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विजय माल्या के किंगफिशर हाउस, गोवा विला को फिर नहीं मिला कोई खरीदार

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विजय माल्या के किंगफिशर हाउस, गोवा विला को फिर नहीं मिला कोई खरीदार

खास बातें

  1. दोनों संपत्तियों के लिए आरक्षित मूल्य में 10% की कटौती की गई थी
  2. किंगफिशर हाउस फिलहाल SBI के नेतृत्ववाली कंसोर्टियम के कब्जे में है
  3. बैंकों को एयरलाइन से हजारों करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली करनी है
मुंबई : विजय माल्या की दो आलीशान संपत्तियों के लिए सोमवार को भी कोई खरीदार सामने नहीं आया. यहां किंगफिशर हाउस तथा गोवा में किंगफिशर विला को एक बार फिर से नीलामी के लिए रखा गया था, लेकिन यह विफल रही. इनके लिए एक भी बोली नहीं आई. भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले 17 बैंकों के गठजोड़ ने दोनों संपत्तियों के लिए आरक्षित मूल्य में 10 प्रतिशत की कटौती की थी.

विलेपार्ले में किंगफिशर हाउस की जगह 17,000 वर्ग फुट के करीब है और हवाई अड्डे के पास होने की वजह से पहली नीलामी में रिजर्व कीमत 150 करोड़ के करीब रखी गई थी. लेकिन कोई खरीददार नहीं मिलने पर दूसरी नीलामी के लिए कीमत घटाकर 135 करोड़ कर दी गई थी. इसके बावजूद नीलामी में हिस्सा लेने एक भी खरीददार नहीं आया था. किंगफिशर हाउस वर्तमान में एसबीआई के नेतृत्ववाली कंसोर्टियम के कब्जे में है. कंसोर्टियम किंगफिशर हाउस बेच कर कर्ज के तौर पर दी गई अपनी रकम वसूल करने की कोशिश में जुटा है.

बैंकों के गठजोड़ को एयरलाइन से हजारों करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली करनी है. यह एयरलाइन 2012 में खस्ता वित्तीय हाल के बाद बंद हो गई थी. किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्ववर्ती मुख्यालय किंगफिशर हाउस के लिए आरक्षित मूल्य 103.5 करोड़ रुपये रखा गया था, जबकि गोवा की किंगफिशर विला के लिए यह 73 करोड़ रुपये था.

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माल्या करीब एक साल से ब्रिटेन में हैं. भारत में उनके खिलाफ समन जारी किए जा चुके हैं, लेकिन वह यहां पेश नहीं हुए. कई बैंकों ने उनके खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू की है. वहीं कुछ बैंकों ने माल्या को जानबूझकर चूक करने वाला यानी विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है. पिछले सप्ताह माल्या ने कई ट्वीट कर कहा था कि किंगफिशर एयरलाइंस के विफल होने की वजह खराब इंजन थे.

यह चौथा मौका है, जबकि किंगफिशर हाउस की नीलामी विफल हुई है. वहीं तीसरी बार किंगफिशर विला को कोई खरीदार नहीं मिल पाया. बैंकों की ओर से इन दोनों संपत्तियों की नीलामी एसबीआई कैप ट्रस्टी ने आयोजित की थी. माल्या पर एसबीआई, पीएनबी, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक, फेडरल बैंक और एक्सिस बैंक जैसे ऋणदाताओं को 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है.
(इनपुट एजेंसी से)


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