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देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम के बीच सरकार ने दिया यह बयान

उसने कहा है कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी चिंता का कारण है क्योंकि इससे आयात बिल 50 अरब डालर तक बढ़ सकता है तथा इसका चालू खाते के घाटे (कैड) पर प्रभाव पड़ेगा. 

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देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम के बीच सरकार ने दिया यह बयान

पेट्रोल और डीजल के दाम सर्वोच्च सतर पर हैं.

खास बातें

  1. तेल के दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर
  2. पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम का असर महंगाई पर
  3. सरकार से कर कम करने की उम्मीद
नई दिल्ली:

सरकार ने तेल के बढ़ते दाम से लोगों को राहत देने के लिये उत्पाद शुल्क में कटौती को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जतायी है. उसने कहा है कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी चिंता का कारण है क्योंकि इससे आयात बिल 50 अरब डालर तक बढ़ सकता है तथा इसका चालू खाते के घाटे (कैड) पर प्रभाव पड़ेगा. 

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आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि तेल के दाम में तेजी का आर्थिक वृद्धि पर मामूली प्रभाव पड़ेगा. तेल का दाम 80 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया है जो नवंबर 2014 के बाद सर्वाधिक है. उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और समुचित कदम उठाये जाएंगे. उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया. 

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यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करेगी , उन्होंने कहा कि उन्हें उत्पाद शुल्क के बारे में कुछ भी नहीं कहना है. गर्ग ने कहा कि तेल के दाम में वृद्धि से तेल आयात खर्च में चालू वित्त वर्ष में 25 अरब डालर से 50 अरब डालर के दायरे में वृद्धि हो सकती है. देश ने पिछले वित्त वर्ष में तेल आयात बिल पर 72 अरब डालर खर्च किया था. 


उन्होंने कहा कि इससे चालू खाते का घाटा बढ़ेगा लेकिन मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और राजकोषीय घाटे की स्थिति चिंताजनक नहीं है. गर्ग ने कहा कि बांड और शेयर बाजारों से विदेशी पूंजी निकासी देखी गयी है लेकिन यह चिंताजनक नहीं है. उन्होंने कहा कि डेढ़ महीने में 4-5 अरब डालर की निकासी बहुत अधिक नहीं है. सरकार उधारी कार्यक्रम जारी रखेगी और इस पर प्रतिक्रिया देने का कोई कारण नहीं दिखता.



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