NDTV से बोले मुख्य आर्थिक सलाहकार, सरकार को रिटायरमेंट की उम्र बढ़ानी चाहिए क्योंकि...

एनडीटीवी से खास बातचीत में केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि हमें सबसे ज्यादा ध्यान अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने पर देना होगा.

खास बातें

  • मुख्य आर्थिक सलाहकार ने एनडीटीवी से की खास बातचीत
  • कहा- 8 प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य लेकर चलना होगा
  • रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का भी दिया सुझाव
नई दिल्ली :

मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लिए हमें 8 प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना होगा. एनडीटीवी से खास बातचीत में केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि हमें सबसे ज्यादा ध्यान अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने पर देना होगा. उन्होंने कहा कि सरकारी को रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने पर विचार करना चाहिए क्योंकि देश में लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ती जा रही है. सुब्रमण्यन ने कहा कि ईमानदार करदाताओं को इंसेंटिव देना जरूरी है. उनके नाम पर एयरपोर्ट का नाम रखने जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए. आपको बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का आईना तथा चुनौतियों को रेखांकित करने वाली आर्थिक समीक्षा गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में पेश कर दिया है. राज्यसभा के बाद इसे लोकसभा में भी पेश कर दिया गया है. 

Newsbeep

Economic Survey Live Updates: आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 को संसद में किया गया पेश

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


इसमें कहा गया कि वर्ष 2025 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को आठ फीसदी की वृद्धि दर बरकरार रखनी होगी. वित्तवर्ष 2019 के दौरान सामान्य वित्तीय घाटा 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्तवर्ष 2018 के दौरान 6.4 फीसदी था. आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19: वर्ष 2019-20 के दौरान तेल की कीमतों में गिरावट की भी संभावना है. कृषि क्षेत्र में धीमापन से ग्रोथ पर दबाव के साथ खाद्य उत्पाद कीमतें गिरने से उत्पादन में कमी के आसार हैं. विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार बना रहेगा. इसके अनुसार, 14 जून तक विदेशी मुद्रा भंडार 42220 करोड रुपया रहा है. इससे पहले बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को हर हाल में संसद में उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे. आर्थिक सर्वे मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने तैयार की है और इसमें दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते में देश के समक्ष चुनौतियों को रेखांकित किये जाने की संभावना है.