NDTV Khabar

काले धन के आकलन के लिए वित्त मंत्रालय का अध्ययन पूरा

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
नई दिल्ली:

भारतीयों के देश-विदेश में जमा काले धन के आकलन का काम वित्त मंत्रालय द्वारा अनुबंधित एक संस्थान ने करीब पूरा कर लिया है। मंत्रालय ने तीन साल पहले तीन संस्थाओं को इस काम के लिए अनुबंधित किया था।

वित्त मंत्रालय ने इस काम में तीन संस्थानों को लगाया था।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में हालांकि मंत्रालय ने यह जानकारी दी पर उसने इस अध्ययन रपट की प्रति देने से इनकार किया। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि यह रपट देने से संसद के विशेषाधिकार का हनन होगा।

मंत्रालय ने दिल्ली के राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी), नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) तथा राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एनआईएफएम), फरीदाबाद (हरियाणा) को काले धन का आकलन करने का काम सौंपा था। यह काम 18 माह के समय में पूरा किया जाना था।

वित्त मंत्रालय ने आरटीआई के तहत दी जानकारी में कहा है कि एक संस्थान से रिपोर्ट मिल गई है, जबकि दो अन्य संस्थानों से रिपोर्ट का इंतजार है। फिलहाल इस बारे में और जानकारी नहीं दी जा सकती और आरटीआई कानून, 2005 की धारा 8 (1)(सी) तथा 8(1)(ई) के तहत इस तरह की सूचना नहीं देने की सरकार को छूट है।

जवाब में यह भी कहा गया है कि सरकार को अभी इस रिपोर्ट का अध्ययन करना है और ऐसे में इस बारे में अभी इस पर हुई कार्रवाई को संसद के समक्ष नहीं रखा गया है।

आरटीआई कानून में प्रावधान है कि यह किसी सूचना को देने से संसद के विशेषाधिकार का हनन होता है तो उसको न दिया जाए। इस अध्ययन का आदेश मार्च, 2011 में दिया गया था। उस समय देश में काले धन के मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई थी। राजनीतिज्ञों व सामाजिक संगठनों के कुछ लोगों का अनुमान है कि कालेधन का आंकड़ा लाखों करोड़ रुपये में है। मंत्रालय ने कहा है कि इस समय सरकार के पास विदेशों में भारतीय के जमा काले धन के बारे में कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है। अलग-अलग अनुमानों के अनुसार विदेशों में जमा काला धन 500 अरब डॉलर से 1,400 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। ग्लोबल फाइनेंशियल इंटिग्रिटी के अनुमान के अनुसार विदेशों में जमा भारतीयों का काला धन 462 अरब डॉलर है।

मंत्रालय ने कहा है कि अभी तक देश और देश के बाहर जमा काले धन के बारे में कोई विश्वसनीय अनुमान नहीं है। काले धन के मुद्दे पर गरमागरम बहस छिड़ी हुई है और यह एक प्रमुख चुनावी मुद्दा है। अध्ययन के नियम व शर्तों के अनुसार इसमें बिना हिसाब किताब की आय व परिसंपत्ति के बारे में आकलन किया जाना था।

अध्ययन में यह पता लगाया जाना था कि अर्थव्यवस्था के किन क्षेत्रों में काला धन लगा है। इसमें यह भी पता लगाया जाना था कि काले धन के सृजन की परिस्थितियां क्या हैं।

टिप्पणियां


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement