प्रवासी मजदूरों को हो रही परेशानियों पर TV एक्ट्रेस ने किया Tweet बोलीं- 42 दिन बाद भी कोई प्लान और नियम नहीं

कृतिका कामरा (Kritika Kamra) ने प्रवासी मजदूरों को हो रही परेशानियों को लेकर ट्वीट किया है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

प्रवासी मजदूरों को हो रही परेशानियों पर TV एक्ट्रेस ने किया Tweet बोलीं- 42 दिन बाद भी कोई प्लान और नियम नहीं

कृतिका कामरा (Kritika Kamra) ने प्रवासी मजदूरों को हो रही परेशानियों पर किया ट्वीट

खास बातें

  • कृतिका कामरा ने प्रवासी मजदूरों को हो रही परेशानियों पर किया ट्वीट
  • एक्ट्रेस ने कहा कि 42 दिनों बाद भी कोई व्यवस्था नहीं है
  • कृतिका कामरा का ट्वीट हुआ वायरल
नई दिल्ली:

कोरोना (Coronavirus) के कहर के बीच सरकार ने लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिया है. वहीं, प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए सरकार ने विशेष ट्रेन चलाने की व्यवस्था की है, लेकिन केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने प्रवासियों के लिए भुगतान करने से इंकार कर रहे हैं. इस बात को लेकर टीवी से बॉलीवुड में कदम रखने वाली कृतिका कामरा (Kritika Kamra) ने ट्वीट किया है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. कृतिका कामरा ने अपने ट्वीट में लिखा कि 42 दिनों बाद भी कोई नियम, कोई प्लान, कोई को-ओर्डिनेशन नहीं है. इसके साथ ही एक्ट्रेस ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के लिए यह बुरा सपना अभी भी जारी है. 

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कृतिका कामरा (Kritika Kamra) का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है, साथ ही लोग इसपर जमकर कमेंट भी कर रहे हैं. अपने ट्वीट में कृतिका कामरा ने लिखा, "प्रवासी मजदूरों के लिए यह बुरा सपना अभी भी जारी है. कई रिपोर्ट्स बता रही हैं कि मजदूरों को उनकी टिकट के लिए खुद ही भुगतान करना पड़ रहा है. मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है और पलायन भी करना पड़ रहा है. 42 दिनों बाद भी कोई समन्वय नहीं, नियमों की कोई स्पष्टता नहीं है और कोई भी योजना नहीं है. अत्यधिक अराजकता, जो अपमान को चोट से जोड़ती है." 

बता दें कि कृतिका कामरा (Kritika Kamra) अपने विचारों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अकसर समसामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय पेश करती हैं. वहीं, प्रवासी मजदूरों की बात करें तो बीते दिन केरल के एर्नाकुलम से एक स्पेशल ट्रेन बरौनी जंक्शन पहुंची, जिसमें 32 जिलों के 1200 से ज्यादा मजदूर सवाल थे. इस सफर के बारे में खुद मजदूरों ने बताया कि प्रशासन द्वारा उनका कोई ख्याल नहीं रखा गया था. साथ ही खाने-पीने की भी कोई व्यवस्था नहीं थी. मजदूरों ने बताया कि एर्नाकुलम से बरौनी आने के लिए उन्हें 1,040 रुपये की राशि भुगतान करनी पड़ी है.