NDTV Khabar

पेट्रोल, डीजल के दाम रोजाना तय करने की व्यवस्था में बदलाव से सरकार का इनकार

ईंधन के दाम में जुलाई के बाद से 7.3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के साथ उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने यह बात कही.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
पेट्रोल, डीजल के दाम रोजाना तय करने की व्यवस्था में बदलाव से सरकार का इनकार

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ( फाइल फोटो )

खास बातें

  1. कीमतों में वृद्धि को लेकर आलोचना को अनुचित करार दिया प्रधान ने
  2. केवल अस्थायी तौर पर मूल्य वृद्धि की प्रवृत्ति को जोर-शोर से उठाया जा रहा
  3. ईंधन के दाम जुलाई के बाद से 7.3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से बढ़ रहे हैं
नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने पेट्रोल और डीजल के दाम की दैनिक आधार पर समीक्षा करने से रोकने के लिये सरकार के हस्तक्षेप से बुधवार को इनकार किया. ईंधन के दाम में जुलाई के बाद से 7.3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के साथ उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने यह बात कही. मंत्री ने यह भी कहा कि सुधार जारी रहेगा. उनसे यहां संवाददाताओं ने पूछा था कि क्या मूल्य वृद्धि को देखते हुए सरकार की दैनिक आधार पर कीमत में बदलाव की प्रक्रिया रोकने की योजना है. उन्होंने तीन जुलाई से कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को हल्का करने के लिये कर में कटौती को लेकर भी कोई प्रतिबद्धता नहीं जतायी. उन्होंने कहा कि सरकार को ढांचागत सुविधा और सामाजिक बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर वित्त पोषण की जरूरत है.

यह भी पढे़ं : नितिन गडकरी की वाहन कंपनियों को दो टूक: वै​कल्पिक ईंधन अपनाएं अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहें

कीमतों में वृद्धि को लेकर आलोचना को अनुचित करार देते हुए प्रधान ने कहा कि 16 जून को दैनिक आधार पर कीमत समीक्षा के बाद एक पखवाड़े तक कीमतों में आई कमी की अनदेखी की गयी और केवल अस्थायी तौर पर मूल्य वृद्धि की प्रवृत्ति को जोर-शोर से उठाया जा रहा है. देश अपनी जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात से पूरा करता है और इसीलिए 2002 से घरेलू ईंधन की दरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव से जोड़ा गया है.

यह भी पढे़ं : पेट्रोल की पोल खोल: कैसे 26 रुपये का पेट्रोल 70 रुपये का हो जाता है

उन्होंने कहा कि पहले दरों को हर पखवाड़े बदला जाता था लेकिन 16 जून से इसे दैनिक आधार पर बदला जा रहा है. दैनिक आधार पर समीक्षा में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम में अगर कोई कटौती होती है तो उसका तुरंत लाभ ग्राहकों को मिलता है. इससे कीमतों में एक बार में अचानक से वृद्धि के बजाए कम मात्रा में वृद्धि होती है.

VIDEO : तीन साल में सबसे महंगा हुआ पेट्रोल​
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा, ‘सरकार का तेल कंपनियों के रोजाना के कामकाज से कोई लेना-देना नहीं है. केवल कुशलता ऐसा क्षेत्र है जहां सरकार तेल कंपनियों की दक्षता में सुधार के लिये हस्तक्षपे करेगी.’ 

 इनपुट : भाषा


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement