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वित्त मंत्री से मिला कैट का प्रतिनिधिमंडल, जीएसटी पर श्वेत पत्र किया जारी

जीएसटी के सरलीकरण और उसे युक्ति संगत बनाने के लिए  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी पर एक विस्तृत श्वेत पत्र तैयार किया है.

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वित्त मंत्री से मिला कैट का प्रतिनिधिमंडल, जीएसटी पर श्वेत पत्र किया जारी

कैट के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात.

नई दिल्ली :

जीएसटी के सरलीकरण और उसे युक्ति संगत बनाने के लिए  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी पर एक विस्तृत श्वेत पत्र तैयार किया है. कैट का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण से उनके कार्यालय में मिला और इस श्वेत पत्र को जारी किया गया. कैट प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में वित्त मंत्री से विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत भी की. खंडेलवाल ने वित्त मंत्री से जीएसटी के तहत विभिन्न कर स्लैब के तहत रखी गई वस्तुओं की समीक्षा करने का आग्रह किया, क्योंकि विभिन्न कर स्लैब में शामिल अनेक वस्तुएं एक-दूसरे पर ओवरलैप कर रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नीति के रूप में कच्चे माल की कर की दर तैयार माल की कर दर से अधिक नहीं होनी चाहिए. विभिन्न वस्तुएं जैसे ऑटो पार्ट्स, अल्यूमिनियम बर्तन आदि जो विलासिता की वस्तुएं नहीं हैं, इन्हें 28% कर स्लैब से निकाला जाना चाहिए और इन्हें कम कर स्लैब के तहत रखा जा सकता है.  

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प्रवीण खंडेलवाल ने वित्त मंत्री से फॉर्म जीएसटीआर 9 और 9 सी को सरल बनाने का भी आग्रह किया, क्योंकि यह फॉर्म विभिन्न प्रकार के विवरण मांगते है जो पहले कर प्रणाली में  निर्धारित नहीं थे और इसलिए व्यापारी इसका अनुपालन करने में असमर्थ हैं. खंडेलवाल ने कहा कि मूल घोषणा के अनुसार, गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को व्यापारियों को वित्त देने के लिए मुद्रा योजना में शामिल  किया जाना चाहिए और बैंकों को एनबीएफसी और एमएफआई को वित्त देने के लिए कहा जाना चाहिए. एनईएफटी और आरटीजीएस पर बैंक शुल्कों का छूट देने का स्वागत करते हुए  खंडेलवाल ने सुझाव दिया कि डिजिटल भुगतानों को अपनाने और स्वीकार करने को प्रोत्साहित करने के लिए, कार्ड से भुगतान पर लगाए गए बैंक शुल्क को सरकार द्वारा सीधे बैंकों को सब्सिडी के रूप में दिया जाए जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को कार्ड भुगतान लेनदेन पर  बैंक शुल्क का भार न पड़े.  

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उन्होंने वित्त मंत्री से प्रत्येक राज्य और केंद्र में जीएसटी लोकपाल गठित करने का भी आग्रह किया. वित्त मंत्री सीतारमण ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह कैट  द्वारा उठाए गए मुद्दों की ध्यानपूर्वक समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाएंगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का इरादा निश्चित रूप से कर प्रक्रिया को सरल बनाना है ताकि अधिक से अधिक लोग आसानी से उसका अनुपालन कर सकें. व्यापारी समुदाय राजस्व के संग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सरकार की कोशिश है कि व्यापारियों को किसी प्रकार की अनुचित कठिनाई का सामना न करना पड़े. दूसरी तरफ, वित्त मंत्री ने व्यापारियों से अपने मौजूदा व्यवसाय प्रारूप को आधुनिक रूप से तैयार कर समय पर कानूनी बाध्यताओं का पालन करने का आग्रह किया. आपको बता दें कि जीएसटी पर अपने श्वेत पत्र में कैट ने एडवांस रूलिंग, रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म, जीएसटी रिटर्न का सुधार, जीएसटी का भुगतान करने की देयता सहित कई मुद्दों को उठाया है.

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श्वेत पत्र में यह भी कहा गया है कि कर जमा कराने की जिम्मेदारी माल बेचने वाले पर होनी चाहिए और माल खरीदने वाले पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. इसके साथ-साथ सीजीएसटी एवं एसजीएसटी  के अधिकार क्षेत्र का स्पष्टीकरण होना चाहिए तथा एच एस एन कोड के बारे में भी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. कैट ने यह भी कहा है कि फॉर्म आईटीसी -04 का उन्मूलन हो तथा एक्सपायरी डेट की दवाओं की वापसी को भी सप्लाई माना जाना चाहिए. कैट ने अपने श्वेत पत्र में हार्डवेयर, मोबाइल कवर, खाद्य पदार्थ, ड्राई फ्रूट्स, आइसक्रीम, खाद्यान्न, माल्ट, अनाज आधारित खाद्य पदार्थों के पेय, पेंट, मार्बल , यूज्ड वाहन, दो पहिया वाहन, कृषि उपकरण, भुना हुआ चना, आदि को भी वर्तमान कर स्लैब से निकाल कर कम कर दर में रखने का आग्रह किया है. 



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