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कुछ कल्पवासियों को निराकार तो कुछ को साकार नज़र आया अंतरिम बजट

प्रयागराज के कुंभ में कल्पवासी एक महीने तक गंगा के किनारे जप तप और साधना में लगे रहते हैं.

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कुछ कल्पवासियों को निराकार तो कुछ को साकार नज़र आया अंतरिम बजट

कुंभ में भी लोग बजट देखते नजर आए.

प्रयागराज :

प्रयागराज के कुंभ में कल्पवासी एक महीने तक गंगा के किनारे जप तप और साधना में लगे रहते हैं. जिससे धर्म की नगरी में हर तरफ अध्यात्म नज़र आता है, लेकिन यहां रहने वाले लोग सांसारिक होते हैं. लिहाजा सांसारिक दुनिया से अलग कैसे हो सकते हैं. इसी वजह से बजट के दिन भजन पूजन के बाद कल्पवास कर रहे लोग मोबाईल पर अंतरिम बजट देखते नज़र आये. कई लोगों के लिये ये बजट निराकार ब्रम्ह की तरह लगा तो कई को अपने अपने तरीके से साकार नज़र आया. प्रयाग के तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल के कैम्प में सुबह स्नान ध्यान करने के बाद संत कबीर नगर के किसान राम और नौकरी से रिटायर अयोध्या के तेज बहादुर जो, पिछले दस वर्षो से कल्पवास कर रहे हैं. दोनों अपने दैनिक काम ख़त्म कर बजट देखने में जुट गये. हालांकि बजट सुनने के बाद दोनों की राय जुदा जुदा नज़र आई. तेज बहादुर जहां संतुष्ट नज़र आये, तो वहीं किसान राम ने इसे सिर्फ चुनावी झुनझुना कहा. उनके मुताबिक बजट खाली फुसलाने के लिए है. 2 एकड़ के छह हज़ार रुपये देंगे और जो 2 एकड़ से ऊपर है वे क्या करेंगे? वे कहते हैं कि ये एकदम चुनावी बजट है.

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आपको बता दें कि तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल और उनके बेटे ने अपने यहां रुके कल्पवासियों के लिये पूजा-पाठ के अलावा उनकी मांग पर अपने मोबाईल से बजट दिखाने की व्यवस्था की और खुद भी बजट देखा. राज्य सरकार की नौकरी कर रहे राजेंद्र पालीवाल भी इस बजट को सिर्फ एक मनमोहक घोषणा मानते हैं. वे कहते हैं कि सरकार ने घोषणा की है कि 3 हज़ार रुपये पेंशन देंगे. जिनको पेंशन देना चाहिये साठ साल तक उनका पेंशन बंद कर दिया और उन लोगों को पेंशन देने की बात कर रहे हैं जिसका कोई मतलब नहीं है. जिन कर्मचारियों का 2005 से पेंशन बंद है पहले उनको पेंशन दें.  

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कल्पवासी गाटा में ही गेरुवा वस्त्र पहने तखत पर ध्यान लगाये गोरखपुर के रविंद्र नाथ शुक्ल भी थे. जिनको ये बजट निराकार ब्रम्ह की तरह नज़र आया, जो कभी काग़ज़ से जमीं पर उतरता ही नहीं. वे कहते हैं कि बहुत योजनाएं आती हैं. सांसद और विधायक आ कर देखें कि क्या वे ज़मीन पर उतर पाती हैं. हालांकि सभी को ये बजट निराकार ब्रम्ह की तरह नज़र नहीं आया बल्कि अपने अपने तरह से ज़्यादातार लोगों को साकार नज़र आया. इसी कैंप में गायत्री का प्रचार कर रहे कुछ लोग पहुंचे तो प्रचार बंद कर बजट देखने लगे. इनको बजट दिखा रहे रविंद्र पालीवाल दिव्यांग हैं, लिहाजा उन्होंने अपने नजरिये से इस बजट की व्याख्या की. वे कहते हैं कि रेल मंत्रालय दिव्यांगों को जो छूट देता है, उसकी टिकट दर लगातार बढ़ती जा रही है. दिव्यांगों को पूरी तरह से छूट और अटेंडेंट का किराया 25 प्रतिशत कर देना चाहिये.  

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