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काम की खबर : जीएसटी रिटर्न फाइलिंग: 25 जून को आएगा एक्सेल शीट फॉर्मेट

जीएसटी नेटवर्क 25 जून को ऑफलाइन एक्सेल शीट का फॉर्मेट पेश करेगा. इसका उपयोग व्यापारी और कंपनियां जीएसटी पोर्टल पर बिक्री आंकड़ा अपलोड करने में कर सकेंगे.

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काम की खबर : जीएसटी रिटर्न फाइलिंग: 25 जून को आएगा एक्सेल शीट फॉर्मेट

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. जीएसटी नेटवर्क 25 जून को ऑफलाइन एक्सेल शीट का फॉर्मेट पेश करेगा.
  2. व्यापारी और कंपनियां जीएसटी पोर्टल पर बिक्री आंकड़ा अपलोड कर सकेंगे
  3. जीएसटी रिटर्न फॉर्म वेबसाइट पर जुलाई के मध्य तक डाला जाएगा
नई दिल्ली: जीएसटी नेटवर्क 25 जून को ऑफलाइन एक्सेल शीट का फॉर्मेट पेश करेगा. इसका उपयोग व्यापारी और कंपनियां जीएसटी पोर्टल पर बिक्री आंकड़ा अपलोड करने में कर सकेंगे. जीएसटी-नेटवर्क के चेयरमैन नवीन कुमार ने कहा कि सभी प्रकार के व्यापार/बिक्री के लिए जीएसटी रिटर्न फॉर्म जीएसटीएन वेबसाइट पर जुलाई के मध्य तक डाला जाएगा. जीएसटीएन नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधार है. ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि कारोबारी नए तरीके से अभ्यस्त हो सकें. 

जीएसटी कानून के तहत एक महीने में की गई सभी प्रकार की बिक्री या कारोबार के लिए रिटर्न अगले महीने की 10 तारीख तक भरना है. इसीलिए अगर जीएसटी एक जुलाई से लागू होता है, तो बिक्री आंकड़ा 10 अगस्त तक अपलोड करना है. 

कुमार ने बताया, हम 25 जून तक जीएसटीएन पोर्टल पर एक्सल शीट जारी करेंगे. इससे करदाताओं को उस प्रारूप के बारे में पता चलेगा जिसमें सूचना देनी है. एक्सल शीट में कंपनियों को इनवॉयस संख्या, खरीदार का जीएसटीआईएन, बेचे गए सामान या सेवाएं, वस्तुओं का मूल्य या बिक्री की गयी सेवाएं, कर प्रभाव तथा भुगतान किए गए कर जैसे लेन-देन का ब्योरा देना होगा. रिटर्न के बारे में कुमार ने कहा कि कंपिनयों को इसे अगस्त में फाइल करना होगा. उन्होंने कहा, "सभी फॉर्म तैयार किए जा चुके हैं. हम परिषद के निर्णय के अनुसार उसमें बदलाव को शामिल कर रहे हैं. हम रिटर्न फॉर्म जुलाई के मध्य में उपलब्ध कराएंगे." 

ईवे बिल सिस्टम बना सकता है एनआईसी 
जीएसटी परिषद राष्टीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) को ऐसी प्रणाली विकसित करने के लिए कह सकती है जो माल एवं सेवाकर (जीएसटी) प्रणाली के तहत माल की आवाजाही के लिए इलेक्टॉनिक बिलों को बना सके. एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के माल की राज्य के भीतर या अन्य राज्यों में आवाजाही के लिए पंजीकरण करवाना ही होगा. इसके लिए उद्योगों को कोई रियायत नहीं दी गई है. 

प्रारंभ में जीएसटी नेटवर्क को ई-वे बिल के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए कहा गया था लेकिन इस प्रक्रिया में छह माह का वक्त जाया होने की संभावना थी. जीएसटी नेटवर्क माल एवं सेवाकर के लिए सूचना प्रौद्योगिकी ढांचा सुविधा उपलब्ध कराएगा. अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए एनआईसी से बातचीत कर रहा है. 
(इनपुट भाषा से भी)
 


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