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उत्सर्जन नियमों के उल्लंघन के लिए फॉक्सवैगन पर दंडात्मक कार्रवाई पर विचार : केन्द्र

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उत्सर्जन नियमों के उल्लंघन के लिए फॉक्सवैगन पर दंडात्मक कार्रवाई पर विचार : केन्द्र

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को बुधवार को सूचित किया गया कि सरकार उत्सर्जन विनियमनों के उल्लंघन के लिए जर्मनी की कार कंपनी फॉक्सवैगन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने पर विचार कर रही है।

न्यायमूर्ति यूडी साल्वी की पीठ के समक्ष भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है, ‘‘मंत्रालय ने फॉक्सवैगन को भारत में वाहनों को वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था। निर्धारित समय सीमा के भीतर फाक्सवैगन ने सूचित किया कि वह भारत में सभी प्रभावित वाहनों को वापस मंगाएगी जिनकी अनुमानित संख्या 3.2 लाख है।’’

‘‘विनिर्माता द्वारा वाहनों को वापस मंगाने की घोषणा पर भारी उद्योग मंत्रालय ने दंडात्मक प्रावधानों की समीक्षा के लिए तत्काल इस मामले को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सुपुर्द कर दिया।’’ मंत्रालय ने एनजीटी को बताया कि उसने भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (एआरएआई) को यह पता लगाने का निर्देश दिया था कि क्या भारत में फॉक्सवैगन द्वारा विनिर्मित वाहनों में भी प्रदूष्ण जांच को ‘चकमा देने वाले उपकरण’ का इस्तेमाल किया गया था।

‘‘इस निर्देश के मुताबिक, एआरएआई ने प्रयोगशाला एवं सड़क पर आकलन किया और पाया कि प्रयोगशाला में किए गए उत्सर्जन परीक्षण सीमाओं की तुलना में सड़क पर नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन पांच से नौ गुना अधिक है। इन परिणामों के आधार पर मंत्रालय ने फॉक्सवैगन को भारत में वाहन वापस मंगाने की कवायद शुरू करने का निर्देश दिया था।’’

उल्लेखनीय है कि फॉक्सवैगन ग्रुप ने पिछले साल दिसंबर में भारत में 3,23,700 वाहनों को वापस मंगाने की घोषणा की थी जिसमें आडी, स्कोदा और फाक्सवैगन ब्रांड के वाहन शामिल हैं।


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