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पीएम के प्रधान सचिव की नियुक्ति का मामला : ट्राई संशोधन बिल लोकसभा में पास

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नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा की नियुक्ति से जुड़ा ट्राई संशोधन बिल सरकार ने आज लोकसभा में पास करा लिया। खास बात यह है कि सरकार विपक्ष की एकजुटता में सेंध लगाने में कामयाब रही।

कांग्रेस की सहयोगी एनसीपी के अलावा समाजवादी पार्टी, बीएसपी और तृणमूल कांग्रेस ने सरकार का इस बिल पर समर्थन किया। विरोध के तौर पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद सरकार ने आसानी से इसे पास करा लिया।

यह बिल कानून में जरूरी बदलाव कर नृपेंद मिश्रा की नियुक्ति पर जरूरी मुहर लगाने के लिए लाया गया है। टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कानून के तहत इसके पद से रिटायर हुआ शख्स सरकार में किसी पद पर नियुक्त नहीं हो सकता। नृपेंद 2006 से 2009 के बीच ट्राई के चैयरमेन रहे हैं। उनकी नियुक्ति में आ रही अड़चन को दूर करने के लिए ही मोदी सरकार ने कानून में बदलाव किया है।

इस बिल पर सरकार की असली परीक्षा राज्यसभा में होगी और साथ ही मोदी सरकार का पहला शक्ति परीक्षण होगा।
 
-राज्यसभा के मौजूदा 243 सदस्यों में से एनडीए के 60 और यूपीए के 79 सदस्य हैं।
-जेडीयू और लेफ्ट के 23 सांसद सरकार के खिलाफ हैं।
-इससे समूचे विपक्ष की संख्या 102 दिखती है, लेकिन यूपीए की सहयोगी एनसीपी के बाद अब समाजवादी पार्टी, तृणमूल और बीएसपी ने भी बिल का समर्थन करने का ऐलान किया है। साथ ही बीपीएफ का एक राज्यसभा सांसद भी सरकार के साथ है।
-ऐसे में एनडीए की ताकत बढ़कर 103 हो जाती है और विपक्ष की संख्या घटकर 95 हो जाती है।
-अगर 11 सदस्यों के साथ जयललिता चार सदस्यों वाली डीएमके आईएनएलडी जेडीएस और टीआरएस एनडीए का साथ दे तो बिल के समर्थन में 129 सांसद हो जाएंगे।
-अगर नौ निर्दलीय और कम से कम छह नॉमिनेटेड सदस्य सरकार का साथ देते हैं तो बिल के समर्थन में सांसदों की संख्या 144 और विरोधी सांसदों की संख्या 99 रह जाएगी।

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