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एचआरए (HRA) के दावों पर सरकार की पैनी नजर : इन तरीकों से 'बच' सकते हैं आप...

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एचआरए  (HRA) के दावों पर सरकार की पैनी नजर : इन तरीकों से 'बच' सकते हैं आप...

एचआरए (HRA) के दावों पर सरकार की पैनी नजर : इन तरीकों से 'बच' सकते हैं आप... (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: वे नौकरीपेशा लोगों द्वारा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के दावे के लिए जमा करवा गईं किराए की रसीद (Rent Receipt) को लेकर इनकम टैक्स विभाग (Income Tax) की सख्ती के बाद अब मुश्किल यह हो गई है कि जो लोग इन पर्चियों के जरिए रिबेट लेते थे, उनके लिए अब क्या करें, क्या न करें कि स्थिति पैदा हो गई है. दरअसल, आयकर विभाग आपके द्वारा सब्मिट करवाई गई किराए की पर्चियों की अच्छी खासी पड़ताल करेगा. मुंबई इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ने एचआरए डिडक्शन संबंधी एक दावे के मामले में संबंधित फैसला दिया है जिसके मुताबिक आकलन अधिकारी एचआरए डिडक्शन के लिए करदाता से किराए पर रहने संबंधी और पुख्ता सबूत मांग सकता है. एचआरए किसी भी एंप्लॉयी की सैलरी का बड़ा हिस्सा कवर करता है. नौकरीपेशा वे लोग जो किराए पर रहते हैं वे एचआरए के लिए दावा करते हैं और अपना टैक्स कानूनी रूप से बचाते हैं. दरअसल एक सीमा तक इस पर टैक्स छूट मिलती है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति रेंट पर नहीं रहता है तो एचआरए पूरी तरह से कर योग्य हिस्सा होता है. यानी, इस पर टैक्स कटता है.

अशोक माहेश्वरी एंड असोसिएट्स एलएलपी में डायरेक्टर (टैक्स और नियामक) संदीप सहगल के मुताबिक, मुंबई ट्रिब्यूनल द्वारा यह साफ कर दिया गया कि एचआरए दावे के लिए केवल किराए की पर्चियां भर देना अब नाकाफी है और इसे पुख्ता और संपूर्ण दस्तावेज के दौर पर नहीं माना जाएगा. साथ ही टैक्स अधिकारी इस बाबत अन्य दस्तावेजों की मांग कर सकती हैं ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि दावा सही है.

टैक्समैन (Taxmann) के मनीत पुरी का कहना है कि अब फर्जी रेंट रसीदों से एचआरए छूट पाने वाले लोगों को ये दावे हासिल करना मुश्किल हो गया है. जानकारों की राय में वे लोग जो अपने रिश्तेदारों को किराया देते हैं उन पर अधिक पड़ताल की जाएगी.  मनीत पुरी के मुताबिक सही प्रक्रिया का पालन करें ताकि किसी तरह की गफलत से बचे रहें.

जिस भी रिश्तेदार के मकान में किराए पर रह रहे हैं, उसके साथ रेंट अग्रीमेंट बनवा लें. आपके पास इस बाबत पक्का सबूत होना चाहिए कि आप अपनी मां, पिता या किसी करीबी रिश्तेदार के घर में रह रहे हैं. कैश में दिए गए किराए को लेकर सबूत देना थोड़ा मुश्किल होता है. अच्छा हो कि मकान मालिक के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने का सबूत आपके पास हो. साथ ही यदि किसी रिश्तेदार के नाम पर रेंटल पेमेंट कर रहे हों, तो वह निश्चित तौर पर आईटीआर फाइल करता हो और अपनी लिए गए किराए की रसीदों को रिटर्न में दिखा दे.

हो सकता है कि आपके राशन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और आईटीआर में दिया गया अड्रेस मैच न करता हो, उस अड्रेस से जोकि आपकी पर्ची में दिखाया गया है. ऐसे मामलों में इनकम टैक्स विभाग पड़ताल करेगा. यदि आप अपने रिश्तेदार की सोसायटी के किसी फ्लैट में रह रहे हैं तो यह सुनिश्चत कर लें कि सोसायटी के सेक्रेटी को आपके किराए पर रहने का पता हो.

इसके अलावा, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि उसी क्षेत्र में वैसे ही मकान पर किराये का जो बाजार मूल्य चल रहा है, आपका किराया भुगतान उससे ज़्यादा नहीं होना चाहिए. ऐसे मामलों में आयकर अधिकारी मकान किराया भत्ते पर मिलने वाली छूट को खारिज कर सकता है.


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