जॉब चेंज कर ली. पीएफ ट्रांसफर करवाया क्या? नहीं? ये खास बातें जान लें, ताकि परेशानी न हो

जॉब चेंज कर ली. पीएफ ट्रांसफर करवाया क्या? नहीं? ये खास बातें जान लें, ताकि परेशानी न हो

नौकरी चेंज की है तो पीएफ संबंधी कुछ जरूरी बातें जान लें (प्रतीकात्मक फोटो)

खास बातें

  • अगर आपने जॉब चेंज की है तो पीएफ ट्रांसफर करें या पैसा निकालें
  • इसके लिए क्या हैं तरीके और ऐसा न करने पर क्या हो सकता है नुकसान
  • पांच बातें जानें ताकि आप अपनी मेहनत की कमाई को न खोएं
नई दिल्ली:

क्या आपने जॉब चेंज की है? या फिर जॉब छोड़कर अपना खुद का काम करने लगे हैं? यदि हां तो आपको अपने पीएफ यानी प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) के बारे में भी सोचना चाहिए. इसका आप क्या करने जा रहे हैं? क्या आप नई कंपनी में इसे ट्रांसफर करवाने जा रहे हैं? या फिर अपना पूरा पैसा निकाल लेने के बारे में सोच रहे हैं?

अपने ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) का पैसा ट्रांसफर करवाना या फिर निकालना, दोनों ही, थोड़ी थकाने वाली प्रक्रिया है. अगर आपने अब तक अपनी पिछली जॉब के पीएफ अकाउंट को लेकर कोई 'कॉल' नहीं ली है तो आपको यह लेख जरूर पढ़ना चाहिए... आखिर वह पैसा आपकी मेहनत की कमाई का हिस्सा है.

1. यदि आपने तीन साल से अधिक समय से अपने ईपीएफ अकाउंट में पैसा जमा नहीं करवाया है तो वह अकाउंट डोरमेंट अकाउंट मान लिया जाता है. डोरमेंट अकाउंट पर कोई ब्याज नहीं मिलता. 1 अप्रैल 2011 से सरकार ने ऐसे निष्क्रिय पड़े अकाउंट्स पर ब्याज देने बंद कर दिया है.

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2. मान लीजिए कि आपके निष्क्रिय पड़े प्रॉविडेंट फंड अकाउंट में 1 लाख रुपया जमा है. यदि मान लें कि ईपीएफ पर दिया जाने वाला ब्याज 8.5 फीसदी रहता है, तो 10 सालों में यह रकम 2.26 लाख रुपए तक यानी दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है. ऐसे में यदि आपके पीएफ में यूं ही पैसा पड़ा है तो इसका मतलब है कि आप उतने समय तक ब्याज से होने वाली आमदनी गंवा रहे हैं.

3. वैसे यदि आपने नौकरी बदली है तो अपने यूएएन नंबर यानी यूनिवर्सल अकाउंट नंबर अपने नए नियोक्ता को बता दें. आपका नया नियोक्ता आपकी नई कंपनी के ईपीएफ अकाउंट में इस यूएएन नंबर को दर्ज कर देगा. यूएएन यूनीक नंबर होता है जो ईपीएफओ द्वारा प्रत्येक सदस्य को दिया जाता ताकि सदस्य के मल्टीपल पीएफ अकाउंट्स एक-लिंक हो सकें.

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4. यदि आपने नई कंपनी जॉइन कर ली है तो आप अपने पिछले ईपीएफ अकाउंट का अमांउट नई कंपनी वाले अपने ईपीएफ अकाउंट में, ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड, से ट्रामंसफर कर सकते हैं. ऑनलाइन ट्रांसफर के लिए आपके पिछले नियोक्ता के पास डिजिटल सिग्नेचर सुविधा होनी चाहिए ताकि वह आपका ईपीएफ फॉर्म अटेस्ट कर सके. ऑफलाइन मोड से ट्रांसफर के लिए ईपीएफ ट्रांसफर फॉर्म अपने हालिया यानी कि नए नियोक्ता के पास सब्मिट करवा दीजिए. आपका नया नियोक्ता आपकी पिछली कंपनी से संपर्क कर लेगा.

5. यदि आपने नौकरी छोड़ दी है और आप दो महीने से अधिक समय तक के लिए बरोजगार हैं, तो आप फॉर्म 19 का प्रयोग करके अपना पैसा निकाल सकते हैं. आप यह फॉर्म ईपीएफओ की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं. यदि आपके पीएफ अकाउंट को पांच साल से कम हुआ था और अमाउंट 50 हजार रुपए से ज्यादा था, तो ईपीएफओ इस पर टीडीएस काटेगा. यह 10 फीसदी की दर पर काटा जाएगा. यदि पांच साल बाद निकालते हैं तो अमाउंट पूरी तरह से करमुक्त होगा.