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'बिना जांच के 408 करोड़ रुपये का गोला-बारूद बेकार घोषित किया गया'

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'बिना जांच के 408 करोड़ रुपये का गोला-बारूद बेकार घोषित किया गया'

खास बातें

  1. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा है कि स्वदेशी डिजाइन से तैयार 408.06 करोड़ रुपये मूल्य का गोला-बारूद बिना आंतरिक सर्वेक्षण किए बेकार घोषित कर दिया गया।
नई दिल्ली: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि स्वदेशी डिजाइन से तैयार 408.06 करोड़ रुपये मूल्य का गोला-बारूद बिना आंतरिक सर्वेक्षण किए बेकार घोषित कर दिया गया।

थल सेना एवं आयुध फैक्टरी पर संसद में गुरुवार को पेश कैग रिपोर्ट के अनुसार, स्वदेशी गोला बारूद को इस तरह से अनुपयोगी घोषित करने के कारण सेना की मांग को पूरा करने के लिए 278.88 करोड़ रुपये का गोला बारूद आयात किया गया।

कैग ने कहा कि हमारी जांच में यह बात आई है कि रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय दक्षिणी कमान द्वारा 2009.10 में गोला बारूद के भंडार के निरीक्षण के आधार पर 1,35,608 गोलों को अनुपयोगी घोषित कर दिया गया। 408.06 करोड़ रुपये मूल्य का गोला बारूद 10 वर्ष की निर्धारित उपयोग अवधि को पूरा नहीं कर पाए थे।

सेना ने दोषों का कारण अनुपयुक्त गुणवत्ता नियंत्रण बताया जबकि आयुध फैक्टरी ने डिजाइन में कमी की ओर इशरा किया। गोला बारूद का डिजाइन बनाने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कहा कि अगर गोला बारूद में डिजाइन दोष था तब 1997-2005 के दौरान निर्मित एवं आपूर्ति किए गए गोला-बारूद और 2009-10 के दौरान दक्षिणी कमान को मिले गोला-बारूद में एक समान दोष प्रमाणित होने चाहिए थे।

रिपोर्ट के अनुसार इस बारे में आयुध निदेशालय, महानिदेशक गुणवत्ता आश्वासन और डीआरडीओ को मिलाकर एक कार्यदल भी गठित किया गया। कार्यबल ने सिफारिश की कि गोला-बारूद उपयोग लायक नहीं है।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत गोला बारूद में दोषों का कारण सुनिश्चित करने तथा पिछले दो वर्ष के दौरान ऐसी विफलताओं के लिए कोई गंभीर जांच नहीं की गई। हालांकि गत वषरे में इसी तरह के गोला बारूदों में ऐसी ही कमियों के संकेत के बाद 607.43 करोड़ रुपये के गोला बारूदों को छांट दिया गया। इसका उल्लेख कैग के 2003, 2005 और 2010-11 के प्रतिवेदनों में किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सम्पूर्ण गोला-बारूद के एक बड़े भाग (408.06 करोड़ रुपये मूल्य के गोले) की जांच के संबंध में सेना द्वारा की गई घोषणा की सम्पूर्णता और निष्पक्षता पर शंका उत्पन्न होती है।’’

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कैग ने कहा कि जिस आधार पर गोला-बारूद को अनुपयोगी घोषित किया गया, उन दोषों की प्रकृति एवं स्रोतों के बारे में विचारों की भिन्नता को दूर करने में मंत्रालय की विफलता आयुध निदेशालय, महानिदेशक गुणता आश्वासन और डीआरडीओ में कमियों की ओर इशारा करती है।

रिपोर्ट के अनुसार गोला बारूद की गंभीर कमियों के बाद रूस के मेसर्स रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के साथ अनुबंध के तहत 278.88 करोड़ रुपये का गोला-बारूद आयात किया गया।


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