ई-धोखाधड़ी रोकने को अलग डिजिटल भुगतान कानून की जरूरत : सीएमएआई

ई-धोखाधड़ी रोकने को अलग डिजिटल भुगतान कानून की जरूरत : सीएमएआई

सीएमएआई के अध्यक्ष एनके गोयल

खास बातें

  • कैशलेस लेनदेन के लिए 20 लाख पीओएस मशीनों की जरुरत है
  • विदेशों से आ रही पीओएस मशीनों से डाटा चोरी होने का डर है
  • डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए भारत में नहीं है ठोस कानून
नई दिल्ली:

नोटबंदी के बाद कारोबार की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कारोबारी दुनिया में नकदी रहित लेनदेन यानी डिजिटल भुगतान में कई गुना का इजाफा हुआ है. कैशलेस कारोबार में बीते एक महीने में 300 फीसदी तक का उछाल आया है.

सूचना एवं तकनीकी के क्षेत्र में प्रमुख कम्युनिकेशन मल्टीमीडिया एन्ड इंफ्रास्ट्रक्चर (सीएमएआई) ने बढ़ते डिजिटलाइजेशन के दौर में डिजिटल अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से कहा है कि भारत को अलग डिजिटल भुगतान कानून तथा अदालतों के साथ उचित कानूनी ढांचे की जरूरत है.

बता दें कि सीएमएआई दूरसंचार, आईसीटी, साइबर सुरक्षा क्षेत्र की कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है.

सीएमएआई के अध्यक्ष एनके गोयल ने कहा कि डिजिटल लेनदेन के दौरान यदि उपभोक्ता को पैसे का नुकसान होता है तो उसके संरक्षण के लिए उचित कानूनी ढांचे की जरूरत है. अभी तक भारत में इस बारे में उचित कानून नहीं है.
प्वाइंट ऑफ सेल यानी पीओएस मशीनों के इस्तेमाल के बारे में गोयल ने कहा कि भारत में इस समय 20 लाख पीओएस की जरुरत है.

उन्होंने कहा कि कैशलेस अभियान को गति देने के लिए हम पूरी तरह पीओएस पर निर्भर नहीं रह सकते, क्योंकि इनके द्वारा समय-समय पर डाटा चोरी समेत अन्य धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहेंगे. इससे बचने के लिए भारत में ही तैयार पीओएस की जरुरत है.

उन्होंने बताया कि फिलहाल अमेरिका, यूरोप और चीन से ये मशीनें आ रही हैं. सरकार ने फिलहाल मार्च, 2017 तक बीआईएस लेवलिंग से विदेशों से आने वाली पोस मशीनों को छूट दे रखी है. इससे लोगों के डाटा चोरी होने की शंका बनी रहती है.

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एनके गोयल ने सरकार से मांग की कि कठोर डाटा सुरक्षा नियम, भारत में ही पोस मशीनों का निर्माण और जागरुकता जैसी बातों पर ध्यान देने की बहुत ज्यादा जरुरत है.

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