बजट 2019 : ध्यान राहत के बजाय वृद्धि पर केंद्रित, उद्योग जगत की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं

उद्योगपतियों ने कहा है कि यह बजट राहत देने वाला नहीं बल्कि आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित, एग्रीकल्चर में इनवेस्ट करने का कोई ऐलान नहीं

बजट 2019 :  ध्यान राहत के बजाय वृद्धि पर केंद्रित, उद्योग जगत की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं

बजट 2019-20 पर उद्यमियों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं.

खास बातें

  • वित्त मंत्री को हैल्थ बजट 1.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 फीसदी करना होगा
  • बजट में साफ हुआ कि अगले पांच साल में क्या होगा सरकार का विजन
  • फूड सेक्टर, निर्यात और रोजगार सृजन पर कुछ ज्यादा नहीं
नई दिल्ली:

उद्योग जगत ने बजट 2019 पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं. उद्योगपतियों ने कहा है कि यह बजट राहत देने वाला नहीं बल्कि आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित है. कार्पोरेट जगत को इस बजट में कुछ हासिल नहीं हुआ है.

मेदांता के चेयरमैन नरेश त्रेहान ने NDTV से कहा कि वित्त मंत्री को हैल्थ बजट 1.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 फीसदी करना होगा. आयुष्मान भारत को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए फंड बढ़ाना होगा. आयुष्मान भारत से 50 लाख से 90 लाख तक नौकरियों का सृजन हो सकता है.

हीरो फ्यूचर एनर्जीस के चैयरमैन और एमडी राहुल मुंजाल ने NDTV से कहा कि यह समय कर राहत का नहीं है, यह समय ग्रोथ पर फोकस करने का है. वित्त मंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर में फंडिंग बढ़ाने के लिए बैंक की रिफाइनेंसिंग से लेकर  NBFCs पर भी फोकस किया है. इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ग्रोथ होगी.

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हीरो इंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील कांत मुंजाल ने NDTV से कहा कि कुल मिलाकर वित्त मंत्री ने बताया है कि ग्रामीण और शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने, महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच साल में सरकार का क्या विजन होगा.  

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रसना के चेयरमैन पिरुज खंभात ने NDTV से कहा कि बजट में कई मिसिंग लिंक हैं. प्रधानमंत्री ने कहा था कि कॉर्पोरेट को एग्रीकल्चर में इनवेस्ट करना चाहिए, लेकिन इस बारे में कोई ऐलान नहीं हुआ. यह बात अधूरी रह गई. फूड सेक्टर, निर्यात और रोजगार सृजन पर कुछ ज्यादा नहीं है.

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कर विशेषज्ञ अमित राणा ने NDTV से कहा कि उच्च आय वर्ग पर टैक्स सरचार्ज बढ़ाया गया है जिससे सरकार को अतिरिक्त फंड मिल सके. पिछले कुछ सालों में लोगों की आय काफी बढ़ी है. लेकिन कार्पोरेट टैक्स का फायदा छोटी कंपनियों को नहीं मिलेगा. बड़े कॉर्पोरेट को अब भी उच्च कार्पोरेट टैक्स देना होगा.

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