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50 हजार रुपए से अधिक नकदी लेनेदेन पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई फैसला नहीं : सरकार

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50 हजार रुपए से अधिक नकदी लेनेदेन पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई फैसला नहीं : सरकार

50 हजार रु से अधिक नकदी लेनेदेन पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई फैसला नहीं (प्रतीकात्मक फोटो)

खास बातें

  1. 50 हजार रु से ज्यादा नकदी के लेनदेन पर टैक्स पर सरकार ने फैसला नहीं लिया
  2. सरकार विचार करने के बाद ही फैसला करेगी
  3. दरअसल मुख्यमंत्रियों की समिति ने इस तरह की सिफारिश की है
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पचास हजार रुपए से ज्यादा नकदी के लेनदेन पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने वाली चंद्रबाबू नायडू समिति ने कई सिफ़ारिशें की हैं जिन पर सरकार विचार करने के बाद ही फैसला करेगी. पचास हजार रुपए से ज्यादा नकदी का लेनदेन करने वालों को फ़िलहाल परेशान होने की जरूरत नहीं. सरकार इस पर अभी बैंकिंग कैश ट्रांजेक्शन टैक्स लगाने नहीं जा रही. ऐसा करने की सिफारिश डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उपाय सुझाने वाली कमेटी ने की थी जिसके अध्यक्ष आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हैं.

सरकार का कहना है कि समिति ने कई सुझाव दिए हैं जिन पर विचार-विमर्श के बाद ही फैसला होगा. नायडू की अध्यक्षता में ये समिति नोटबंदी के बाद बनाई गई थी और इसने अपनी अंतरिम रिपोर्ट मंगलवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी.


इसमें सिफारिश की गई है कि-

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-क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंकों द्वारा लिए जाने वाले टैक्स यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को खत्म किया जाए
- छोटे कारोबारियों और आयकर न देने वालों को स्मार्टफ़ोन ख़रीदने में 1000 रुपए की सहायता दी जाए
- आय के तय अनुपात में डिजीटल भुगतान करने वाले ग्राहकों को कर वापसी
 -माइक्रो एटीएम और बायोमैट्रिक सेंसर लगाने वालों को आर्थिक सहायता दी जाए

चंद्रबाबू नायडू ने उम्मीद जताई है कि एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में इन सिफ़ारिशों को शामिल किया जाएगा. समिति ने कहा है कि डिजिटल भुगतान के मामले में भारत दूसरे देशों के मुक़ाबले बहुत पीछे है और अभी एक लंबा रास्ता तय करना है. ज्यादा नक़दी के लेनदेन पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव यूपीए सरकार भी लेकर आई थी मगर भारी विरोध के बाद उसे वापस करना पड़ा था. अब हालात बदले हुए हैं. सरकार का जोर डिजिटल लेनदेन पर है लेकिन सरकार ने जिस तरह आनन-फ़ानन में सफाई दी है उसे देख कर नहीं लगता कि सरकार जल्दबाज़ी में कोई कदम उठाएगी.



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