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जीएसटी (GST) : वसूला जाता रहेगा 'लहू का लगान', बिन्दी-कुमकुम-गर्भनिरोधक-निरोध पर टैक्स नहीं; हलचल जारी

रेट लिस्ट के मुताबिक, जहां सरकार ने प्रोत्साहनपूर्ण फैसले के तहते गर्भनिरोधक और निरोध पर कोई टैक्स नहीं लगाया है वहीं सैनिटरी नैपकिन पर 12 फीसदी की दर से टैक्स लगाया गया है.

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जीएसटी (GST) : वसूला जाता रहेगा 'लहू का लगान', बिन्दी-कुमकुम-गर्भनिरोधक-निरोध पर टैक्स नहीं; हलचल जारी

जीएसटी : वसूला जाता रहेगा 'लहू का लगान', बिन्दी-कुमकुम-गर्भनिरोधक-निरोध पर टैक्स नहीं; हलचल जारी

खास बातें

  1. गर्भनिरोधक, निरोध, बिंदी, कुमकुम पर कोई टैक्स नहीं लगाया है
  2. वहीं सैनिटरी नैपकिन पर 12 फीसदी की दर से टैक्स लगाया गया है
  3. सैनिटरी पैड्स को करमुक्त किए जाने की मांग जारी है
नई दिल्ली: जीएसटी (GST) सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है जोकि नया डायरेक्ट टैक्स सिस्टम है जिसे 1 जुलाई से लागू किया जाना है. इसकी पिछले दिनों जारी की गई रेट लिस्ट के मुताबिक, जहां सरकार ने प्रोत्साहनपूर्ण फैसले के तहते गर्भनिरोधक और निरोध पर कोई टैक्स नहीं लगाया है वहीं सैनिटरी नैपकिन पर 12 फीसदी की दर से टैक्स लगाया गया है. बता दें कि काफी समय से सैनिटरी पैड्स को करमुक्त किए जाने की मांग जारी है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर मुहिम भी चल रही है. 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स को 20 से अधिक करों इनडायरेक्ट टैक्सेस के एवज में लगाया जा रहा है. हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी टैक्स की दरें तय कर दी हैं. 18 मई 2017 को हुई बैठक के बाद जारी की गई  रेट लिस्ट में सभी वस्तुओं (सेवाओं नहीं) को लेकर स्पष्ट रूप से टैक्स की दर बताई गई है. (आर्टिकल के अंत में आप सरकार की रेट लिस्ट की कॉपी देख सकते हैं.)

श्रीनगर में हुई बैठक के बाद जारी किए गए इस मसौदे में NIL, 5 फीसदी, 12 फीसदी, 28 फीसदी के स्लैब के तहत कॉन्डम, कॉन्ट्रासेप्टिव (निरोध और गर्भनिरोधक) को जीएसटी रेट स्लैब में NIL कैटिगरी में रखा गया है. जाहिर है स्वास्थ्य और जनसंख्या जैसे मसलों को ध्यान में रखते हुए इन तक अधिक से अधिक लोगों की पहुंच बनाने के लिए इन पर टैक्स नहीं लगाने का फैसला लिया गया होगा. वहीं, कुमकुम, बिन्दी, सिंदूर और आलता को भी NIL कैटिगरी में रखा गया है. प्लास्टिक की चूड़ियां भी इसी कैटिगरी का हिस्सा हैं. ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि महिला स्वास्थ्य से जुड़ी इस जरूरी चीज पर 12 फीसदी टैक्स क्यों लगाया है. हालांकि यहां गौर इस पर भी किया जा सकता है कि सरकार ने कुछ जरूरी चीजों को इस निल कैटिगरी में रखा है लेकिन यदि पूजा सामग्री जैसी जीवन और मौत से नहीं जुड़ी चीजों को भी निल टैक्स स्लैब में रखा गया है तब मासिक धर्म से जुड़ी इस जरूरी वस्तु को इस दायरे में न रखे जाने को लेकर बवाल मचाना स्वाभाविक है. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष का कहना है कि इसे टैक्स फ्री करने से लाखों गरीब महिलाओं के लिए यह खरीदना आसान हो जाएगा.

केरल सरकार नैपकिन तो बांटेगी ही, नष्ट करने का 'उपाय' भी देगी
वैसे बता दें कि केरल में हाल ही में सरकार की ओर से हर स्‍कूल में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है जिसके जरिए पैड दिए जाएंगे. देश का पहला ऐसा राज्‍य बन गया है जहां यह कदम उठाया गया है. यह नियम हायर सेकेंडरी स्‍कूलों में लागू होगा. इंडियन एक्सप्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की फेसबुक पोस्ट के हवाले से बताया कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता प्रत्येक महिला का अधिकार है. सरकार शी पैड (she pad) के तहत साफ सुथरे सैनिटरी पैड स्कूल की लड़कियों को देगी. साथ ही नैपकिन डेस्ट्रॉयर (जिससे इस्तेमाल किए गए नैपकिन को नष्ट किया जा सकता हो) भी देगी. पांच सालों तक इस स्कीम को चलाए जाने की कीमत 30 करोड़ रुपये होगी. यह है मुख्यमंत्री की संबंधित पोस्ट : 

 

क्या है लहू का लगान...
ट्विटर पर लहू का लगान नाम से टैक्‍स फ्री सेनेटरी नैपकिन अभियान भी जारी है जिसे विकराल समर्थन मिला. 'शी सेज'-She says-नाम की एक संस्था ने 'लहू का लगान' (#LahukaLagaan) नाम से एक कैंपेन की शुरुआत की थी जिसमें कैंपेन के जरिए उन्होंने सैनिटरी नैपकिन को टैक्स फ्री करने का मुद्दा उठाया गया था और इसे आम लोगों से लेकर सेलिब्रिटीज तक ने बुलंद आवाज में सपोर्ट किया था. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और सांसद सुष्मिता देव पहले ही सेनेटरी नैपकिन को सस्‍ता करने की सिफारिश कर चुकी हैं.
 
दिल्ली महिला आयोग ने भी सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी के तहत करमुक्त करने की अपील करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा था. आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सैनेटरी नैपकिन के मुद्दे पर उनके दखल की मांग की जिस पर जीएसटी सूची के अनुसार 12 फीसदी कर लगाया गया है. उन्होंने कहा था-स्वच्छता एवं उचित स्वास्थ्य हर महिला नागरिक का मौलिक अधिकार है. सोशल मीडिया पर मुहिम जारी है और लोगों में अब भी इस बात को लेकर हैरानी और आक्रोश है कि आखिर सरकार ने तमाम निवेदनों (और जरूरतों) के बावजूद सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी में टैक्स फ्री क्यों नहीं रखा है.. 
 

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हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी तरह का कोई नया आदेश, निर्देश या सूचना सरकार की ओर से जारी नहीं की गई है जिसमें इस टैक्स को हटाने या कम करके 5 फीसदी कैटिगरी में करने का प्रस्ताव दिया गया हो या इस पर विचार किया जा रहा हो. 


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