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जीएसटी (GST) लागू होने के बाद स्मार्टफोन होंगे सस्ते, पूजा सामग्री NIL कैटिगरी में, मेडिकल उपकरण भी सस्ते

जीएसटी काउंसिल ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी टैक्स की दरें पिछले हफ्ते तय कर दी हैं. अब सरकार की ओर से कहा गया है कि वे स्मार्टफोन खरीदने वालों, विभिन्न प्रकार के चिकित्सकीय उपकरणों और सीमेंट की कीमतें नए टैक्स के लागू होने के चलते कम हो जाएंगी.

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जीएसटी (GST) लागू होने के बाद स्मार्टफोन होंगे सस्ते, पूजा सामग्री NIL कैटिगरी में, मेडिकल उपकरण भी सस्ते

GST लागू होने के बाद स्मार्टफोन होंगे सस्ते, पूजा सामग्री पर जीसएटी NIL, मेडिकल उपकरण भी सस्ते

खास बातें

  1. जीएसटी की दरें 1 जुलाई से लागू होनी है
  2. स्मार्टफोन, सीमेंट सस्ता होगा जबकि पूजा सामग्री निल कैटेगरी में रखी गई है
  3. चिकिस्तकीय उपकरण सस्ते होंगे, आयुर्वेदिक दवाएं भी इसमें शामिल हैं
नई दिल्ली:

जीएसटी काउंसिल ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी टैक्स की दरें पिछले हफ्ते तय कर दी हैं. अब सरकार की ओर से कहा गया है कि वे स्मार्टफोन खरीदने वालों, विभिन्न प्रकार के चिकित्सकीय उपकरणों और सीमेंट की कीमतें टैक्स के लागू होने के चलते कम हो जाएंगी. यानी, 1 जुलाई को जीएसटी पूरे देश में लागू होने के बाद आपको ये चीजें अपेक्षाकृत सस्ती पड़ेंगी. इसके अलावा पूजा सामग्री को जीएसटी की 'nil' कैटिगरी में रखा गया है. 

स्मार्टफोन पर 1 फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगती है और वैट भी जोड़ा जाता है. ऐसे में आपके हाथ में जब एक स्मार्टफोन पहुंचता है तो उसकी कीमत इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह किस राज्य में खरीदा गया. प्रति राज्य इसकी अंतिम कीमत अलग अलग हो सकती है और इसमें 5 फीसदी से लेकर 15 फीसदी तक अंतर हो सकता है. 

वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया- अभी स्मार्टफोन पर एक्साइज ड्यूटी और वैट मिलाकर टैक्स की वास्तविक दर 13.5 फीसदी से ज्यादा हो जाती है. जीएसटी काउंसिल ने स्मार्टफोन हैंडसेट पर 12 फीसदी की दर से ही टैक्स लगाने का फैसला किया है.


सीमेंट को लेकर वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस पर 28 फीसदी टैक्स लगेगा. अभी सीमेंट की एक बोरी पर विभिन्न करों को मिला दें तो यह 31 फीसदी बैठती है. 

मेडिकल इंस्ट्रूमेंट पर औसतन समेत मेडिकल डिवाइस पर अभी कुल मिलाकर 13 फीसदी से भी ज्यादा की दर से टैक्स लगता है. प्रस्तावित जीएसटी के मुताबिक आयुर्वेदिक दवाओं समेत सभी दवाओ पर 12 फीसदी की टैक्स दर रखी गई है. 

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बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली परिषद ने बैठक के पहले सत्र में वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत नियमों को मंजूरी दी है. परिषद में सभी राज्‍यों के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं. 80 से 90 प्रतिशत वस्तुओं, सेवाओं के बारे में यह तय कर लिया गया कि उन्हें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के कर ढांचे में कहां रखा जाए. फिटमेंट इस तरीके से किया गया है कि लोगों पर नई कर व्यवस्था के कारण कर का बोझ नहीं बढ़े... इसलिए वस्तुओं और सेवाओं को उनके ऊपर इस समय लागू उत्पाद शुल्क, वैट या सेवा कर को ध्यान में रखकर जीएसटी की विभिन्न दरों के साथ जोड़ा गया है. 

(न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से इनपुट)



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