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औद्योगिक उत्पादन में फरवरी में 1.2 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा मुद्रास्फीति पांच महीने के उच्च स्तर पर

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औद्योगिक उत्पादन में फरवरी में 1.2 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा मुद्रास्फीति पांच महीने के उच्च स्तर पर

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्‍ली:

अर्थव्यवस्था को बुधवार को दोहरा झटका लगा. एक तरफ जहां औद्योगिक उत्पादन में फरवरी में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आयी वहीं खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.81 प्रतिशत हो गयी. इसको देखते हुए उद्योग जगत ने आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिये और सुधारों की वकालत की है. बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में औद्योगिक उत्पादन 1.2 प्रतिशत गिरा जो इस क्षेत्र का चार महीने का सबसे खराब प्रदर्शन है. आलोच्य माह में खास कर विनिर्माण इकाइयों और पूंजीगत तथा उपभोक्ता सामान क्षेत्र के उत्पादन में तेज गिरावट ने औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ा. फरवरी, 2016 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 1.99 प्रतिशत रही थी. साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मार्च महीने में पांच महीने के उच्च स्तर 3.81 प्रतिशत पर पहुंच गयी जो फरवरी में 3.65 प्रतिशत थी.

आईआईपी आंकड़ा के बारे में फिक्की अध्यक्ष पंकज पटेल ने कहा, ‘विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट यह संकेत देता है कि विनिर्माण में वृद्धि अभी भी नाजुक है और क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने में लिये लगातार प्रयास की जरूरत है.’ उन्होंने कहा कि सरकार को सुधार उपायों को जारी रखना चाहिए और इसे मजबूत बनाना चाहिए. फरवरी में औद्योगिक उत्पादन में गिरावट की प्रमुख वजह विनिर्माण क्षेत्र रहा. आईआईपी में 75 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र में माह के दौरान दो प्रतिशत की गिरावट आई. फरवरी, 2016 में इस क्षेत्र का उत्पादन 0.6 प्रतिशत बढ़ा था. फरवरी में पूंजीगत सामान क्षेत्र का उत्पादन 3.4 प्रतिशत घटा, जबकि इससे पिछले साल फरवरी महीने में यह 9.3 प्रतिशत घटा था.


इसी तरह कुल उपभोक्ता सामान उत्पादन फरवरी में 5.6 प्रतिशत घट गया, जबकि एक साल पहले समान महीने में यह 0.6 प्रतिशत बढ़ा था. गैर टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र के उत्पादन में माह के दौरान 8.5 प्रतिशत की गिरावट आई. एक साल पहले समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 4.9 प्रतिशत घटा था. माह के दौरान टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 0.9 प्रतिशत घट गया. पिछले साल फरवरी में इस क्षेत्र का उत्पादन 10.4 प्रतिशत बढ़ा था.

खुदरा मुद्रास्फीति को देखा जाए तो दूध, अंडा, खाद्य तेल, ईंधन एवं बिजली के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर 3.81 प्रतिशत पर पहुंच गयी. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में 3.65 प्रतिशत थी. हालांकि कुल मिलाकर खाद्य मुद्रास्फीति आलोच्य महीने में 1.93 प्रतिशत रही जो फरवरी में 2.01 प्रतिशत थी. दूध एवं दुग्ध उत्पादों तथा अंडा जैसे प्रोटीन युक्त खाने के सामान आलोच्य महीने में महंगे हुए और इनकी महंगाई दर क्रमश: 4.69 प्रतिशत प्रतिशत तथा 3.21 प्रतिशत रही. तैयार खाना, स्नैक और मिठाई की कीमतों में भी मार्च में सालाना आधार पर 5.65 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार हालांकि सब्जियों के दाम लगातार नीचे बने हुए हैं. इसके भाव इस बार मार्च महीने में एक साल पहले की तुलना में 7.24 प्रतिशत नीचे रहे. कुल मिलाकर खाद्य मुद्रास्फीति आलोच्य महीने में 1.93 प्रतिशत रही जो फरवरी में 2.01 प्रतिशत थी. ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई दर मार्च महीने में बढ़कर 5.56 प्रतिशत रही.

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रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार मार्च 2017 के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि सकारात्मक रूप से हैरान करने वाला है. रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति के पहली छमाही से दूसरी छमाही में वृद्धि के बारे में संकेत दिया था. यह बताता है कि उच्च मुद्रास्फीति से नीतिगत दरों में कमी की संभावना नहीं है. एसबीआई के आर्थिक शोध विभाग ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति के जुलाई तक 4 प्रतिशत का आंकड़ा पार करने की संभावना कम है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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