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आयकर की धारा 80सी के बारे में जानें 5 बड़ी बातें

इसके अलावा कर्मचारियों का वेतन आदि सब आय से होता है. सरकार अपने नागरिकों पर आयकर के अलावा भी कई प्रकार के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स लगाती है

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आयकर की धारा 80सी के बारे में जानें 5 बड़ी बातें

आयकर नियमों में टैक्स छूट... 80 सी धारा.

नई दिल्ली:

देश की सरकार के पास आय के साधन के तौर पर कुछ मुख्य स्रोतों में एक आयकर भी होता है. आयकर से प्राप्त धन से सरकार लोगों के हितों के काम करती है. सब्सिडी देती है और विकास की परियोजनाओं में पैसे लगाती है. इसके अलावा कर्मचारियों का वेतन आदि सब आय से होता है. सरकार अपने नागरिकों पर आयकर के अलावा भी कई प्रकार के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स लगाती है. 

डायरेक्स टैक्स में आयकर भी आता है. हर साल के टैक्स के भरने की आखिरी तारीख के करीब आते ही आयकर की धारा 80सी खूब चर्चा में आ जाती है. क्या है धारा 80सी? वित्तीय वर्ष के अंत में इसकी क्यों ज्यादा चर्चा होती है? 

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समझें धारा 80सी को
आयकर की धारा 80सी दरअसल इनकम टैक्स एक्ट 1961 का हिस्सा है. इसमें उन निवेश माध्यमों का उल्लेख है, जिनमें निवेश कर आयकर में छूट का दावा किया जा सकता है. कई लोग वित्त वर्ष खत्म होने से पहले टैक्स बचाने के लिए निवेश करना शुरू करते हैं, जिससे साल के आखिरी महीनों में धारा 80सी ज्यादा चर्चा में रहती है.


आयकर की धारा 80सी के बारे में 5 बातें -

  1. धारा 80सी के तहत कुछ खास योजनाओं में निवेश करने पर कर में छूट की सुविधा मिलती है. टैक्स से छूट पाने के लिए आयकर कानून कई निवेश माध्यमों में पैसा लगाने का विकल्प देता है. इनमें म्यूचुअल फंड के टैक्स फंड (ईएलएसएस), बैंक की टैक्स सेविंग्स फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम, एनपीएस, पीपीएफ, जीवन बीमा पॉलिसी, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम शामिल हैं. एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश इन निवेश माध्यमों में किया जा सकता है.
  2. ट्यूशन फीस भी 80सी के दायरे में आती है. अगर करदाता के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, तब बच्चों की ट्यूशन फीस पर भी धारा 80सी के तहत टैक्स छूट प्राप्त की जा सकती है. हर साल अधिकतम दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर यह छूट ली जा सकती है. इसके लिए आपको स्कूल द्वारा जारी फीस की रसीद देनी होती है. 
  3. टैक्स में छूट के लिए 31 मार्च तक के निवेश ही दायरे में आते हैं. यानी हमे 2018 में 2017-18 वित्तीय वर्ष का कर देते हैं. और इसी वित्ती वर्ष के लिए फॉर्म भरते जबकि यह फॉर्म 2018-19 में भरा जाता है. 
  4. अगर 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ लेना है तो वित्त वर्ष खत्म होने से पहले निर्धारित निवेश माध्यमों में निवेश करना जरूरी है. कारण साफ है कि जब आप निवेश के पेपर लगाएं वह वित्तीय वर्ष की तारीखों के भीतर का ही होना चाहिए.
  5. अमूमन कंपनियां हर साल जनवरी में पहले-दूसरे हफ्ते तक निवेश का प्रमाण जमा करने को कहती हैं. इसकी वजह यह है कि वे वित्त वर्ष के बाकी तीन महीने टीडीएस काटने का विकल्प खुला रखती हैं. (आयकर की धारा 80 के बारे में पढ़ें विस्तार से -- क्या है आयकर की धारा 80 सी, कैसे उठाएं इसका ज्यादा लाभ)

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