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The Extraordinary Journey of the Fakir Movie Review: एडवेंचर्स से भरपूर लेकिन पटकथा में नहीं है दम

फिल्म 'द एक्स्ट्रा आर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' की कहानी मुंबई की झोपड़पट्टी में रहने वाले अजातशत्रु लवाश पटेल उर्फ अजा की है.

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The Extraordinary Journey of the Fakir Movie Review: एडवेंचर्स से भरपूर लेकिन पटकथा में नहीं है दम

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खास बातें

  1. मुंबई के अजातशत्रू की कहानी है 'द एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर'
  2. फिल्म में है मनोरंजन से लेकर इमोशन तक की कमी
  3. एडवेंचर्स से भरपूर है अजा का सफर मगर पटकथा में ऐसी कोई खास बात नहीं है
नई दिल्ली:

'रांझणा' और अपने 'कोलावरी डी' से सबके दिलों पर छा जाने वाले धनुष की अंतर्राष्ट्रीय फिल्म 'द एक्स्ट्राऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' रिलीज हो चुकी है. धनुष की यह फिल्म हॉलीवुड निर्देशक केन स्कॉट की 2014 की बेस्ट सेलर किताब  'द एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' पर आधारित है. फिल्म की खास बात यह है कि इसके निर्देशक केन स्कॉट ने 'द एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' में भारत की गरीबी को भुनाने के बजाय इसके ह्यूमन ऐंगल पर जोर दिया है. फिल्म में रिफ्यूजी की समस्याओं के साथ-साथ प्यार और रिश्तों को भी ठीक से दर्शाया गया है. चूंकि फिल्म अलग-अलग देशों में घूमती है इसलिए इसमें अलग-अलग देशों के रंग भी हैं जो देखने में काफी अच्छे लगते हैं. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी काफी बेहतर अच्छी है. इस फिल्म में धनुष ने अपने किरदार को अच्छे से निभाया है, साथ ही फिल्म में कई विदेशी कलाकार अपनी-अपनी भूमिका में खूब जमे हैं. 

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फिल्म 'द एक्स्ट्रा आर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' की कहानी मुंबई की झोपड़पट्टी में रहने वाले अजातशत्रु लवाश पटेल उर्फ अजा की है. अजातशत्रु बचपन से ही कई दिलचस्प मोड़ से गुजरता है. हालांकि जिंदगी में उसका एक सपना होता है कि वह अमीर बने और अपनी मां को पेरिस लेकर जाए. इस सपने को पूरा करने के लिए अजातशत्रु जादू के करतब दिखाना शुरू कर देता है. फिल्म में अजा की मां सिंगल पेरंट होती है, जिसकी मौत के बाद अजा को एक खत मिलता है. उस खत से पता चल पाता है कि उसके पिता स्पैनिश थे और उसी की तरह सड़कों पर जादू दिखाने वाले जादूगर थे. यही देख अजा पेरिस के सफर पर निकल पड़ता है. अजा का यह सफर उसे दुनिया की कई दिलचस्प जगहों के साथ-साथ अजीबोगरीब लोगों से भी मिलवाता है. अपने इस सफर के दौरान अजा कभी अलमारी में बंद होकर तो कभी बक्से में बंद होकर अलग अलग देशों में चला जाता है.

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 'द एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' की कमजोरी की अगर बात करें तो मेरे हिसाब से हिंदी दर्शकों को शायद ये फिल्म बहुत ज्यादा आकर्षित न करे. ऐसा इसलिए क्योंकि इस फिल्म में मनोरंजन से लेकर इमोशन की कमी है जो हिंदी दर्शकों को आकर्षित करता है. अजा का सफर एडवेंचर्स से भरपूर है मगर पटकथा में ऐसी कोई खास बात नहीं है, जिससे दर्शक अचंभित रहें या यूं कहें कि इसमें कोई खास नयापन नहीं है. फिल्म में इंडियन हीरो है इसलिए इसमें डांस नंबर भी है, मगर वो बहुत दमदार नहीं है. इस फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है 2.5 स्टार्स.


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