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पिता के निधन के 12 साल बाद उनका पिंडदान करने बनारस पहुंचे संजय दत्त

संजय दत्त ने वाराणसी में पिंडदान करने के बाद मीडिया से कहा, "पिता जी ने कहा था कि आजाद हो जाना तो पिंडदान कर देना, इसलिए बनारस आया हूं. बहुत जरुरी था आना." बता दें, उनके पिता और अभिनेता सुनील दत्त का निधन 12 साल पहले 2005 में हुआ था.

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पिता के निधन के 12 साल बाद उनका पिंडदान करने बनारस पहुंचे संजय दत्त

पिंडदान करते हुए संजय दत्त.

खास बातें

  1. संजय दत्त ने किया माता-पिता का पिंडदान
  2. 12 साल पहले हुआ था सुनील दत्त का निधन
  3. 'भूमि' के प्रमोशन में बिजी हैं संजय दत्त
वाराणसी: हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष पर अपने पूर्वजो का पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष प्रप्ति के साथ उनका आशीर्वाद मिलता है, इसी कामना के साथ वाराणसी में फिल्म अभिनेता संजय दत्त अपने पूर्वजों का पिंडदान करने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा की ये उनके पिताजी की इच्छा थी.

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पुराणों में लिखा है कि काशी में जो मरता है उसे इस संसार के आवागमन से मुक्ति मिल जाती है. जिसकी यहां मृत्यु नहीं होती लेकिन यदि उनका पिण्डदान यहां किया जाता है तो उन्हें भी मुक्ति मिल जाती है. ऐसी भावना लिए पितृपक्ष में लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति के लिए यहां आते हैं और गंगा पूजन कर उनके मोक्ष की मनोकामना करते हैं. गंगा तट पर किया गया श्राद्ध का महत्व अपने आप ही बढ़ जाता है. 
 
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पिंडदान करते हुए संजय दत्त.

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संजय दत्त.

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संजय दत्त.

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संजय दत्त.

ऐसी ही कामना लिए संजय दत्त भी अपने पूर्वज पिता-माता, दादा-दादी, नाना-नानी का श्राद करने बनारस के रानीघाट पहुंचे, यहां विधि विधान से उन्होंने पिंडदान किया. इस दौरान जिन पंडितो ने संजय दत्त के साथ मिलकर उनके पूर्वजों के पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की, उन्होंने बताया की पिंडदान के साथ-साथ संजू बाबा ने शंखनाथ गंगा आरती कर, अपनी आने वाले फिल्म 'भूमि' के लिए भी आशीर्वाद मांगा.

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संजय दत्त ने वाराणसी में पिंडदान करने के बाद मीडिया से कहा, "पिता जी ने कहा था कि आजाद हो जाना तो पिंडदान कर देना, इसलिए बनारस आया हूं. बहुत जरुरी था आना." बता दें, संजय के पिता और दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त का निधन 2005 में हुआ था. पिता की मृत्यु के 12 साल बाद संजय पिंडदान करने आए. वहीं, उनकी मां और अभिनेत्री नरगिस का निधन 1981 में हुआ था.

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