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पीपीएफ सहित अन्य लघु बचत योजनाओं पर सरकार ने ब्याज 0.1 फीसदी घटाया

माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम के बाद बैंक भी अब लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं.

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पीपीएफ सहित अन्य लघु बचत योजनाओं पर सरकार ने ब्याज 0.1 फीसदी घटाया

प्रतीकात्मक चित्र

खास बातें

  1. पीपीएफ पर अब 7.8 प्रतिशत का वार्षिक ब्याज मिलेगा
  2. किसान विकास पत्र पर 7.5% ब्याज मिलेगा और यह 115 महीने में परिपक्व होगा
  3. सुकन्या समृद्धि खातों पर अब वार्षिक 8.3 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा
नई दिल्ली: सरकार ने लघु बचत योजनाओं - लोक भविष्य निधि (पीपीएफ), किसान विकास पत्र ओर सुकन्या समृद्धि योजनाओं पर ब्याज दर में 0.1 प्रतिशत की कटौती कर दी है. यह कटौती जुलाई-सितंबर की तिमाही के लिए होगी. माना जा रहा है कि इस कदम से बैंक भी जमा पर ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं.

अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर में 0.1 प्रतिशत की कटौती की गई है. हालांकि बचत खातों की जमा पर चार प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर को कायम रखा गया है. पिछले साल अप्रैल से लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को तिमाही आधार पर समायोजित किया जा रहा है.

वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर अब 7.8 प्रतिशत का वार्षिक ब्याज मिलेगा. किसान विकास पत्र पर 7.5 प्रतिशत का ब्याज देय होगा और यह 115 महीने में परिपक्व होगा.

लड़कियों के लिए सुकन्या समृद्धि खातों पर अब वार्षिक 8.3 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा. अभी तक इस योजना पर 8.4 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है. वरिष्ठ नागरिक योजना पर 8.3 प्रतिशत का ब्याज दिया जाएगा. इस योजना में ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर किया जाता है. इसी तरह एक से पांच साल की मियादी जमा पर 6.8 से 7.6 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा, जिसका भुगतान तिमाही आधार पर किया जाएगा. वहीं पांच साल की आवर्ती जमा पर कम यानी 7.1 प्रतिशत का ब्याज दिया जाएगा.

मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही के लिए लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें अधिसूचित करते हुए कहा कि सरकार के फैसले के अनुसार लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों को तिमाही आधार पर अधिसूचित किया जा रहा है. तिमाही ब्याज दरें तय करते हुए मंत्रालय ने कहा कि लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों को सरकारी बांड से प्राप्ति से संबद्ध किया जाएगा. माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम के बाद बैंक भी अब लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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