'रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ाने के उपाय करे'

खास बातें

  • एसोचैम ने मौद्रिक नीति में और सख्ती लाने के प्रति आगाह करते हुए रिजर्व बैंक से कहा कि उसे नकदी बढ़ाने के उपाय करने चाहिए।
नई दिल्ली:

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने बढ़ती मुद्रास्फीति पर चिंता व्यक्त की है लेकिन मौद्रिक नीति में और सख्ती लाने के प्रति आगाह करते हुए रिजर्व बैंक से कहा कि उसे नकदी बढ़ाने के उपाय करने चाहिए। एसोचैम की प्रबंधन समिति ने कहा है कि बढ़ती मुद्रास्फीति चिंता का विषय है लेकिन मौद्रिक नीति में सख्ती का इसका निदान नहीं है। केन्द्रीय बैंक को उद्योगों तथा अन्य वर्गों की ऋण जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ानी चाहिए। एसोचैम ने केन्द्रीय बैंक से नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को आधा प्रतिशत बढ़ाने का आग्रह किया है। इस समय बैंकों की सीआरआर दर छह प्रतिशत है। रिजर्व बैंक ने पिछले पूरे साल में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए छह बार बैंकों के रेपो और रिवर्स रेपो दर में वृद्धि की जबकि दो बार सीआरआर को बढ़ाया। बावजूद इसके सकल मुद्रास्फीति में दिसंबर 2010 माह में 8.43 प्रतिशत पर और एक जनवरी को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 16.91 प्रतिशत रही है। एसोचैम अध्यक्ष दिलीप मोदी की अध्यक्षता में हुई प्रबंधन समिति की बैठक में इस मुद्दे पर सभी की सहमति थी कि नौ प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए नकदी की काफी जरूरत होगी। समिति का मानना है कि ढांचागत क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए सस्ती दरों पर धन की जरूरत होगी। बैंकों ने पहले ही रिजर्व बैंक से सीआरआर और एसएलआर दरों में कमी लाने की गुहार लगाई है। बैंक अधिक कर्ज मांग और जमा पूंजी में हल्की वृद्धि की स्थिति का सामना कर रहे हैं। एसोचैम अध्यक्ष ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि की चुनौतियों के मद्देनजर रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति में सख्ती से दूर रहना चाहिए।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com