे अस्तित्व से है. प्रेम ही वह चीज है जो हम इस दुनिया से जोड़ती है. आज हमारी दुनिया और विचार पूरी तरह से सूचनाओं, तस्वीरों और उधार की भावनाओं से लिए हुए हैं. आज इस असमंजस भरी दुनिया में डूब कर हमने बतौर इंसान और समाज, दोनों ही रूप में अपनी आत्मा की शुद्धता खो दी है. मैंने अपनी फिल्म में उसी शुद्धता, चेतना और प्रेम के सात्विक विचार को फिर से प्रतिष्ठित करने की कोशिश की है. यह किसी ऐसे व्यक्ति के माध्यम से ही संभव हो सकता था जो इस दुनिया के प्रभाव में आकर अभी भ्रष्ट न हुआ हो या फिर वह बच्चा हो. खास तौर पर संसार भर के बच्चों के मन में पवित्रता है, वे अभी इसकी भावनाओं-विचारों से अछूते हैं और उनके अंदर नकारात्मक भावनाएं पैदा नहीं हुई हैं. मुझे लगता है कि वक्त की यही मांग है कि हम अपनी आत्मा की शुद्धता के लिए सामाजिक समरसता की राह पर आगे बढ़ें. इसी सोच के साथ मैंने पंडित उस्मान का किरदार गढ़ा."

पंडित उस्मान (Pandit Usman) ने आगे कहा, "मेरे लिए पंडित उस्मान सांप्रदायिकता के जहर का इलाज है और वही भारत की सच्ची आत्मा है." फिल्म देखने के बाद कहा जा सकता है कि कहानी कहने और निर्देशन के मामले में अकरम हसन की पूरी पकड़ है. वह फिल्म के मूल विचार से जरा भी इधर-उधर नहीं भटकते. जिस तरह से फिल्म आज की हकीकत और जादुई यथार्थवाद के बीच झूलती है, उससे पता चलता है कि अकरम खूबसूरत ढंग से कहानी कहने का अंदाज जानते हैं. इस फिल्म का संसार इतन विश्वसनीय है कि आप उसकी तार्किकता पर सवाल नहीं खड़े कर सकते.

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