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2019 आम चुनाव : 'मोदी केयर' के बाद इस घोषणा से लोगों का दिल जीतने की तैयारी में मोदी सरकार

इस योजना के तहत 50 करोड़ से ज्यादा वेतनभोगियों को सरकार की ओर से पेंशन, मेडिकल कवर समेत कुछ सुविधाएं मुहैया कराएगी.

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2019 आम चुनाव : 'मोदी केयर' के बाद इस घोषणा से लोगों का दिल जीतने की तैयारी में मोदी सरकार

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी' से जुड़े श्रम मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत 50 करोड़ से ज्यादा वेतनभोगियों को सरकार की ओर से पेंशन, मेडिकल कवर समेत कुछ सुविधाएं मुहैया कराएगी. इस योजना में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोग भी शामिल किए जाएंगे. श्रम मंत्रालय इस योजना को 2019 के चुनाव से पहले लागू करना चाहता है. दो लाख करोड़ रुपये की इस योजना पर वित्त मंत्रालय और श्रम मंत्रालय काम कर रहे हैं. इस योजना में देश के कुल कामगारों का 40% हिस्सा शामिल होगा. वहीं बाकी के 60% लोग इस स्कीम से आंशिक रूप से जुड़ सकते हैं.

बताया जा रहा है कि इस स्कीम के तहत पेंशन, मैटरनिटी कवर के साथ-साथ मेडिकल, बीमारी और बेरोजगारी भी कवर होगी. एक बैठक में श्रम मंत्रालय ने यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी कोड पर एक प्रेजेंटेशन भी दी है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय भी इस विचार पर सहमत हुआ है.

देश के 50 करोड़ नागरिकों को हेल्थ इंश्योरेन्स की सुविधा देने के लिए तैयार मोदीकेयर के एलान के बाद अब मोदी सरकार ने 10 करोड़ गरीब मज़दूरों तक सामाजिक सुरक्षा की सुविधा पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस पर सालाना एक लाख करोड़ से ज़्यादा के खर्च का प्रस्ताव है. गरीबी रेखा से नीचे के तकरीबन 10 करोड़ गरीब मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा की सुविधा पहुंचाने के लिए नई सामाजिक सुरक्षा योजना लाने की तैयारी हो रही है. एनडीटीवी के पास नई पॉलिसी का ड्राफ्ट है जिसमें 10 करोड़ गरीब मज़दूरों को पेंशन, बेरोज़गारी भत्ता, मैटरनिटी बेनिफिट से लेकर मेडिकल और ग्रुप इन्श्योरेंस की सुविधा देने का प्रस्ताव है. इसे 'लेबर कोड ऑन सोशल सिक्यूरिटी' नाम के कानून के ज़रिये पूरे देश में लागू करने की तैयारी है.

श्रम मंत्रालय की इस नई पॉलिसी के तहत हर राज्य में सोशल सिक्योरिटी फंड बनेगा. इसके ज़रिए पेंशन, मेडिकल सुविधा, मैटरनिटी सुविधा, बेरोज़गारी भत्ता, सिक्नेस बेनेफिट, डिसेबलमेन्ट बेनेफिट, इनवेलेडिटी बेनेफिट, डिपेनडेन्ट्स बेनेफिट, प्रोविडेन्ट फंड की सुविधा और ग्रुप इंश्योरेन्स बेनेफिट जैसी 10 बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं की योजना हर BPL मज़दूर और उसके परिवार तक पहुंचाने का प्रस्ताव है.

इसमें एक ग्रेच्युटी फंड भी बनाया जाएगा. इस नई सामाजिक सुरक्षा योजना का फायदा दस करोड़ गरीब मज़दूरों तक पहुंचाने पर हर साल 1 लाख 20 हज़ार करोड़ तक के खर्च का अनुमान है.

श्रम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिए सुझाव में कहा कि इस स्कीम को धीरे-धीरे लागू किया जाना चाहिए. सबसे पहले इस योजना के तहत गरीब तबके के लोगों को कवर किया जाना चाहिए. ऐसा करने पर मंत्रालय को योजना की शुरुआत में कम पैसों की जरूरत पड़ेगी.

इसके बाद इस स्कीम को यूनिवर्सल बनाने के लिए फंड आवंटन अगले 5 से 10 सालों में बढ़ाया जा सकता है. लेबर मिनिस्ट्री ने इस स्कीम को व्यापक रखने की बात कही है, जिससे हेल्थ, रियार्मेंट, वृद्धा अवस्था, बेरोजगारी और मैटरनिटी आदि को 50 करोड़ कामगरों तक पहुंचाया जा सके.

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बता दें कि नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के बाद सरकार की ये दूसरी सबसे बड़ी स्कीम है. इससे पहले सरकार ने 'नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम' का ऐलान 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए किया था. जिसके तहत प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपए का हेल्थ कवर देने की योजना है.

 


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