एयर इंडिया के पायलटों ने कहा - निजीकरण का स्वागत है लेकिन....

एयर इंडिया के पायलट भी राष्ट्रीय एयरलाइन के निजीकरण के प्रस्ताव के पक्ष में आ गए है लेकिन उन्होंने एक शर्त के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही हैं.

एयर इंडिया के पायलटों ने कहा - निजीकरण का स्वागत है लेकिन....

वित्त मंत्री अरुण जेटली पहले ही दे चुके हैं एयर इंडिया को निजी हाथों में सौंपने की सलाह...

खास बातें

  • एयर इंडिया के पायलट भी राष्ट्रीय एयरलाइन के निजीकरण के पक्ष में
  • एक शर्त के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही
  • 50000 करोड़ के घाटे में है एयर इंडिया, हालत खस्ता
नई दिल्ली:

एयर इंडिया के पायलट भी राष्ट्रीय एयरलाइन के निजीकरण के प्रस्ताव के पक्ष में आ गए है लेकिन उन्होंने एक शर्त के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही हैं. पायलटों का कहना है कि पहले उनके वेतन के बकाये का भुगतान होना चाहिए. गंभीर वित्तीय संकट की वजह से एयर इंडिया ने 2012 में वेतन में कटौती का रास्ता अख्तियार किया था. उसके बाद से एयरलाइन के कर्मचारियों का बकाया वेतन बढ़ता जा रहा है. हालांकि कर्मचारियों के एक वर्ग ने संशोधित वेतनमान को स्वीकार कर लिया है. गौरतलब है कि एयर इंडिया को लेकर नीति आयोग से लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली तक निजीकरण करने की सलाह दे चुके हैं. अरुण जेटली ने तो यहां तक कह दिया था कि एयर इंडिया को जितनी जल्दी बेच दिया जाए उतना ही बेहतर होगा.

एयरलाइन के एक वरिष्ठ पायलट के अनुसार एयर इंडिया के करीब 27,000 कर्मचारियों को बकाया का भुगतान किया जाना है. इसमें पायलट और केबिन क्रू सदस्य शामिल हैं. कुल बकाया वेतन करीब 1,200 करोड़ रुपये है जिसमें से 400 करोड़ रुपये अकेले पायलटों का बकाया है. करीब दो साल पहले अश्विनी लोहानी ने एयर इंडिया के प्रमुख का पद संभाला था. उस समय उन्होंने आश्वावन दिया था कि सभी बकाया का भुगतान चरणबद्ध तरीके से कर दिया जाएगा.

अब जबकि सरकार एयरलाइन के पुनरुद्धार के लिए निजीकरण और अन्य उपायों पर विचार कर रही है, तो पायलट चाहते हैं कि इस बारे में कोई फैसला होने से पहले उनके बकाया का भुगतान किया जाए. इंडियन पायलट्स गिल्ड के एक प्रतिनिधि ने कहा, "हम एयर इंडिया के निजीकरण का इंतजार कर रहे हैं. यह काफी अच्छी खबर है. हमें उम्मीद है कि एयरलाइन की बागडोर पेशेवर प्रबंधन संभालेगा. हम ऐसे वातावरण में काम करना चाहते हैं जिसमें सरकार का हस्तक्षेप कम से कम हो." उन्होंने कहा कि निजीकरण से पहले हमारे बकाया का भुगतान किया जाना चाहिए.

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गिल्ड में बड़े आकार के विमानों के पायलट भी शामिल हैं. गिल्ड के सदस्यों की संख्या 500 है. इसी तरह की राय जताते हुए इंडियन कमशर्यिल पायलट एसोसिएशन (आईसीपीए) के प्रतिनिधि ने कहा कि पेशेवर प्रबंधन से एयरलाइन के पुनरुद्धार में मदद मिलेगी." यदि एयर इंडिया का निजीकरण होता है तो हम अपने बकाये का मुद्दा उठाएंगे.

(इनपुट भाषा से भी)